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Menstrual Hygiene Day: मेंस्ट्रुएशन हाइजीन में केरल है नंबर वन राज्य, दो गांव बने सैनिटरी नैपकिन मुक्त
केरल राज्य आज के समय में भारत मेंस्ट्रुएशन हाइजीन मैनेजमेंट के रूप में जाना जाता है। जिसका मुख्य कारण है केरल सरकार द्वारा उठाए गए महिलाओं के मेंस्ट्रुएशन हाइजीन के लिए अहम कदम - जैसे उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों में महिला छात्रों को मासिक धर्म की छुट्टी देना, सैनिटरी नैपकिन की आसान पहुंच के लिए राज्य भर के सभी स्कूलों में सैनिटरी वेंडिंग मशीन लगाना, मेंस्ट्रुअल कप के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ रुपये निर्धारित करना, सैनिटरी नैपकिन के लिए पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और लागत प्रभावी विकल्प बनाने जैसे कदम उठाए गए है। आइए जानते हैं केरल ने मेंस्ट्रुएशन हाइजीन मैनेजमेंट को कैसे संभाला हुआ है, औऱ लोगों में किस तरह इसे लेकर जागरूकता बनी हुई है।

1. 'कप ऑफ लाइफ' अभियान के तहत मेंस्ट्रुअल कप बांटना
पहली बार, केरल के दो गांव - एर्नाकुलम में कुंबलंगी और अलप्पुझा जिले में मुहम्मा सैनिटरी नैपकिन से मुक्त हो गए हैं। दरअसल गैर-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन कचरे से छुटकारा पाने के लिए राज्य द्वारा पंचायत-स्तरीय स्थायी मेंस्ट्रुएशन अभियानों के तहत महिलाओं को मेंस्ट्रुअल कप और कपड़े के पैड बांटे गए थे। जिसके लिए इस साल के राज्य बजट आवंटन में, राज्य ने खासकर इस लक्ष्य के लिए 10 करोड़ रुपये अलग रखे हैं।
2022 में, राज्य ने अपने 'कप ऑफ लाइफ' अभियान के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी जगह बनाई। एक परियोजना जिसे केरल के एर्नाकुलम जिले में लागू किया गया था और 126 स्थानों पर 1 लाख से ज्यादा मेंस्ट्रुअल कप बांट कर इतिहास रचा गया।
2. केरल विश्वविद्यालय के सभी छात्राओं को पीरियड्स की छुट्टी
साल की शुरुआत में ही केरल सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली महिला छात्रों को मेंस्ट्रुएशन के दौरान छुट्टी देने का ऐलान किया। उच्च शिक्षा मंत्री, आर बिंदू ने उस समय के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि, "लड़कियों को उनके मासिक धर्म के कठिन दिनों में आराम करने दें।"
केरल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट करते हुए लिखा, "एक बार फिर, केरल देश के लिए एक मॉडल पेश करता है। हमारे उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी संस्थानों की छात्राओं को मासिक धर्म और मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाएगा।"
3. सभी स्कूलों में सेनेटरी वेंडिंग मशीन
मेट्रो सिटी में आपको आसानी से किसी मॉल, प्राइवेट कॉलेज, मेट्रो स्टेशन्स, जैसे स्थानों पर सेनेटरी वेंडिंग मशीन मिल जाएंगी। लेकिन केरल सरकार ने सैनिटरी नैपकिन की आसान पहुंच के लिए और राज्य में मेंस्ट्रुएशन हाइजीन जागरूकता बनाए रखने के लिए, राज्य के सभी स्कूलों में सैनिटरी वेंडिंग मशीन लगाने की घोषणा की।
सोशल मीडिया पर इस कदम की घोषणा करते हुए सीएम विजयन ने एक ट्वीट कर लिखा, राज्य सरकार ने लड़कियों के मौलिक अधिकार के रूप में मासिक धर्म स्वच्छता की पुष्टि करते हुए केरल के सभी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना का उद्देश्य वर्जनाओं को तोड़ना, स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और हमारी लड़कियों को आत्मविश्वास के साथ ऊंची उड़ान भरने के लिए सशक्त बनाना है।"
4. 'शी पैड' अभियान जिसने मुफ्त सैनिटरी पैड तक बनाई पहुंच
मेंस्ट्रुएशन हाइजीन को प्राथमिकता देने और लड़कियों को सशक्त बनाने का केरल सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। 2017 में, सरकार ने कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली लड़कियों के बीच मेंस्ट्रुएशन हाइजीन सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 'शी पैड' योजना शुरू की। सरकार ने स्थानीय स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से सभी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में मुफ्त सैनिटरी पैड देना शुरू किया।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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