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'इंस्टाग्राम' पर घटते फॉलोअर्स से परेशान थी इंफ्लुएंसर मिशा अग्रवाल, कैसे सोशल मीडिया बन रहा है मेंटल प्रेशर
24 साल की सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर मीशा अग्रवाल की अचानक मौत ने सभी को चौंका दिया था। 24 अप्रैल को उन्होंने आत्महत्या कर ली, और दो दिन बाद 26 अप्रैल को उनका जन्मदिन था। उनके असमय निधन से फैंस और परिवार सदमे में हैं। अब, मीशा के परिवार ने उनकी मौत की असली वजह शेयर की है।
मीशा के जीजा ने उनके ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट में बताया कि वह इंस्टाग्राम पर घटते फॉलोअर्स से बेहद परेशान थीं। वह डिप्रेशन में चली गई थीं और करियर को लेकर चिंतित रहने लगी थीं। उनका सपना था 1 मिलियन फॉलोअर्स पाना और डिजिटल दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करना।
परिवार द्वारा दी की गई जानकारी के मुताबिक, मीशा ने सोशल मीडिया के इर्द-गिर्द अपनी दुनिया बना ली थी। उनके फोन का वॉलपेपर भी फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स की संख्या दिखाता था। उनके जीजा ने भावुक होकर लिखा, "इंस्टाग्राम असली दुनिया नहीं है और फॉलोअर्स असली प्यार नहीं। प्लीज इसे समझिए।" सोशल मीडिया के दबाव में मीशा ने जन्मदिन से ठीक पहले अपनी जान दे दी। mental health awareness मंथ के मौके पर एक्सपर्ट से जानते हैं कि आखिर कैसे सोशल मीडिया युवाओं पर हावी हो रहा है और बन रहा है उनके मेंटल स्ट्रेंस की वजह

सोशल मीडिया पर वैलिडेशन की लत
इस विषय पर हमने बात की जयपुर के जाने-मानें मनोचिकित्सक कपिल शर्मा से। उनका कहना है कि युवा सोशल मीडिया पर अपनी तुलना दूसरों से करते रहते हैं, चाहे वह किसी की लाइफस्टाइल हो, सफलता हो, बॉडी टाइप हो या फॉलोअर्स की संख्या। यह तुलना धीरे-धीरे self doubt और हीन भावना में बदल जाती है, जिससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन तक हो सकता है।
इस मुद्दे पर बात करते हुए सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट कपिल शर्मा कहते हैं, "युवाओं में अब एक ट्रेंड बन गया है कि वे हर चीज़ को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और बदले में लाइक, कमेंट और शेयर की उम्मीद करते हैं। अगर उन्हें उतनी प्रतिक्रिया नहीं मिलती जितनी वे चाहते हैं, तो वे खुद को कमतर मानने लगते हैं।"
उनके अनुसार सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आपके आत्म-सम्मान को बनाता भी है और तोड़ता भी। खासकर जब फॉलोअर्स घटने लगें या किसी और की पोस्ट ज्यादा पॉपुलर हो जाए, तो यूज़र खुद को निराश, अकेला और असफल महसूस करने लगते हैं।
डिजिटल दुनिया से आती मानसिक थकान
आज के दौर में युवा न केवल सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, बल्कि वे वहां अपनी एक अलग पहचान भी बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे लगातार अपने लुक, कपड़े, बैकग्राउंड, और यहां तक कि बात करने के अंदाज़ पर भी काम करते हैं। यह 'परफेक्ट दिखने' का दबाव उन्हें थका देता है।
डॉ. कपिल आगे बताते हैं, "इंसान जितना असल ज़िंदगी में नहीं थकता, उतना वो डिजिटल परफेक्शन की दौड़ में थक जाता है। इस दौड़ में जब वह उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं पाता, तो यह उसकी मानसिक सेहत पर गहरा असर डालता है। कई बार ये तनाव चिंता, डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन तक पहुंच जाता है।"
फॉलोअर्स की गिनती से बनती-बिगड़ती मानसिक स्थिति
हाल ही में कई युवा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं। इनमें से कुछ ने सोशल मीडिया पर घटते फॉलोअर्स, व्यूज़ और करियर की चिंता को कारण बताया है। सोशल मीडिया एक आभासी दुनिया है, जहां दिखावा ज्यादा होता है और सच्चाई कम। लेकिन कई युवा इसे ही अपनी असली दुनिया मान बैठते हैं। जब यह दुनिया उन्हें वह पहचान या प्यार नहीं देती, जिसकी वे उम्मीद करते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनकी पूरी ज़िंदगी खत्म हो गई है।
क्या करें युवा?
- हर हफ्ते एक दिन सोशल मीडिया से दूरी बनाएं।
- ऑफलाइन बातचीत और मुलाकातें बढ़ाएं।
- फॉलोअर्स और लाइक्स से खुद को मत आंकिए।
- किसी प्रोफेशनल से बात करना कमजोरी नहीं, समझदारी है।
- दिनचर्या में एक्सरसाइज़, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करें।
डिस्क्लेमर : मदद बस एक कॉल दूर पहचान पूर्णतः गोपनीय , पेशेवर परामर्श सेवा iCALL मेंटल हेल्पलाइन नंबर: 9152987821
सोम - शनि: सुबह 10 बजे - शाम 8 बजे
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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