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कहीं बच्चा ना हो जाए साइबरबुलिंग का शिकार, ऐसे करें उसे प्रोटेक्ट
आज के समय में इंटरनेट के बिना जीवन की कल्पना करना भी काफी कठिन है। चाहे बड़े हो या बड़े, हर कोई ऑनलाइन जानकारी हासिल करने से लेकर शॉपिंग करने, वीडियो देखने व ऑनलाइन गेमिंग खेलने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इंटरनेट की दुनिया सिर्फ मनोरंजन या ज्ञान अर्जित करने का साधन ही नहीं है, बल्कि यह उतना ही खतरनाक भी है।
इंटरनेट के कारण हमारा जीवन कितना भी आसान क्यों न हो गया हो, लेकिन यह अपने साथ तरह-तरह के दबंगों के शिकार होने के खतरे भी लाता है। खासतौर से, जब बच्चा इसका इस्तेमाल करता है तो वह साइबरबुलिंग का शिकार हो सकता है। यह बच्चे के लिए ठीक नहीं है। इसलिए पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी है कि वह बच्चे को इंटरनेट के कई दुरूपयोगों के बारे में समझाएं। साथ ही, उन्हें साइबर बुलिंग से भी बचाने का प्रयास करें। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही आसान तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर साइबर बुलिंग से बच्चों को प्रोटेक्ट किया जा सकता है-

साइबरबुलिंग क्या है?
साइबरबुलिंग से बच्चे को प्रोटेक्ट करने से पहले आपको इसके बारे में जान लेना चाहिए। साइबरबुलिंग में एक व्यक्ति दूसरे के प्रति क्रूर व्यवहार करने के लिए इंटरनेट तकनीक का उपयोग करता है। ऑनलाइन अटैक आमतौर पर बच्चे को अधिक परेशान कर सकते हैं। एक झूठी अफवाह या एक शरारत उसके दोस्तों के बीच तेजी से फैल सकती है और उनके पर्सनल कंप्यूटर और सेल फोन में हमेशा के लिए रह सकती है। ऐसे में पीड़ित बच्चे को इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखता है।
ऐसे करें बच्चों को प्रोटेक्ट
बच्चों को साइबरबुलिंग से बचाने के लिए कुछ उपायों को अपनाया जा सकता है। मसलन-
• सबसे पहले तो आप बच्चे को इंटरनेट का इस्तेमाल सुरक्षित रूप से करने के तरीके समझाएं। उन्हें बताएं कि वे किसी भी तरह की आपत्तिजनक पोस्ट या वीडियो शेयर ना करें। इसके अलावा उन्हें समझाएं कि वे कभी भी अपना किसी तरह का पासवर्ड साझा न करें, यहां तक कि अच्छे दोस्तों के साथ भी उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।
• बुली को जवाब न दें। धमकाने वाला यही चाहता है। अगर वह देखता है कि आपका बच्चा परेशान है, तो संभावना है कि वह उसे और भी परेशान करेगा। अपने बच्चे को गहरी सांस लेने के लिए कहें। यदि आवश्यक हो तो कुछ वक्त के लिए कंप्यूटर से ब्रेक ले लें। इसके अलावा बच्चे से कहें कि वह अपनी सेटिंग्स आदि को चेंज करके बुली करने वाले को उससे फिर से संपर्क करने से रोके।
• अपने बच्चे के ऑनलाइन रहने के समय को सीमित करें। अगर बच्चे जरूरत से ज्यादा समय कंप्यूटर या फोन में बिताते हैं तो संभावना है कि वे इंटरनेट पर परेशानी में पड़ जाएं। इसलिए, आप उनके लिए दिन का एक तय समय रखें, जिसमें वे ऑनलाइन समय बिता सकते हैं। इसके बाद उन्हें आउटडोर या इनडोर एक्टिविटीज करने के लिए प्रेरित करें।
• अपने बच्चों को ऑनलाइन दोस्त बनाने से रोकें। आज के समय में बच्चे रियल की जगह इंटरनेट की दुनिया में दोस्त बनाना अधिक पसंद करते हैं। ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन दोस्त बनाना गलत है, लेकिन ऐसी दोस्ती करते समय आपको पता नहीं होता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ कौन है। इसलिए, बच्चों को सिखाएं कि वे अनजान लोगों के साथ आसानी से ऑनलाइन मेलजोल न रखें क्योंकि वे उनसे जानकारी हासिल करने के बाद उन्हें ही परेशान कर सकते हैं।
• सबसे जरूरी है कि बच्चे जो भी ऑनलाइन कर रहे हैं, आप उसमें शामिल हों। बच्चे ऑनलाइन बुलियों के आसान शिकार हो सकते हैं। साथ ही, इस उम्र के बच्चों के लिए अपने माता-पिता के लिए चीजें छिपाना सबसे आम बात है। इसलिए आपको उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों से पहचानने की कोशिश करनी चाहिए। मसलन, बच्चे अपनी स्क्रीन छिपाते हैं, या ऑनलाइन जाने के लिए आपसे झूठ बोलते हैं। यह पैरेंट्स के लिए एक अलर्ट है। इसलिए, सुनिश्चित करें कि बच्चा क्या कर रहा है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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