मोटापे से हो सकता है पागलपन!

By Super

Fat-Woman
सिडनी। अब तक मोटापे को दिल की बीमारियों और रक्तचाप की परेशानियों से जोड़कर देखा जाता था लेकिन जीवन के अंतिम दिनों में यह मानसिक विकृति की भी वजह बन सकता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों का वजन बहुत कम है, बहुत ज्यादा है या जो अपने जीवन में 40 से 60 साल की उम्र के दौरान मोटापे के शिकार होते हैं उनमें 60 पार की आयु में मानसिक विकृति 'डिमेंशिया' होने का खतरा बढ़ जाता है।

'डिमेंशिया' के लक्षणों में याददाश्ता कम होना, भूलने की आदत बन जाना, निर्णय न ले पाने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगती है।आस्ट्रेलियन नेशनल विश्वविद्यालय के सेंटर फॉफ मेंटल हेल्थ रिसर्च की कैरिन एन्स्टे ने यह अध्ययन किया था।विश्वविद्यालय द्वारा जारी वक्तव्य के मुताबिक इस अध्ययन में 25,000 लोगों में शरीर के भार और मानसिक विकृति में सम्बंध का अध्ययन किया गया था।

एन्स्टे कहती हैं कि उनके अध्ययन में मिले प्रमाण बताते हैं कि मोटापे से गम्भीर बीमारियां होने का खतरा रहता है और इससे मानसिक विकृति का खतरा बढ़ जाता है।उन्होंने कहा कि जीवन के मध्यकाल में अधिक वजन से अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। मोटापे के शिकार लोगों में यह खतरा और भी ज्यादा होता है।

उन्होंने कहा, "पहले माना जाता था कि शरीर के वसा में मौजूद हार्मोन मानसिक विकृतियों से बचाते हैं लेकिन मध्य आयु में बहुत अधिक वसा का जमा होना बेहद खतरनाक है।"

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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