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Menstrual Cycle Syncing: अधिकतर महिलाओं को नहीं पता मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग, जानें इसके बारें में
मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग, एक महिला के होने वाले मंथली पीरियड टाइम का एक अहम भाग है। ये हर महिला की लाइफ लिए एक जरूरी हिस्सा है। मेंसुरल साइकिल के दौरान महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, इन बदलावों के साथ ही वो अपनी लाइफ स्टाइल में भी बदलाव करती है। एक महिला अपने शरीर में होने वाले चेंजेस के आधार पर अपने खानपान, रूटीन लाइफ में बदलाव करती है। वहीं जब महिलाएं अपने मासिक धर्म को एक बार समझ लेती हैं तो अपने बॉडी को वो अच्छे से सहारा दे सकती हैं। आइये जानते हैं मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग के बारें में-

मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग क्या है? (What is Menstrual Cycle Syncing?)
महिलाओं की बॉडी में इन्फ्राडियन स्विंग में काम करते हैं। महिलाओं की मेंस्ट्रुअल साइकिल 28-30 दिन की होती है। इसके चार पार्ट होते हैं। और हर महिला इन 28 दिनों में इन भागों में होने वाले उतार-चढ़ाव से गुजरती है। ये समझना अहम है कि हार्मोनल बदलावों की वजह से महिलाएं अपने पीरियड के दौरान एक जैसा फील नहीं कर पाती हैं। वहीं व्यूलेशन के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का हाई लेवल होने के कारण महिलाएं खुद को एनर्जेटिक महसूस करने लग जाती है। वहीं ल्यूटियल में वो थकान से गुजरती हैं। इसका असर उनकी लाइफ स्टाइल पर भी पड़ता है। लाइफ स्टाइल में बदलाव करने की प्रक्रिया को मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग कहते हैं।

मेंस्ट्रुअल साइकिल सिंकिंग सिंक्रोनाइजेशन कैसे किया जाता है ? (Menstrual Cycle Syncing)
हर महिला को अपने मासिक धर्म चक्र के बारें में जानकारी होनी जरूरी है। जिससे वो अपनी बॉडी और मेंसुरल साइकिल के टाइम को अच्छे से जान पाएं, जिससे वो शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों को समझ कर अपनी लाइफ स्टाइल को उसके अनुसार बदल सकें। पीरियड डेट याद रखने से महिलाओं को अपने डेली रूटीन को मैनेज करने में हेल्प मिलती है।
मेंस्ट्रुअल साइकिल में चार स्टेप होते हैं:
-मेंस्ट्रुअल फेज
-फॉलिक्युलर फेज
-ओव्यूलेशन फेज
-ल्यूटियल फेज

मेंस्ट्रुअल फेज-
पीरियड होने के साथ शुरू हो जाता है। जिससे हर महिला वाकिफ होती है। इसे आसानी से कैसे मैनेज किया जाए, इसके बारें में भी महिलाओं को पता होता है। ये फेज तब शुरू होता है जब बॉडी में एस्ट्रोजन का लेवल बहुत कम होता है। इस दौरान थकान और और तबीयत का गिरना जैसा महसूस होता है। इस दौरान आराम करना बहुत जरूरी है।

फॉलिक्युलर फेज
दूसरा फेज है फॉलिक्युलर फेज वो टाइम है जब ओव्यूलेशन का समय हो जाता है। ये फेज हार्मोन के लेवल को स्पाइक करता है। जिसके कारण हाई एनर्जी महलाओं में महसूस होती है। ये फेज बाकी बची साइकिल के लिए एक अच्छा समय है।

ओव्यूलेशन फेज-
तीसरा फेज ओव्यूलेशन फेज ये वो वक्त होता है जब महिलाओं का शरीर ओव्यूलेशन करता है, इस दौरान महिलाएं सबसे ज्यादा फर्टाइल होती हैं। लेकिन प्रजनन क्षमता के साथ-साथ ओव्यूलेशन हाई प्रोडक्टिव होता है। ये फेज 12-14 दिनों का होता है।
ल्यूटियल फेज-
ये लो हार्मोन लेवल होता है, जिसके कारण महिलाओं में एनर्जी की कमी होती है। ये वो वक्त होता है जब पीएमएस के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस चरण के दौरान खुद के लिए थोड़ा ब्रेक देना सही होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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