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कोरोना के बाद अब हंतावायरस का बढ़ा खतरा; भारत भी हुआ अलर्ट, जानें कितनी जानलेवा है यह बीमारी और लक्षण
Hantavirus Symptoms: दुनिया अभी कोरोना की मार से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि एक और जानलेवा वायरस ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे 'एमवी होंडियस' (MV Hondius) क्रूज शिप पर हंतावायरस के प्रकोप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित तमाम देशों की नींद उड़ा दी है। इस जहाज पर सवार 3 यात्रियों की मौत और कई अन्य के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद अब भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट पर हैं। हंतावायरस कोई नया नाम नहीं है, लेकिन क्रूज शिप जैसी बंद जगहों पर इसकी घातक दस्तक ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। चूहों से फैलने वाली यह बीमारी कितनी खतरनाक है और क्या यह भारत के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' पर हंतावायरस का कहर जानें क्या है पूरा मामला?
अटलांटिक महासागर में 'ओशनवाइड एक्सपीडिशंस' कंपनी का एक पोलर क्रूज जहाज, जो अर्जेंटीना से केप वर्डे की यात्रा पर था, अचानक एक 'मौत का जहाज' बन गया। जहाज पर सवार 155 यात्रियों में से 6 लोगों में हंतावायरस के संदिग्ध लक्षण मिले, जिनमें से 3 की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लैब टेस्ट के जरिए एक केस की पुष्टि की है और बाकी संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। एक यात्री की हालत गंभीर है और वह दक्षिण अफ्रीका के आईसीयू में भर्ती है।
सबसे पहले हंता वायरस से किसकी हुई मौत?
अटलांटिक महासागर में तहलका मचाने वाले हंतावायरस के इस घातक प्रकोप का "पहला मरीज" (Patient Zero) 70 वर्षीय डच पक्षी विशेषज्ञ लियो शिल्परूर्ड को माना गया है। स्वास्थ्य जांच अधिकारियों के अनुसार, लियो अपनी पत्नी मिराजम के साथ यात्रा पर थे और जहाज पर सवार होने से पहले दक्षिणी अर्जेंटीना के उशुआइया इलाके में एक लैंडफिल (कचरा क्षेत्र) के पास बर्डवॉचिंग कर रहे थे; इसी दौरान वे हंतावायरस के दुर्लभ और खतरनाक 'एंडीज स्ट्रेन' की चपेट में आए। माना जा रहा है कि संक्रमित चूहों के संपर्क वाले इसी क्षेत्र से वायरस उनके शरीर में पहुंचा, जिसके बाद क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' पर यह जानलेवा संक्रमण फैल गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अलर्ट जारी करना पड़ा।
हंतावायरस क्या है और यह इंसानों को कैसे मारता है?
हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों (Rodents) से फैलने वाला वायरस है। यह कोरोना की तरह हवा में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, बल्कि चूहों के संपर्क से फैलता है। चूहों के मलमूत्र, लार या उनके द्वारा दूषित की गई धूल में सांस लेने से यह वायरस इंसानों के शरीर में प्रवेश करता है। इसका सबसे खतरनाक रूप फेफड़ों पर हमला करता है, जिसमें मृत्यु दर 40% तक हो सकती है, जो इसे कोरोना से भी अधिक जानलेवा बनाती है।
क्या हैं हंता वायरस के शुरुआती लक्षण?
हंतावायरस के लक्षण शरीर में प्रवेश करने के 1 से 8 हफ्तों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआती तौर पर यह आम फ्लू जैसा लगता है:
शुरुआती अवस्था: तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना और सिरदर्द।
गंभीर अवस्था: कुछ दिनों बाद सीने में जकड़न, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ और फेफड़ों में तरल (Fluid) भरना।
किडनी पर असर: इसके दूसरे रूप (HFRS) में यह सीधे किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
भारत में कितना है खतरा और कैसे करें बचाव?
भारत में फिलहाल इस वायरस के बड़े प्रकोप की खबरें नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और शिपिंग के माध्यम से इसके आने का खतरा हमेशा बना रहता है। इससे बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बताते हैं:
चूहों से दूरी: अपने घर, स्टोर रूम और किचन में चूहों के प्रवेश को पूरी तरह रोकें।
सफाई में सावधानी: बंद जगहों की सफाई करते समय मास्क और दस्ताने पहनें। धूल उड़ाने वाले वैक्यूम क्लीनर के बजाय कीटाणुनाशक घोल (Bleach) का छिड़काव करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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