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Uttarakhand Tunnel Crash: मलबे में दबने से कम हो सकती हैं शरीर में ऑक्सीजन, कितना खतरनाक होता है हाइपोक्सिया
What is Hypoxia : जमीन धंसकने की वजह से उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में 9 दिन से 41 मजदूर फंसे हुए हैं। जिन्हें निकालने की कोशिश जारी है। हादसे की जगह पर एसडीआरएफ, आईटीबीपी और फायर टीमें मौजूद हैं। ताकि जरूरत के मुताबिक फटाफट इंतजाम हो सकें। हालांकि टनल के ऊपरी हिस्से से मलबा आ रहा है, जिसकी वजह से मजदूरों को निकालने में दिक्कत हो रही है।

अब भीतर फंसे लोग सिरदर्द और उल्टियों की शिकायत कर रहे हैं। ये तब होता है, जब शरीर में ऑक्सीजन या पोषण घटने लगे। उम्मीद जताई जा रही है कि सभी मजदूरों को जिंदा निकाल लिया जाए। इसी बीच हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि कोई भी ऑक्सीजन की कमी से क्या समस्या हो सकती हैं- शरीर में ऑक्सीजन की कमी से क्या गंभीर समस्याएं हो सकती हैं? अगर कोई इंसान भूकंप या फिर किसी जगह के धंसने के बाद मलबे में फंस जाता है तो कितने दिन तक जीवित रहने की उम्मीद की जाती है।
कितना ऑक्सीजन लेवल होना चाहिए
ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर 95% से 100% के बीच सामान्य माना जाता है। यदि ऑक्सीजन का स्तर इस सीमा से नीचे होता है, तो व्यक्ति को तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। अपर्याप्त ऑक्सीजन का स्तर - ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर 91% और 95% के बीच होना चिकित्सा समस्या का संकेत दे सकता है।
हाइपोक्सिया है बड़ा खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो फिलहाल तो सबसे बड़ी चिंता यह है कि सुरंग में ऑक्सीजन की कमी के कारण श्रमिक गंभीर श्वसन समस्याओं, सांस लेने की समस्याओं और हाइपोक्सिया से पीड़ित हो सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के अनुसार, हाइपोक्सिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें बदलती बाहरी स्थितियों के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।

शरीर में ऑक्सीजन की कमी के लक्षण
- शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने से अर्थ है कि शरीर को अपनी नियमित क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए जितनी मात्रा में ऑक्सीजन चाहिए, उतनी मात्रा में ऑक्सीजन ना मिल पाना।
-जब शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है तो सबसे पहले व्यक्ति को थकान महसूस होती है, सांस लेने में दिक्कत होने लगती या सांस फूलने लगता है। इसके बाद शरीर में रक्त के प्रवाह की गति धीमी हो जाती है। इससे थकान और घबराहट बढ़ जाती है।
ऑक्सीजन की कमी से हो सकती हैं ये बीमारियां
-यदि शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाए तो ब्रेन डैमेज और हार्ट अटैक तक की स्थिति बन जाती है। शुगर के रोगियों में यदि ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो उनकी शुगर अचानक बहुत अधिक बढ़ सकती है, जो कि एक जानलेवा स्थिति भी बन सकती है।
-ऑक्सीजन का स्तर अचानक से बहुत अधिक घट जाने पर शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है। इस स्थिति में थायरॉइड का स्तर या तो बहुत अधिक बढ़ सकता है या बहुत अधिक घट सकता है। इससे Hypothyroidism और Hyperthyroidism की समस्या हो सकती है।
मलबे कितने दिन तक रह सकता है इंसान जिंदा
जब कोई भी इंसान किसी आपदा का शिकार होता है और मलबे में दब जाता है तो कई चीजें इसमें मायने रखती हैं। यानी अगर मलबा भारी है और इंसान के ठीक ऊपर गिरा है तो अगले कुछ ही घंटे में उसकी मौत हो सकती है। भूकंप जैसी आपदा में अक्सर ऐसा होता है। वहीं अगर कोई मलबे में दबा नहीं है, बल्कि फंस गया है तो उसके कुछ दिनों तक जिंदा होने के आसार रहते हैं। मलबे में दबे किसी इंसान के जिंदा रहने की संभावना उस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे कितनी ऑक्सीजन मिल पा रही है, अगर वो चारों तरफ से मलबे से घिरा है तो वहां कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ती रहेगी और दम घुटने से उसकी मौत हो सकती है। पुराने उदाहरणों के आधार पर माना जा रहा है कि भूकंप के मलबे में दबकर भी सामान्य सेहत वाला इंसान 3 से 5 दिनों तक जिंदा रह सकता है। वहीं कई मामलों में दो से तीन हफ्ते में भी सर्वाइवल हो सकता है, जो कुछ खास हालातों पर निर्भर करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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