Latest Updates
-
कुदरत का अनोखा करिश्मा! महिला ने एक जैसी दिखने वाली चार जुड़वां बच्चियों को दिया जन्म, डॉक्टर भी हैरान -
Chaturmas 2026: चातुर्मास कब से शुरू होगा? इस दौरान क्या करें और क्या न करें? जानें सभी जरूरी नियम -
International Self Care Day: अच्छी सेहत के लिए सेल्फ-केयर है जरूरी, रोजाना अपनाएं ये 5 सेल्फ केयर हैबिट्स -
रात में राजमा भिगोना भूल गए? इन आसान ट्रिक्स से बिना भिगोए भी बन जाएगा एकदम नरम राजमा -
National Cousins Day 2026 Wishes: नेशनल कजिन्स डे पर अपने भाई-बहन भेजें ये खास मैसेज, यादगार बन जाएगा दिन -
CJP Protest Delhi: आलिया भट्ट से लेकर सलमान खान तक, छात्रों के समर्थन में उतरे ये बॉलीवुड सितारे -
Chia Seeds Vs Sabja Seeds: चिया सीड्स या सब्जा के बीज, जानिए आपकी सेहत के लिए क्या बेहतर? -
टूटते-झड़ते बालों से हैं परेशान? ट्राई करें गुड़हल और नारियल तेल से बना हेयर ऑयल, रुक जाएगा Hair Fall -
6 महीने के बच्चे को सॉलिड फूड देते समय न करें ये 5 गलतियां, 'बच्चों की डॉक्टर' ने बताई सही शुरुआत -
हेल्दी दिखने वाले ये 7 फूड्स बढ़ा सकते हैं आपका ब्लड शुगर, खरीदने से पहले जरूर पढ़ लें लेबल
World Stroke Day 2023: एक नहीं तीन तरह के होते हैं स्ट्रोक, सर्दियों में भूलकर भी न करें ये काम
स्ट्रोक के बढ़ते जोखिमों की रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने और स्ट्रोक के शिकार लोगों को बेहतर देखभाल सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक को कुछ दशकों पहले तक असामान्य माना जाता था हालांकि समय के साथ इस आयु वर्ग वालों में भी जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है।
जब दिमाग की कोई नस ब्लॉक हो जाती है तो ब्रेन स्ट्रोक आता है। यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें समय पर इलाज ना मिलने पर मौत हो सकती है। ब्रेन स्ट्रोक आने से 24 घंटा पहले शरीर लक्षण देना शुरु हो जाता है। अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचान कर ली जाएं, तो गोल्डन ऑवर में इसके मरीज को ट्रीटमेंट देकर जान बचाई जा सकती हैं। आइए जानते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक कितने तरह के होते हें और कैसे लक्षणों को पहचानकर जान बचाई जा सकती है।

क्या है ब्रेन स्ट्रोक
स्ट्रोक एक आपातकालीन मेडिकल स्थिति है, इन्हें नियंत्रित रखना जरूरी जब दिमाग की नसें (आर्टिरीज) में खून की आपूर्ति में रुकावट हो जाती है या थक्का (क्लॉट) बनने पर दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन की प्रक्रिया में रुकावट उत्पन्न हो जाता है। इस स्थिति में दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इसके सेल्स (न्यूरॉन्स) मरने लगते हैं। वहीं, दिमाग को खून पहुंचाने वाली नलिका के फट जाने के कारण भी दिमाग के आंतरिक भाग में ब्लीडिंग होने लगता है। इन दोनों स्थितियों में दिमाग काम करना बंद कर देता है। समय पर सही उपचार न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
स्ट्रोक के प्रमुख प्रकार
इस्केमिक स्ट्रोक: अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार स्ट्रोक के लगभग 80 फीसदी मामले इस्केमिक के होते हैं। दिल की ब्लड वैसेल्स में रुकावट होने या फिर थक्का जमने की स्थिति को इस्केमिक स्ट्रोक कहते हैं। इसमें दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और दिमाग ढंग से काम नहीं कर पाता।
मिनी स्ट्रोक या टीआईए: ट्रांजिट इस्केमिक अटैक (टीआईए) को मिनी स्ट्रोक भी कहते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर 24 घंटे में स्वतः दूर हो जाते हैं, पर ऐसा स्ट्रोक एक तरह से खतरे की घंटी है, जो बड़े स्ट्रोक के रूप वापस आ सकता है।
हेमरेजिक स्ट्रोक: अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन के अनुसार लगभग 15% लोगों में दिमाग की ब्लड वैसेल्स फटने से ब्रेन हेमरेज होता है। इससे दिमाग के आंतरिक भाग में खून बहने लगता है।
ब्रेन स्ट्रोक में क्या है गोल्डन ऑवर
ब्रेन स्ट्रोक में पहले 4 से 4:30 घंटे को गोल्डन ऑवर्स माना जाता है। इस दौरान अगर स्ट्रोक का पता लगा लिया जाए तो अंदर सही उपचार से बचने की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं। लक्षण दिखने पर पीड़ित को पहले ही न्यूरो सुविधाओं से संपन्न हॉस्पिटल में ले जाएं, जहां एमआरआई व सीटी स्कैन की व्यवस्था हो। इन्हीं जांच से पता चलता है कि स्ट्रोक से दिमाग का कौन-सा भाग डैमेज हुआ है और कहां पर क्लॉट है। सबसे पहले मरीज के दिमाग की ब्लड वैसेल्स में जमे क्लॉट को घुलाने वाला इंजेक्शन लगाया जाता है। इंजेक्शन से राहत नहीं मिलने पर थ्रॉम्बेक्टॅमी प्रोसीजर से खून के थक्के को हटाया जाता है। जिससे मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
सर्दियों में ये गलती न करें
ठंड में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ने की वजह रक्त नलिकाओं के सिकुड़ने के साथ ब्लड प्रेशर का अनियंत्रित होना है। ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है। रक्त नली संकरी हो जाती हैं, उनका प्रेशर बढ़ जाता है। ऐसे में स्ट्रोक का खतरा पैदा करती हैं। दिमाग और शरीर का तापमान बैलेंस रखने के लिए नहाने का तरीका बदलना चाहिए। दरअसल ब्लड सर्कुलेशन ऊपर से नीचे यानी सिर से पैर की तरफ होता है। अगर आप सीधे सिर पर ठंडा पानी डालते हैं तो मस्तिष्क की महीन नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। सिर ठंडा होने लगता है, ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। ऐसे में हार्ट अटैक या ब्रेन स्टोक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए गुनगुने पानी से नहाएं और पैरों से शुरुआत करें।
नमक का करें परहेज
हाई बीपी के मरीज नमक सीमित मात्रा में लें और नियमित रूप से अपनी दवाएं लें। अधिक वजन को कंट्रोल करें। खानपान हेल्दी रखें. चिकना और गरिष्ठ भोजन खाने से परहेज करें। बाहरी फूड खाने से परहेज करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications