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दिल्ली-NCR के स्कूली बच्चों में फैल रही हाथ, पैर व मुंह में छाले की बीमारी, क्या है HFMD और बचाव
HFMD Rising in Delhi-NCR : दिल्ली-एनसीआर में बच्चों में हैंड-फुट-माउथ डिजीज (HFMD) नामक वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हैंड फुट माउथ डिजीज (HFMD) एक आम लेकिन संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खासतौर पर छोटे बच्चों में पाई जाती है। यह बीमारी कॉक्ससकी वायरस नामक एंटरोवायरस के कारण होती है।
आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं, हालांकि कभी-कभी बड़े बच्चे और वयस्क भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह बीमारी हल्की होती है और ज्यादातर मामले 7-10 दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों में यह गंभीर रूप भी ले सकती है। इसलिए समय पर लक्षणों को पहचानना और सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।

HFMD कैसे फैलता है?
HFMD मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक फैलता है। जब कोई बच्चा खांसता, छींकता या उसके थूक और नाक के म्यूकस के संपर्क में कोई दूसरा बच्चा आता है तो वायरस आसानी से फैल जाता है। इसके अलावा, संक्रमित सतह, खिलौने, कपड़े या बर्तनों को छूने से भी यह बीमारी फैल सकती है। यही कारण है कि स्कूल, डे-केयर सेंटर या ऐसी जगहें जहां बच्चे समूह में रहते हैं, वहां HFMD तेजी से फैलने की संभावना रहती है।
HFMD के लक्षण
- संक्रमण के 3-6 दिन बाद इसके लक्षण नजर आने लगते हैं।
- सबसे पहले हल्का बुखार, सिरदर्द और गले में खराश होती है।
- बच्चों की भूख कम हो जाती है और वे चिड़चिड़े हो जाते हैं।
- बीमारी बढ़ने पर मुंह के अंदर दर्दभरे छोटे-छोटे छाले और अल्सर बन जाते हैं, जिससे बच्चे को खाना निगलने और बोलने में परेशानी होती है।
- कुछ दिनों बाद हाथों की हथेलियों, पैरों के तलवों, घुटनों और कोहनियों पर लाल चकत्ते या दाने निकल आते हैं। ये कभी-कभी फफोले का रूप ले लेते हैं।
- बच्चों को खुजली, जलन, थकान और शरीर में दर्द की भी शिकायत होती है।
गंभीर मामलों में लगातार तेज बुखार, उल्टी, डिहाइड्रेशन और पेशाब कम होना देखा जा सकता है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी HFMD वायरल मेनिंजाइटिस, एन्सेफलाइटिस या हार्ट इन्फ्लेमेशन जैसी जटिलताएं भी पैदा कर सकता है।
HFMD से बचाव
हालांकि इस बीमारी के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन साफ-सफाई और सावधानियां अपनाकर बच्चों को इससे बचाया जा सकता है।
- बच्चों को बार-बार साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।
- संक्रमित बच्चे को स्कूल या डे-केयर न भेजें, ताकि बीमारी और बच्चों तक न फैले।
- बच्चों के खिलौने, बर्तन और इस्तेमाल की चीजें नियमित रूप से साफ करें।
- बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पिलाएं, ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
- अगर बच्चा लगातार बीमार महसूस करे या तेज बुखार, उल्टी और कमजोरी की शिकायत करे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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