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विटामिन-ई बनाए आपकी हेल्थ को सेहतमंद
शरीर को किसी न किसी रूप में विटामिन की आवश्यकता पड़ती है क्यूंकि विटामिन की कमी से शरीर में कई बीमारियां पनप सकती है। बॉड़ी को हेल्दी बनाएं रखने में विटामिन ई काफी गुणकारी होता है। इसके सेवन से शरीर में कई प्रकार की बीमारियां नहीं होती और स्किन में भी ग्लो बना रहता है।
विटामिन ई वनस्पति तेल, गेंहू, हरे साग, चना, जौ, खजूर, चावल के मांढ, क्रीम, बटर, स्प्राउट और फ्रूट में पाया जाता है। ऐसी ढ़ेर सारी बातें हम सभी विटामिन ई के बारे में जानते है और आगे भी जानना चाहेगें।

विटामिन ई के गुण
1. एंटीऑक्सीडेंट गुण- विटामिन ई युक्त फलों को खाने से या फिर बाजार में उपलब्ध कैप्सूल का सेवन करने से भी बॉडी में एंटीऑक्सीडेंट को बढ़ाया जा सकता है लेकिन ज्यादा से ज्यादा नेचुरल खाद्य पदार्थो का इस्तेमाल करने की सोचें।
2. लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण- विटामिन ई, शरीर में खून को बनाने वाली रेड ब्लड सेल्स यानि लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री विटामिन ई का सेवन नहीं करती है तो उसके बच्चे को एनीमिया यानि खून की कमी की शिकायत रहेगी।
3. स्किन बनती है चमकदार- त्वचा को सुडौल, कसावदार और दमकता बनाए रखने के लिए विटामिन - ई बेहद लाभकारी होता है। इसके सेवन से त्वचा पर आई झुर्रियां भी दूर हो जाती हैं।
4. थॉयराइड और पिट्यूटरी ग्लैण्ड की कार्यशैली में सहायक- अगर शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाएं तो शरीर में सबसे ज्यादा असर थॉयराइड ग्लैण्ड और पिट्यूटरी ग्लैण्ड की वर्किग एक्टीविटी पर पड़ता है। इसकी कमी से यह दोनों ही ग्लैण्ड धीरे धीरे काम करने लगती है जिससे शरीर में काफी थकान और भारीपन लगता है।
5. सेल मेमब्रेन का बनना- शरीर में सेल मेमब्रेन होती है यानि वह परत जो ब्लड़ सेल्स को बनाएं रखने के उनके ऊपर चढ़ी होती है। अगर शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाएगी तो यह परत धीरे - धीरे कमजोर पड़ेगी और बाद में ब्लड़ सेल्स के बनने में मदद नहीं करेगी जिससे शरीर में खून की कमी हो जाएगी।
6. मानसिक समस्याएं भगाए दूर- शरीर में विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव और समस्याएं कम होती है। डाक्टरों द्वारा रिसर्च के बाद यह आउटपुट निकला है कि विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्याएं भी हो सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।
विटामिन ई का सबसे अच्छा स्रोत हरे पत्तों वाली सब्जियां, जैसे पालक, सोया, मेथी, पत्ता गोभी, आदि। दूसरा अच्छा स्रोत ड्राईफ्रूट्स है। इनमें बादाम, काजू और अखरोट में विटामिन ई अच्छी मात्रा में पाया जाता है। तीसरा सबसे अच्छा स्रोत फल हैं, जिनके सीधे सेवन या उनके जूस पीने से विटामिन ई भरपूर मात्रा में शरीर में पहुंचता है। इनमें आम, खुबानी, कीवी फ्रूट, आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। चौथा स्रोत फूड ऑयल हैं, जिनमें सोयाबीन के तेल, सरसों के तेल और सूरजमुखी के तेल को प्राथमिकता दी जाती है।
विटामिन ई की कमी से मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, साथ ही तंत्रिकाएं काम करना कम करने लगती है, जिसकी वजह से हाथ-पैरों में हलकान सी होती है। शरीर का नियंत्रण खोने लगता है, मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं और नज़र कमजोर होने लगती है। इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण है, वो है रोग प्रतिरोधक क्षमता, जो विटामिन ई की कमी के कारण कम होने लगती है। विटामिन ई की कमी होने पर चलने में दिक्कत होने लगती है और शरीर में दर्द रहता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन ई के सप्लीमेंट लेने से इसकी कमी से निजात मिल सकती है।



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