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Ganesha Chaturthi 2023 : सेहत से जुड़ी हैं गणेश जी को दुर्वा चढ़ाने की वजह, जानें इस घास के सेवन के फायदे
Durva grass benefits : दूर्वा यानी हरी दूब या घास जिसे अरुगमपुल भी कहा जाता है, गणेश जी की पूजा के दौरान जरुर चढ़ाई जाती है। इस घास की धार्मिक महत्ता की वजह से कई पूजा-अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन भगवान गणेश की आराधना के लिए इसका खास उपयोग होता है।
घास का आयुर्वेदिक औषधि का चिकित्सा में पारंपरिक जड़ी-बूटी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। गणेश जी को यह घास चढ़ाने की पीछे की वजह भी सेहत से जुड़ी है। आइए जानते हैं दूर्वा के औषधीय गुण और सेहत लाभ।

रक्त शोधक जड़ी बूटी है
दूर्वा ठंडी जड़ी बूटी है जो रक्त शोधक है। इसलिए रंगत को निखारता है और त्वचा का कई समस्याओं का इलाज करता है। सनबर्न और घमौरियों में दूर्वा को चंदन पाउडर के साथ लगाने से काफी फायदा होता है।
पीरियड को करता है नियमित
दूर्वा जूस लंबे समय तक मासिक धर्म चक्र को नियमित करने, भारी रक्तस्राव को नियंत्रित करने और पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) को ठीक करने के लिए एक शक्तिशाली हर्बल उपचार है।
यूटीआई का करता है इलाज
दूर्वा का रस एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है जो मूत्र पथ के संक्रमण के इलाज में काफी मदद करता है। हर तरह की जलन जैसे एसिडिटी और पेशाब में जलन के लिए जूस लाजवाब है।
रक्त शर्करा को करता है नियंत्रित
दूर्वा के रस में साइनोडोन डेक्टाइलोन नामक जैव-रासायनिक यौगिक होता है जिसका हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव होता है और इस प्रकार यह मधुमेह और पीसीओएस में रक्त शर्करा के स्तर और इंसुलिन प्रतिरोध को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
मसूड़ों से खून और छालों का करता है इलाज
मुंह के छालों और घावों की समस्या को दूर्वा कम करता है। इसमें फ्लेवोनोइड्स होते है जो यह अल्सर-रोधी गुणों के लिए जाने जाते है। इसके रस का नियमित सेवन करने से आपके मसूड़ों से खून आना, सांस में बदबू आना और दांतों को मजबूत करने में मदद करता है।

इस वजह से चढ़ाई जाती हैं दूर्वा
एक पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीनकाल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था, उसके कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राहि-त्राहि मची हुई थी. अनलासुर एक ऐसा दैत्य था, जो मुनि-ऋषियों और साधारण मनुष्यों को जिंदा निगल जाता था। इस दैत्य के अत्याचारों से त्रस्त होकर इंद्र सहित सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि भगवान महादेव से प्रार्थना करने जा पहुंचे और सभी ने महादेव से यह प्रार्थना की कि वे अनलासुर के आतंक का खात्मा करें। तब महादेव ने समस्त देवी-देवताओं तथा मुनि-ऋषियों की प्रार्थना सुनकर उनसे कहा कि दैत्य अनलासुर का नाश केवल श्री गणेश ही कर सकते हैं। फिर सबकी प्रार्थना पर श्री गणेश ने अनलासुर को निगल लिया, तब उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। इस परेशानी से निपटने के लिए कई प्रकार के उपाय करने के बाद भी जब गणेशजी के पेट की जलन शांत नहीं हुई, तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर श्री गणेश को खाने को दी। यह दूर्वा श्री गणेशजी ने ग्रहण की, तब कहीं जाकर उनके पेट की जलन शांत हुई। ऐसा माना जाता है कि श्री गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा तभी से आरंभ हुई।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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