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Mumps In Kerala : 1 दिन में 50 केस, केरल में फैल रही मम्प्स की बीमारी, गुब्बारे जैसा सूज जाता है गाल
Mumps Outbreak in Kerala: केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में मम्प्स संक्रमण फैलने की वजह से प्रतिदिन 50 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। यह अत्यधिक संक्रामक बीमारी स्कूल के बच्चों के बीच तेजी से फैल रही है। तिरुवनंतपुरम जनरल अस्पताल के दो डॉक्टर भी मरीजों का इलाज करते समय इस वायरस की चपेट में आ गए हैं। जिस वजह से संक्रमित डॉक्टर्स भी 10 दिन की छुट्टी पर हैं ताकि वे स्वस्थ हो सकें। अधिकारियों ने सतर्कता बरतने और संक्रमण रोकने के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी है।
बुधवार को जिला चिकित्सा अधिकारी आर. रेनुका ने जिले भर में मम्प्स के मामलों में वृद्धि के चलते यह चेतावनी जारी की। मेडिकल अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, मल्लपुरम में भी मम्प्स बीमारी के कुछ मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मल्लपुरम में अकेले 2024 में मम्प्स के 13,643 से अधिक मामले सामने आए हैं। आइए जानते हैं मम्प्स क्या है और इसके लक्षणों के बारे में।

मम्प्स या गलसुआ क्या है?
मायो क्लिनिक के अनुसार, मम्प्स या गलसुआ एक वायरल संक्रमण है, जो गालों के पास स्थित सलाइवा बनाने वाली पैरोटिड ग्रंथियों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण छींकने, खांसने, किस करने या संक्रमित व्यक्ति का जूठा पानी पीने से फैलता है। मम्प्स आमतौर पर बच्चों में ज्यादा देखा जाता है, लेकिन किसी भी उम्र का व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
मम्प्स के लक्षण
मम्प्स के लक्षणों में गर्दन के पास सूजन और दर्द, चबाने में कठिनाई, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख न लगना शामिल हैं। वयस्कों में यह संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है, जिसमें अंडकोषों में दर्द और कोमलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है, ताकि सही समय पर उपचार किया जा सके।
कैसे फैलता है मम्प्स
- संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकली बूंदें हवा में फैलती हैं और अन्य लोगों तक पहुंचती हैं।
- संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन, पानी की बोतल या खाने के सामान शेयर करने से संक्रमण फैल सकता है।
- किस करने, गले मिलने या संक्रमित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक करीब रहने से वायरस फैल सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुई गई सतहों को छूने और फिर मुंह, नाक या आंखों को छूने से भी संक्रमण हो सकता है।
वैक्सीन ही है इसका बचाव
मम्प्स से बचाव के लिए स्वच्छता और सतर्कता बेहद जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति का जूठा खाना या पीना न करें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें और लोगों से दूरी बनाए रखें। मम्प्स से बचाव के लिए एमएमआर (मम्प्स-मीजल्स-रूबेला) वैक्सीन सबसे प्रभावी तरीका है। यह वैक्सीन 12-15 महीने की उम्र में लगवाई जा सकती है। चूंकि यह बीमारी बच्चों में अधिक होती है, बचपन में ही वैक्सीनेशन करवा लेना बेहतर है। सही समय पर टीकाकरण से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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