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नस में ब्लॉकेज की वजह से इस शख्स को आए हफ्तेभर में 100 मिनी स्ट्रोक, जानें कैसे बचाई जान
man suffered 100 mini strokes : स्ट्रोक को ब्रेन का दौरा भी कहा जाता है और इसे आने से मौत भी हो सकती है। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के हिस्से में खून की सप्लाई जरूरत अनुसार नहीं हो पाती है या जब दिमाग में रक्त वाहिका फट जाती है या ब्लॉकेज हो जाता है, तो ब्रेन स्ट्रोक आना शुरु हो जाते हैं। हमले से पहले स्ट्रोक अक्सर साइलेंट रहते हैं।
हालांकि, कुछ ऐसे लक्षण हैं जो एक मिनी-स्ट्रोक का संकेत दे सकते हैं, जो आने वाले घंटों या दिनों में एक जानलेवा स्ट्रोक का कारण बन सकता है। ऐसे मामले में बहुत कम सुनने को मिलते हैं, मगर इलाज में देरी होने की वजह से यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है।
लेकिन हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां हापुड़ के एक शख्स को हफ्तेभर में 100 मिनी-स्ट्रोक आने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और मिनी स्ट्रोक के बारे में-

ये है मामला
TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक हापुड़ में एक 65 साल के एक बुजुर्ग को पिछले एक हफ्ते में 100 से ज्यादा बार मिनी-स्ट्रोक आने के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया तो फौरन डॉक्टरों ने इमरजेंसी सिचुएशन में इलाज शुरू किया। तब मालूम चला कि ब्रेन के दाहिनी इंटरनल कैरोटिड आर्टिलरी में ब्लॉकेज था। इसे खोलने के लिए इंट्राक्रैनियल स्टेंटिंग का इस्तेमाल किया गया। यह नस ब्रेन से गले की तरफ आती है। दरअसल स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। 1. इस्केमिक स्ट्रोक- यह मस्तिष्क में खून के प्रवाह में रुकावट के कारण होता है। 2. हैमरेज (रक्तस्रावी) स्ट्रोक- यह मस्तिष्क की धमनियों में रक्तस्राव के कारण होता है।
BLK मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि स्मोकिंग के कारण मरीज की रक्त वाहिकाएं (खून की नस) सिकुड़ गई थीं। खून की सप्लाई दाईं तरफ केवल 90% हो रही थी और बाईं तरफ पूरा ब्लॉक हो गया था। मरीज खुद को कमजोर महसूस कर रहे थे लेकिन कारण नहीं बता पा रहे थे। वह कई डॉक्टरों के पास गए लेकिन कोई भी परेशानी को समझ नहीं सका।
एक्सपर्ट ने बताया कि मरीज को पिछले छह महीनों से बोलने और समझने में कठिनाई हो रही थी। उनके दाहिने हाथ और पैर में कमजोरी महसूस हो रही थी। डॉक्टर ने बताया, 'शुरू में ये हर हफ्ते 1-2 बार होता था और पांच मिनट से भी कम समय तक रहता था, लेकिन धीरे-धीरे इन अटैक्स का टाइम और रोज की फ्रिक्वेंसी बढ़ गई। यह अब 10 से 15 मिनट तक चलती थी।'

इलाज है संभव
स्ट्रोक के रोगियों के लिए एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी होता है जिससे आघात के कारण को समय पर पहचाना जा सके और उसका इलाज हो सके। स्ट्रोक के कई कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कारण का पता लगाया जाए और इसका प्रभावी तरीके से इलाज किया जाए।
क्या होता है मिनी स्ट्रोक
ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग के साथ साथ-साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसे समस्याओं के चलते दिमाग तक ब्लड की सप्लाई करने वाली धमनियां सिकुड़ जाती हैं। जब दिमाग की नसों के पास रक्त एकत्रित होने लगता है और ब्लॉकेज की वजह से दिमाग के एक हिस्से तक ब्लड की सप्लाई नहीं होने की वजह से स्ट्रोक आने शुरु हो जाते हैं। लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव और दवाईयों से इस स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकता है। लेकिन कुछ मामलों में जब यह काफी सिकुड़ जाता है तो मामला गंभीर हो जाता है। ऐसे में स्टेंटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
कैसी है मरीज की हालत?
इलाज के दौरान पता चला कि रोगी के मस्तिष्क के बाईं ओर खून की सप्लाई करने वाली धमनियों में ब्लॉकेज था। साथ ही मस्तिष्क के दाईं ओर खून की सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाएं काफी सिकुड़ गई थीं। पता चला कि ब्रेन में खून और ऑक्सीजन की कमी बार-बार स्ट्रोक का कारण बन रही थी। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें ब्रेन में खून की पर्याप्त सप्लाई बहाल करने के लिए इंट्राक्रैनियल स्टेंटिंग की सलाह दी गई। इसक बाद मरीज की तबीयत सुधरने लगी।
स्ट्रोक से बचाव के लिए करें ये काम
एक स्वस्थ आहार खाने और नियमित रूप से व्यायाम करने से आपके स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर कम वसा वाले, उच्च फाइबर वाले आहार का सेवन करें।
भोजन में नमक का सेवन सीमित करें और ध्यान रखें कि आप एक दिन में छह ग्राम से अधिक न लें। अत्यधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है, जिससे आपके स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब से परहेज करें।
मिनी स्ट्रोक के लक्षण
- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो
- देखने और बोलने में दिक्कत
- भ्रम पैदा हो
- चेहरा बिगड़ना
- स्पष्ट रूप से सोचने या बोलने में असमर्थ होना।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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