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International Dog Day 2023: हमारे आसपास डॉग लवर्स की कमी नहीं है। कुत्ते से प्यार करने वाले लोग शौकिया तौर पर अपने घरों में कुत्ते भी पालते हैं, वहीं कुछ लोग सड़कों पर पलने वाले कुत्तों को भी खाना खिलाते है। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो कुत्तों से खौफ खाते हैं। उन्हें कुत्तों का इस कदर खौफ होता है कि वो सड़क पर कुत्ता देखकर कांप जाते हैं।
यही नहीं वो अपने उन तमाम दोस्तों या रिश्तेदारों के घर जाने से बचते हैं, जिनके घर कुत्ता होता है। आइए जानते हैं क्या होता है साइनोफोबिया, कैसे मालूम चलेगा कि आपको ये बीमारी है और इसका इलाज क्या है?

साइनोफोबिया क्या है?
साइनोफोबिया एक ग्रीक शब्द साइनोस से बना है। साइनोस का मतलब है कुत्ता और फोबिया का मतलब है डर। इन दोनों शब्दों को मिला दें तो बनता है कुत्तों का डर। इससे पीड़ित लोग सड़क पर चलने में असहज महसूस करते हैं। बच्चों में डॉग फोबिया या साइनोफोबिया 5 से 6 साल की उम्र के बाद हो सकता है। वयस्कों में साइनोफोबिया अधेड़ उम्र तक रह सकता है। ऐसा माना जाता है कि पूरी दुनिया में 6 से 7 प्रतिशत लोग साइनोफोबिया का शिकार होते हैं।
साइनोफोबिया के लक्षण
- कुत्ते को देखकर घबराहट या चिंता होना।
- कुत्ते को देखकर चीखना, चिल्लाना या नियंत्रण खो बैठना।
- कुत्ता सामने देखकर रोना या डर जाना।
- कुत्ता सामने आता देखकर सांस लेने में तकलीफ होना, पसीना आना।
- कुत्ता सामने देखकर दिल की धड़कन तेज होना या जी मिचलाना।
साइनोफोबिया के कारण
- बचपन में कुत्ते का शिकार होना या कुत्ते के काटने का कोई अनुभव।
- साइनोफोबिया के ज्यादातर मामले बचपन में ही बनते हैं।
- कुत्ते से जुड़ा नकारात्मक अनुभव होना।
- साइनोफोबिया जेनेटिक हो सकता है।
- अगर माता-पिता को कुत्ते से डर लगता है, तो हो सकता है कि आपके साथ भी ऐसा हो।
इलाज
- साइनोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति को ये बात समझाएं कि कुत्ते उसे बेवजह नहीं काटेंगे।
- जानवरों से एक दूरी बनानी जरूरी है लेकिन उनसे बेवजह डरना सही नहीं है।
- इस डिसआर्डर से जूझ रहे व्यक्ति को सीबीटी यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद लेनी चाहिए।
- साइनोफोबिया का डर निकालने के लिए साइकोलॉजिस्ट कई ऐसे सेशन्स लेते हैं जिनमें व्यक्ति को यकीन दिलाया जाता है कि उसे डिसआर्डर है।
- जब व्यक्ति इस बात पर भरोसा कर लेता है, तो उसका डर कम करने के लिए डॉक्टर नकारात्मक विचारों को तर्कसंगत विचारों से बदलते हैं। इसे एक्सपोजर थेरेपी कहते हैं।
- बड़े उम्र के कुत्तों के साथ बॉन्डिंग करने की कोशिश न करें। छोटे पपीज़ के साथ समय बिताकर आप थोड़ा कम्फर्टेबल महसूस कर सकते हैं। पपीज़ के साथ रेगुलर समय बिताने से आपका डर धीरे धीरे समाप्त हो जायेगा।
-साइनोफोबिया जैसे कई फोबिया हैं जिसके कारण लोग परेशान होते हैं। डर को हराएं और डिसआर्डर के लक्षणों पर काबू पाएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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