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बॉडी को डिटॉक्स करने वाले 7 बेस्ट योगा
योगा करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इससे शरीर को नियंत्रित करने की शक्ति मिलती है। प्राचीनकाल से ही शरीर को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए योगा करने की पद्धति काफी प्रचलन में है। योगा करने से गंभीर से गंभीर बीमारी भी ठीक हो जाती है। कई लोगों को डायबटीज जैसी बीमारी में भी योगा करने से लाभ मिला है। कई प्रकार के योगा आसन होते है जैसे - आसनासन आदि, जो शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते है। योगा के द्वारा शरीर में जमा होने वाले उन सभी विषाक्त तत्वों को बाहर निकाल दिया जाता है जो खाना, पानी और हवा के द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते है। लाफ्टर योग करने के प्रभावशाली लाभ
योगा को नियमित रूप से करने पर शरीर हेल्दी हो जाता है। इससे शरीर को शुद्ध होने में समय लगता है लेकिन इसके कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होते है। ये आसन आसान होते है लेकिन इन्हे सही तरीके से करना आना चाहिये। इन्हे करने से तनाव में भी राहत मिलती है। शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए निम्म प्रकार के योगा किए जा सकते हैं :

1) मरिचियासन : इस आसन को करने से शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करने लगते है और पाचन क्रिया आदि दुरूस्त हो जाती है। इस आसन को करने से शरीर में अच्छी प्रकार रक्त संचार होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते है।
2) अधो मुख शवासना : अधो मुख शवासना को डाउनवर्ड डॉग पोज के नाम से भी जाना जाता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालने वाला प्रमुख योगा पोज है। इसे करने से पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है और मेटाबोल्जिम भी अच्छा रहता है। इस योगा को करने से शरीर में रक्त का संचार भी अच्छी तरह होता है।
3) विपारिता करनी : विपारिता करनी एक प्रकार का आसन होता है जिसमें पीठ के बल पर खड़ा होने की कोशिश की जाती है और पैरों को दीवार पर टिका कर बॉडी को बैलेंस करना होता है। इससे पेट पर जोर पड़ता है और पाचन क्रिया दुरूस्त हो जाती है। इसे करने से रक्त और लिम्फ का संचार भी अच्छी तरह होता है। इसे करने से शरीर में फ्रेश ब्लड़ सर्कुलेशन भी होता है।
4) परिवृीट्टा मरिचासाना : यह एक अन्य प्रकार का योगा होता है जिसको करने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते है। इसे करने के लिए अपने पैरों को सीधा करके दीवार के सहारे खड़ा होना पड़ता है। उसके बाद पैरों को घुटनों से मोड़ना पड़ता है और पैरों को आपस में मिलाकर जोड़ना पड़ता है और बैठ जाते है। दाएं हाथ को दीवार के सर्पोट में लगाते है और बांए हाथ से बॉडी को बैलेंस करते है।
5) सासांगासना : इस आसन को रैबिट पोज के नाम से भी जाना जाता है जो पीछे की ओर झुककर किया जाता है। इस योगा को करने से पीठ की हड्डी मजबूत होती है और इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग हो जाता है। इसे करने से एंड्रोक्राइन सिस्टम भी मजबूत हो जाता है। इसे ठीक उसी तरह करते है जैसे खरगोश कूदता और घूमता है। इसे करने से आसानी से शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकाला जा सकता है।
6) परिवृीट्टा पार्श्वकोनासाना : इस आसन को करने से शरीर में रक्त का संचार अच्छी तरह होता है और पाचन क्रिया भी अच्छी हो जाती है। इसे बेहद सावधानी से करना पड़ता है और इसे करते समय काफी अभ्यास की जरूरत पड़ती है। इस योगा में पैरों को आपस में जोड़कर फिर अलग करना होता है और शरीर को संतुलित करना होता है। इससे फेफड़ों को ताकत मिलती है और वह ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ तरीके से काम करते है और शरीर के विषाक्त पदार्थ निकल जाते है। इसे करने से सांस लेने की क्षमता में इज़ाफा होता है, पाचन क्रिया में लाभ मिलता है और मेटाबोल्जिम भी दुरूस्त हो जाता है।
7) सालाम्बा सर्वांगसाना : इस आसन में शरीर को कंधों के बल पर संतुलित करते है और पीछे की ओर झुकते है। हाथों को कमर पर रख लिया जाता है ताकि रीढ़ की हड्डी पर जोर न पड़ें। इसे करने से शरीर का वजन कंधों पर डाला जाता है ताकि बॉडी को डिटॉक्स किया जा सकें। इसे करने से नींद अच्छी आती है और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम भी दुरूस्त रहता है। इससे शरीर को आराम मिलता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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