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क्या कैंसर अनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी है? एक्सपर्ट से जानें कैंसर का रिस्क कम करने के टिप्स
World Cancer Day 2026: कैंसर आज दुनिया में मृत्यु का एक बड़ा कारण बन चुका है। कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। कैंसर तब होता है जब शरीर की सामान्य कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि शुरू हो जाती है। सामान्य स्थिति में, शरीर की कोशिकाएं नियंत्रित तरीके से बढ़ती और मरती हैं। लेकिन जब डीएनए में म्यूटेशन या बदलाव होते हैं और शरीर इन्हें ठीक नहीं कर पाता, तो कुछ कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर बनाती हैं और समय के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं (मेटास्टेसिस)। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है और कई बार शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। जिन लोगों के परिवार में कोई कैंसर रोगी है या पहले कभी था, उन्हें अक्सर यह डर रहता है कि क्या उन्हें भी यह बीमारी हो सकती है? आज इस लेख में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार - रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, डॉ. पूजा खुल्लर से जानते हैं कि क्या कैंसर अनुवांशिक बीमारी है?

जेनेटिक (अनुवांशिक) बीमारी नहीं है कैंसर
अक्सर लोग सोचते हैं कि कैंसर केवल आनुवंशिक यानी जेनेटिक बीमारी है, यानी माता-पिता से बच्चों में सीधे आ जाता है। सच यह है कि कैंसर और जेनेटिक्स का संबंध जरूर है, लेकिन हर कैंसर वंशानुगत नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार केवल 5-10% कैंसर मामलों में ही यह सीधे परिवार से जुड़ा होता है, और इनमें अक्सर हाई-पेनट्रेटिंग जेनेटिक म्यूटेशन शामिल होते हैं। बाकी 90-95% कैंसर जीवनशैली, पर्यावरण, उम्र बढ़ने और शरीर में होने वाले जेनेटिक बदलावों के कारण होते हैं। इसलिए यह कहना सही होगा कि कैंसर पूरी तरह से आनुवंशिक नहीं है, बल्कि यह कई कारणों का मिश्रित परिणाम है।
कैंसर कैसे होता है?
कैंसर विकसित होने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण तंबाकू और धूम्रपान है, जो फेफड़े, मुंह, गले और कई अन्य अंगों के कैंसर का मुख्य कारण बनता है। इसके अलावा गलत खान-पान, जैसे ज्यादा तला-भुना या प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट का अधिक सेवन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता भी कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। कुछ संक्रमण जैसे HPV वायरस और हेपेटाइटिस B/C भी संबंधित कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसलिए टीकाकरण और सुरक्षित व्यवहार बेहद जरूरी हैं। पर्यावरणीय प्रदूषण और केमिकल एक्सपोजर, तेज सूरज की किरणों से होने वाला UV एक्सपोजर और अत्यधिक शराब का सेवन भी कैंसर का कारण बन सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ डीएनए में प्राकृतिक बदलाव होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि का जोखिम बढ़ाते हैं।
कैंसर से बचाव कैसे करें?
अगर किसी परिवार में किसी करीबी को कम उम्र में कैंसर हुआ है, तो इस मामले में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। ऐसे परिवारों में जेनेटिक काउंसलिंग, जरूरत पड़ने पर जेनेटिक टेस्टिंग, और नियमित स्क्रीनिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय पर जांच से कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है और उपचार की सफलता बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए, स्तन, अंडाशय, कोलन या सर्वाइकल कैंसर की समय पर जांच जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
कैंसर से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों और WHO के अनुसार, लगभग 30-40% कैंसर रोकथाम योग्य हैं। इसके लिए कुछ सरल लेकिन असरदार कदम उठाए जा सकते हैं। सबसे पहले, तंबाकू और शराब से पूरी तरह दूरी बनाए रखना। दूसरा, संतुलित और पौष्टिक आहार, जिसमें ताजे फल, सब्जियाँ और फाइबर शामिल हों। तीसरा, नियमित व्यायाम और शारीरिक सक्रियता बनाए रखना। चौथा, वजन नियंत्रित रखना और मोटापे से बचना। पांचवा, आवश्यक टीकाकरण, जैसे HPV और हेपेटाइटिस B के टीके लगवाना। छठा, समय-समय पर स्क्रीनिंग और नियमित जांच कराना। इसके साथ ही किसी भी असामान्य लक्षण जैसे लंबे समय तक खांसी, वजन का अचानक कम होना, शरीर में गांठ या असामान्य ब्लीडिंग को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
कैंसर केवल एक जेनेटिक बीमारी नहीं है। यह जेनेटिक्स, जीवनशैली और पर्यावरण का संयुक्त प्रभाव है। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ आदतों के जरिए कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डरने की बजाय जागरूक होना ही सबसे बड़ा बचाव है। जागरूक जीवनशैली अपनाकर, खान-पान, व्यायाम, टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए हम कैंसर से लड़ने और सुरक्षित रहने में मदद कर सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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