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बच्चा बार-बार करता है मरने या दूर जाने की बात? आत्महत्या करने का हो सकता है संकेत, न करें इग्नोर
टीनेजर्स में आत्महत्या एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जो न सिर्फ बच्चों के परिवार बल्कि समाज को भी बहुत प्रभावित कर रही है। चाहे एग्जाम में फेल होने का डर हो या फिर माता-पिता द्वारा किसी बात पर डांट पड़ने जैसी मामूली बातों पर किशोर आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं।
एग्जाम में फेल होना देश में होने वाली किशोरों के आत्महत्याओं के टॉप 10 कारणों में से एक है, जबकि पारिवारिक समस्या नबंर 3 में है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बच्चे अपना अपमान या अपनी मांग पूरी न होने पर ऐसे कदम उठा लेते हैं।

ऐसे ही कई जोखिम कारक हैं जो एक किशोर के आत्महत्या करने या आत्महत्या करने की कोशिश करने की संभावना को बढ़ा सकता है। इन जोखिम कारकों के बारे में जानना और टीनेजर्स में आत्महत्या को रोकने के लिए सही कदम उठाना बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ऐसे की कुछ कारकों के बारे में बताएंगे जो बच्चों में सुसाइड के कारण बनते हैं, साथ ही बच्चों को ऐसा कदम उठाने से कैसे रोका जा सकता है इसके बारे में भी चर्चा करेंगे।
टीनेजर्स के आत्महत्या करने के कारण -
1. मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति जैसे डिप्रेशन, टेंशन जैसे एंग्जान में फेल होने का डर या फिर माता-पिता के अलग होने या उनके बीच में लड़ाई-झगड़े होना।
2. किसी तरह का नशा करना, जिसके कारण वो अपनी मानसिक स्थिति पूरी तरह खो बैठे।
3. पहले भी आत्महत्या करने की कोशिश करने का इतिहास या परिवार में किसी अन्य सदस्य द्वारा आत्यहत्या करने का इतिहास।
4. लाइफ में कोई ऐसी घटना जिससे निकल पाने में कठिनाई का सामना कर रहे हो, जैसे किसी ने उनके साथ मिसबिहेव किया हो, धमकाया हो, या उन्होने अपने किसी करीबी को खोया हो।
5. स्कूल, कॉलेज में अन्य बच्चों द्वारा अलगाव महसूस करना, या समाज से किसी तरह का समर्थन न मिलना।
बच्चों को आत्महत्या करने से रोकने के उपाय
1. चेतावनी के संकेतों को पहचानें
किशोरों में आत्महत्या के चेतावनी संकेतों को पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है, जैसे कि मरने की इच्छा या निराशा महसूस करने की बात करना, बेशकीमती चीजों को किसी को भी दे देना, या सामाजिक गतिविधियों से पीछे हटना। अगर बच्चों में ऐसे बदलाव दिखें तो इसे अनदेखा न करें।
2. मदद लें
अगर आप या आपका कोई परिचित आत्महत्या के चेतावनी संकेत दे रहा है तो यह महत्वपूर्ण है कि आप किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से मदद लें।
3. पॉजिटीव वतावारण बनाएं
अपने बच्चे के आस-पास एक ऐसा वातावरण बनाएं जो काफी पॉजिटीव हो। उनसे खुलकर बात करने की कोशिश करें। घर और स्कूल में एक सहायक और देखभाल करने वाला वातावरण बनाएं।
4. लोगों को करें जागरुक
मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और आत्महत्या के चेतावनी संकेतों के बारे में माता-पिता, शिक्षकों और टीनेजर्स को शिक्षित करें। ताकि बच्चों में नजर आने वाले संकोतों को समझ कर लोग उन्हें कोई भी गलत कदम उठाने से रोक सकें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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