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शीतला अष्टमी पर घरों में क्यों लगाया जाता है नया मटका, इस परांपरा का है सेहत से कनेक्शन
Matke ke pani peene ke Fayde : होली के 7 दिन बाद शीतला सप्तमी और इसके अगले दिन शीतला अष्टमी यानी मनाया जाता है। इस दिन को बासोड़ा भी कहा जाता है। शीतला सप्तमी और अष्टमी को शीतला माता की पूजा की जाती है और माता को बासी खाने का भोग लगाने की परांपरा है। इसके अलावा इस दिन घरों में नया मटका लगाने की भी परांपरा हैं।
बासी खाने का भोग लगाने के साथ ही महिलाएं इस दिन मटके की पूजा करती हैं और इसके बाद इस मटके का पानी को खान पान में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यह न सिर्फ एक परांपरा हैं बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी जुड़ा हुआ है। अगर आपने शीतला माता की तस्वीर देखी है तो आप उनके हाथों में मटका भी जरुर देखेंगे।

आइए जानते हैं क्यों शीतला अष्टमी के मौके पर नया मटका खरीदा जाता है और मटके का पानी पीने के फायदे।
शीतला अष्टमी पर क्यों लगाते हैं नया मटका?
हिंदू मान्यता के मुताबिक शीतला माता को ठंडक प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। इस दिन सिर्फ बासी खाना खाया जाता है। बासी खाने में भी ऐसी चीजों का ज्यादा भोग लगता है जो हल्की सी गर्मी लगने पर खराब न हो। दरअसल होली के बाद मौसम में बदलाव आने लगता है।
हल्की ठंड खत्म होने के साथ ही गीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। मौसम चक्र में इस बदलाव की वजह से चेचक और स्किन से जुड़ी कई बीमारियां होने का डर भी रहता है। है। इस समय साफ-सफाई पर बहुत ज्यादा ध्यान देकर और ठंडा खाने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
इसके साथ ही नया घड़ा रखा जाता है ताकि घड़े का ठंडा पानी शरीर को शीतल रखने के साथ ही शरीर को रोगमुक्त रख सकें। नए मटके का पानी ज्यादा ठंडा होता है। वैसे भी मिट्टी के घड़े का पानी पीने के आयुर्वेद में भी कई फायदे गिनाएं गए हैं। आइए जानते हैं मटके का पानी पीने के गुणकारी फायदे।

गले के लिए फायदेमंद
गर्मी आते ही लोग प्यास बुझाने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी की तरफ दौड़ते हैं जो कि आपका गला खराब कर सकता है। लेकिन मटका का पानी पीने से गला नहीं खराब होता है। यह नेचुरली ठंडा होता है, मगर यह एक निश्चित स्तर तक ही ठंडा रहता है। जो गले की लेकिन परेशानी नहीं बनता है।
लू से बचाए
अधिक गर्मी की वजह से लोग लू की चपेट में आ जाते हैं। मिट्टी के घड़े का पानी पीने से शरीर में तरावट तो आती ही है और शरीर को नेचुरल रुप ठंडक भी पहुंचती है।
मिट्टी के प्राकृतिक पोषक तत्व भी शरीर को बीमारियों से बचाते हैं।
पीएच लेवल रहता है बैलेंस
पानी में कम पीएच लेवल आपके शरीर में कई बीमारियों का कारण बन सकता है। मटके के पानी का पीएच लेवल बैलेंस रहता है। क्योंकि मिट्टी में अल्काइन गुण प्राकृतिक रुप से मौजूद होते हैं। जो शरीर में ज्यादा एसिड नहीं बनने देते हैं। इसलिए गर्मियों में मटके पानी पीना सेहत के लिए अमृत समान है।
शरीर को रखें ठंडा
मटका पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। मिट्टी में ठंडक देने वाले गुण मौजूद होते हैं। यह शरीर को तो ठंडा रखते ही हैं साथ ही यह आपकी प्यास को भी बुझा देते हैं।
मेटाबॉलिज्म बूस्ट करें
मटके का पानी नेचुरल रुप से हेल्दी होता है जबकि प्लास्टिक बोतल में कई तरह के टॉक्सिक केमिकल होते हैं। यह प्लास्टिक की बोतलों की तुलना में किफायती तो होते ही हैं साथ ही ईको-फ्रेंडली भी होते हैं। मटके का पानी पाचन तंत्र के लिए अच्छा माना जाता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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