Mother’s Day Special: बेटे की जिद्द ने 70 साल की उम्र में मां को दी हिम्मत, वायरल हैं Weightlifter Mummy

Mother's Day 2026 Special: मदर्स डे के मौके पर जब हम मां की ममता, त्याग और शक्ति की बात करते हैं, तो रोशनी देवी सांगवान की कहानी इन सबका जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आती है। आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि 70 साल की उम्र में एक महिला बस पूजा-पाठ, परिवार और आराम तक सीमित रह जाती है। लेकिन रोशनी देवी ने इन सभी धारणाओं को तोड़ दिया। सफेद बाल भले ही उनकी उम्र बताते हों, लेकिन उनकी हिम्मत और ताकत किसी युवा से कम नहीं है। सूट पहनकर जब वह जिम में भारी वजन उठाती हैं, तो हर देखने वाला हैरान रह जाता है। उनकी यह कहानी सिर्फ फिटनेस की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है, जो हर मां के अंदर छिपा होता है। मदर्स डे पर उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अगर हौसला मजबूत हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है।

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संघर्ष से हुई शुरुआत

"उम्र हो गई है माता जी, अब आराम कीजिए... सीढ़ियां कम चढ़िए, थोड़ा टहल लीजिए और सत्संग कीजिए।" 68 साल की रोशनी देवी सांगवान के लिए डॉक्टर की ये बात किसी झटके से कम नहीं थी। वह कमर की चोट और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं। सितंबर 2022 में उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि घुटनों का दर्द सहन करना मुश्किल हो गया और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। जांच में गंभीर अर्थराइटिस और लोअर बैक इंजरी सामने आई। डॉक्टरों ने साफ कहा कि उम्र के साथ परेशानी बढ़ सकती है और भविष्य में चलना-फिरना भी मुश्किल हो सकता है।

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बेटे ने दिया हौसला

इतनी मुश्किलों के बावजूद रोशनी देवी ने हिम्मत नहीं हारी। शुरुआत में फिजियोथेरेपी से इलाज चला, लेकिन उनके बेटे ने उन्हें एक नई राह दिखाने का फैसला किया और जिम ले जाने की ठानी। जब बेटे ने पहली बार कहा कि "मां, आपको जिम जॉइन करना चाहिए," तो रोशनी देवी को लगा कि वह मजाक कर रहा है। सलवार-सूट पहनने वाली एक दादी आखिर जिम में क्या करेंगी? लेकिन बेटा गंभीर था। उसने मां को समझाया कि बीमारी के डर से जिंदगी रुक नहीं जाती। करीब तीन महीने तक बेटे ने उन्हें मनाया। आखिरकार जुलाई 2023 में रोशनी देवी ने पहली बार जिम में कदम रखा। वह पल उनके लिए बेहद डरावना था। उन्हें लग रहा था कि सब लोग उन्हें देख रहे हैं और सोच रहे हैं कि "ये आंटी यहां क्या कर रही हैं?" लेकिन बेटे का भरोसा उनके डर से बड़ा था। बेटे के साथ और अपने मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने वेट लिफ्टिंग शुरू की।

रोशनी देवी ने नहीं मानी हार

रोशनी देवी बताती हैं कि अर्थराइटिस की खबर सुनने के बाद उन्होंने जिंदगी से उम्मीद छोड़ दी थी। तभी उनके बेटे ने फैसला किया कि वह मां को अकेला महसूस नहीं होने देगा। उसने अपना बिजनेस छोड़ दिया और मां को खुद ट्रेन करने लगा। उसने 2019 में फिटनेस ट्रेनर का सर्टिफिकेशन भी किया था और अब उसका एक ही सपना था, अपनी मां को देश की सबसे फिट दादी बनाना। शुरुआत में लोगों ने खूब बातें बनाईं। इस उम्र में वजन उठाने को लेकर ताने भी मिले। लेकिन बेटे ने हमेशा मां से एक ही बात कही, "मां, लोगों की मत सुनो। जब आप मुश्किल में थीं, तब ये चार लोग कहीं नहीं थे।"

Roshni Devi Sangwan

आज 'Weightlifter Mummy' के नाम से हैं मशहूर

आज रोशनी देवी सांगवान उस मुकाम पर पहुंच चुकी हैं, जहां वह 100 किलो तक का वजन आसानी से उठा लेती हैं। कभी जिन लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था, आज वही उनकी मेहनत और जज़्बे की सराहना करते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें प्यार से "Weightlifter Mummy" कहते हैं। उन्होंने यह सोच बदल दी कि फिटनेस सिर्फ युवाओं के लिए होती है या जिम जाने के लिए खास कपड़े जरूरी होते हैं। उनकी यह यात्रा सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि हिम्मत और दृढ़ निश्चय से जिंदगी को किसी भी मोड़ पर बदला जा सकता है।

बेटे के साथ रिश्ता हुआ और मजबूत

रोशनी देवी कहती हैं कि इस सफर ने उनके और उनके बेटे के रिश्ते को भी बेहद मजबूत बना दिया। ऑनलाइन लोग जब कमेंट करते हैं कि आप हमें अपनी मां की याद दिलाती हैं, तो उनका बेटा उन्हें पढ़कर सुनाता है। भले ही रोशनी देवी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन अब उनके सपने बड़े हो चुके हैं।
अब जब वह खुद को आईने में देखती हैं, तो उन्हें एक कमजोर महिला नहीं, बल्कि एक मजबूत, आत्मविश्वासी और प्रेरित दादी दिखाई देती हैं।

रोशनी देवी का संदेश

रोशनी देवी का मानना है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, असली ताकत इंसान के हौसले और मेहनत में होती है। उनका कहना है कि अगर दिल से ठान लिया जाए, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है। उनकी कहानी हर उस महिला और मां के लिए प्रेरणा है, जो खुद को कहीं पीछे छोड़ देती हैं। रोशनी देवी यह सिखाती हैं कि बढ़ती उम्र कोई रुकावट नहीं, बल्कि खुद को और मजबूत बनाने का एक नया मौका होती है।

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