मुंबई में शख्स को हुआ लेड पॉइजनिंग, वजह बना 20 साल पुराना कुकर, जाने पूरा मामला

old pressure cooker danger : क्या आपके किचन में भी कोई ऐसा प्रेशर कुकर है जिसे आप सालों से इस्तेमाल कर रहे हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। हाल ही में हैदराबाद से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पुराने बर्तन, खासतौर पर प्रेशर कुकर, हमारे स्वास्थ्य के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं।

एक 50 वर्षीय व्यक्ति को पिछले कुछ समय से लगातार पेट दर्द, थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो रही थीं। शुरुआती जांच में कुछ खास नजर नहीं आया, लेकिन जब डॉक्टर्स ने गहराई से टेस्टिंग की तो पाया गया कि व्यक्ति के शरीर में सीसे (Lead) की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा थी।

old pressure cooker danger

कैसे हुआ खुलासा?

जब डॉक्टर्स ने मरीज की जीवनशैली और खानपान की आदतों की पड़ताल की, तब सामने आया कि मरीज की पत्नी करीब 20 साल पुराने एल्यूमीनियम प्रेशर कुकर में खाना बना रही थीं। यह कुकर अंदर से पूरी तरह घिस चुका था और उसमें अक्सर खट्टे पदार्थ जैसे टमाटर, इमली, दही आदि पकाए जाते थे। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बर्तनों की घिसी हुई सतह से निकेल, टिन और लेड जैसे हैवी मेटल्स धीरे-धीरे भोजन में मिलते रहते हैं। खासकर जब खाना हाई टेम्परेचर पर पकाया जाता है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज हो जाती है।

क्या है लेड प्वॉइजनिंग?

लेड प्वॉइजनिंग तब होती है जब शरीर में सीसे की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ने लगती है और एक समय पर वह जहरीली स्थिति में पहुंच जाती है। यह जहर खाने, पानी, सांस या त्वचा के संपर्क से शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह धीरे-धीरे दिमाग, नर्वस सिस्टम, किडनी और प्रजनन प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है।

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

लेड प्वॉइजनिंग के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य होते हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर रूप ले सकते हैं:

- लगातार थकान और कमजोरी-

- पेट में मरोड़ या दर्द

- भूख की कमी, अपच और उल्टी

- सिरदर्द और चक्कर आना

- हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नता

- याददाश्त कमजोर होना

- सेक्स ड्राइव में कमी या बांझपन

- बच्चों में पढ़ाई में परेशानी, चिड़चिड़ापन

- एनीमिया या खून की कमी

कैसे हुआ इलाज?

इस केस में मरीज को Chelation Therapy दी गई, जो शरीर से भारी धातुओं को बाहर निकालने का तरीका है। इसमें कुछ विशेष दवाओं के ज़रिए लेड को खून में बांधकर शरीर से बाहर निकाला जाता है। गंभीर मामलों में 'बॉवेल इरिगेशन' तकनीक का भी उपयोग किया जाता है, जिसमें आंतों की सफाई की जाती है।

कैसे बचें इस खतरे से?

- 10 साल से अधिक पुराने प्रेशर कुकर या एल्यूमीनियम बर्तनों का इस्तेमाल तुरंत बंद करें।

- अगर किसी बर्तन की कोटिंग उतरने लगी है, तो उसे फौरन बदलें।

- खट्टे या एसिडिक फूड्स को पुराने बर्तनों में न पकाएं।

- बच्चों को पुराने प्लास्टिक, धातु या पेंट किए हुए खिलौनों से दूर रखें। इनमें भी सीसे की संभावना हो सकती है।

- साल में एक बार हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं, खासकर अगर शरीर में थकावट, पेट दर्द या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिख रहे हों।

- बर्तन खरीदते समय BIS मार्क या फूड ग्रेड सर्ट‍िफ‍िकेशन जरुर देखें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Desktop Bottom Promotion