DJ की तेज आवाज से शख्स को हुआ ब्रेन हेमरेज, फटी दिमाग की नस, कैसे तेज आवाज बन सकती है जानलेवा?

छत्तीसगढ़ से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई हैं। जहां डीजे के साउंड से एक 60 साल के व्यक्ति की नस फट गई और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया जिसके बाद उसे तुरंत अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। इलाज करने वाले डॉक्टरों ने संभावनाएं जताई है कि डीजे के साउंड से उसके सिर के पिछले हिस्से की नस फट गई और खून का थक्का जम गया।

वैसे यह पहली दफा नहीं है क‍ि इतने भारी शोर की वजह से ऐसा गंभीर मामला सामने आया हो। इससे पहले भी तेज आवाज की वजह से बहरेपन और डीजे के तेज बेस पर डांस करते हुए अचानक हार्ट अटैक के कई केस सामने आए हैं। आइए जानते हैं क‍ि कैसे कानफोडू तेज आवाज एकदम से आपकी जान के ल‍िए जानलेवा साबित हो सकता है।

brain hemorrhage

ज्यादा साउंड सेहत के लिए नुकसानदायक

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक ज्यादा शोर शराबे के बीच रहने से कानों को नुकसान पहुंचता है और इंसान के सुनने की क्षमता कम होने लगती है। कुछ समय पहले सिंगर अलका याग्निक ने बताया था क‍ि तेज आवाज की वजह से उन्‍हें न्‍यूरो डिसीज हो गई है ज‍िस वजह से उन्‍हें सुनाई देना बंद हो गया है। WHO के आंकड़े बताते हैं की पूरी दुनिया में 12 से 35 साल की उम्र के एक अरब से ज्यादा युवा एंटरटेनमेंट के लिए हाई लेवल साउंड के बीच रहते हैं जिसके बाद उन्हें सुनने में दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के एक तिहाई लोगों को सुनने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

80 डेसीबल तक सुनने की क्षमता रखता है इंसान

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक डीजे से 200 से 500 डेसिमल तक की ध्वनि उत्पन्न होती है जबकि इंसान सिर्फ 80 डेसीबल की ध्वनि ही बर्दाश्त कर सकता है। कान के लिए 70 डेसिबल या इससे कम की ध्वनि सुरक्षित मानी जाती है। वहीं जब दो लोग सामान्‍य बातचीत करते हैं तो उसकी ध्‍वनि 60 डेसिबल के आसपात होती है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के अनुसार 24 घंटे में शोर का स्तर 70 डेसिबल से नीचे रहना चाहिए ऐसे में डीजे का तेज साउंड न सिर्फ आपके दिमाग और कान बल्कि आपके दिल के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

हार्ट फेल और ब्रेन स्‍ट्रोक की वजह बन सकता है तेज आवाज?

डीजे या लाउडस्पीकर्स की तेज़ आवाज़ सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। कई शोध के अनुसार तेज आवाज आपके दिल की धड़कन को बिगाड़ सकती है। ऐसी स्थिति को मेडिकल साइंस की भाषा में एट्रियल फिब्रिलेशन कहते हैं, जो शरीर में खून के थक्के बनने, स्ट्रोक और हार्ट फेल हो जाने की समस्या का कारण बन सकता है।

बच्‍चों को तेज आवाज से रखें दूर

कान में पड़ने वाला ज्यादा शोर न सिर्फ कानों बल्कि दिमाग को भी प्रभावित करता है। तेज ध्वनि से बच्चों को दूर रखने की सलाह दी जाती है। आजकल बच्‍चे दिनभर ईयरफोन और ब्‍लूटूथ पर बहुत तेज आवाज में म्‍यूजिक सुनते हैं, जो उन्‍हें बहरेपन का शिकार बना सकता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Sunday, September 15, 2024, 14:50 [IST]
Desktop Bottom Promotion