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हर साल कैंसर से होती हैं पांच लाख मौतें

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री सुदीप बंदोपाध्याय ने आज लोकसभा में बताया कि आईसीएमआर के तहत थ्री ईयर रिपोर्ट ऑफ पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्रीज 2006-08 ऑफ नेशनल कैंसर रजिस्टी प्रोग्राम के अनुसार, देश में हर साल कैंसर से मौत के पांच लाख मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि आसर्निक जैसे भारी पदार्थ से कैंसर का खतरा होता है।
हालांकि पेयजल में मौजूद आसर्निक जैसे भारी पदाथों और खेती में इस्तेमाल कीटनाशकों के कारण कैंसर के रोगियों की संख्या के संबंध में कोई आंकड़ा नहीं रखा जाता। बंदोपाध्याय ने पुलिन बिहारी बास्के, अब्दुल रहमान, समीर भुजबल, विनय कुमार पांडेय, मेनका गांधी, विजय बहादुर सिंह, अनुराग सिंह ठाकुर, हरसिमरत कौर बादल, हरीन पाठक, अजुर्न मेघवाल और वीरेंद्र कश्यप आदि के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने पिछले साल कैंसर, डायबिटीज, दय संबंधी रोगों की रोकथाम और नियंत्राण के लिए व्यापक राष्टीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीए) शुरू किया।
नये कार्यक्रम को 2010 और 12 के दौरान 21 राज्यों के 100 जिलों में लागू किया जाना है। इस कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल रोग की पहचान, बुनियादी सर्जरी, कीमोथैरेपी आदि की सुविधाएं प्रदान करेंगे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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