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क्या है बायलेटरल निमोनिया जिससे जूझ रहे हैं पोप फ्रांसिस? जानें कितनी खतरनाक है ये बीमारी, कैसे इससे बचें
Pope Francis Suffering From Double Pneumonia : अस्थमा अटैक के बाद कैथोलिक चर्च के 88 वर्षीय प्रमुख, पोप फ्रांसिस की हालत शनिवार को एक बार फिर गंभीर हो गई। पोप फ्रांसिस, को 14 फरवरी को कई दिनों तक सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें डबल निमोनिया डायग्नोज किया, जो एक गंभीर स्थिति है, जिसमें दोनों फेफड़े सूज जाते हैं और दागदार हो जाते हैं, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। 21 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में, उनके प्रमुख डॉक्टरों में से एक, डॉ. सर्जियो अल्फियरी, ने उनकी सेहत की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पोप की स्थिति गंभीर बनी हुई है, लेकिन वे तत्काल जानलेवा खतरे में नहीं हैं। डॉक्टर के अनुसार, "अगर सवाल यह है कि क्या वे खतरे से बाहर हैं, तो जवाब 'नहीं' है, लेकिन अगर पूछा जाए कि क्या वे इस समय जानलेवा खतरे में हैं, तो इसका जवाब भी 'नहीं' है।" आइए इसी बहाने जानते हैं बायलेटरल या डबल निमोनिया क्या होता है और सबसे अधिक ख़तरा किसे है और इसके लक्षण और बचाव

क्या होता है डबल निमोनिया?
निमोनिया एक संक्रामक रोग है, जो फेफड़ों के अंदर मौजूद एयर सैक्स (वायु थैले) में सूजन पैदा करता है। सूजन बढ़ने पर एयर सैक्स में लिक्विड भर जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। जब संक्रमण दोनों फेफड़ों में फैलता है, तो इसे बायलेट्रल निमोनिया यानी डबल निमोनिया कहा जाता है। 2021 में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में निमोनिया के 34.4 करोड़ मामले सामने आए और 21 लाख मौतें हुईं। WHO के मुताबिक, लोअर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन 2021 में वैश्विक मौतों का पांचवां प्रमुख कारण था, जो इस्केमिक हार्ट डिजीज, कोविड-19, स्ट्रोक और COPD के बाद आता है।
किन के लिए खतरनाक होता है डबल निमोनिया?
यह संक्रमण बुजुर्गों, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों और पहले से सांस की बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों के लिए अधिक खतरनाक होता है। सही समय पर इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
डबल निमोनिया के कारण
बैक्टीरिया - स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया सबसे आम बैक्टीरियल कारण है।
वायरस - इन्फ्लुएंजा, RSV और COVID-19 संक्रमण बढ़ा सकते हैं।
फंगस - कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को फंगल निमोनिया का अधिक खतरा रहता है।
लक्षण
- तेज खांसी और बलगम
- बुखार और ठंड लगना
- अत्यधिक पसीना आना
- सांस लेने में कठिनाई
- छाती में दर्द और भारीपन
- लगातार थकान और कमजोरी
बचाव के उपाय
वैक्सिनेशन - फ्लू और न्यूमोकोकल वैक्सीन संक्रमण से बचाव में मददगार होती हैं।
स्वच्छता - बार-बार हाथ धोना और मास्क पहनना।
स्वस्थ जीवनशैली - संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
संक्रमित लोगों से दूरी - बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
इलाज
एंटीबायोटिक्स - बैक्टीरियल निमोनिया के लिए।
एंटीवायरल दवाएं - वायरल निमोनिया के इलाज में मददगार।
सपोर्टिव केयर - ऑक्सीजन थेरेपी, दर्द निवारक दवाएं और भरपूर आराम।
गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती - हाई-रिस्क मरीजों को तुरंत मेडिकल अटेंशन की जरूरत होती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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