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महिलाओं, पुरुषों के मस्तिष्क में कोई अंतर नहीं
(आईएएनएस)| महिलाएं अधिक बुद्धिमान होती हैं या पुरुष, लंबे समय से चली आ रही इस बहस पर अब विराम लग गया है। दरअसल, एक नए शोध से खुलासा हुआ है कि लड़कों का मस्तिष्क या लड़कियों का मस्तिष्क जैसी कोई चीज नहीं होती, बल्कि दोनों के मस्तिष्क एक समान होते हैं। हां, दोनों के सोचने-समझने की क्षमता अलग-अलग होती है।
लेकिन इसकी वजह किसी मस्तिष्क का कमतर या बेहतर होना नहीं, बल्कि समाज में लिंग के आधार पर उनके लिए तय भूमिकाएं हैं। यानी लड़के और लड़कियों के मस्तिष्क को अलग-अलग बताने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

ब्रिटेन के बर्मिघम स्थित एश्टन युनिवर्सिटी में प्रोफेसर और न्यूरोसाइंस की विशेषज्ञ गिना रिपॉन ने कहा, "पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएं बुध ग्रह से, इस सोच का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। हमारे मस्तिष्क उन भूमिकाओं के कारण अलग हैं, जिसे निभाने के लिए समाज हम पर दबाव बनाता है और जिसका निर्धारण लैंगिक आधार पर किया जाता है।"
रिपॉन के मुताबिक, इस तरह की रूढ़िवादी सोच कि महिलाएं मानचित्र नहीं पढ़ सकतीं और पुरुष विभिन्न तरह के काम नहीं कर सकते, इसका विज्ञान से कोई लेना-देना नहीं है। महिला और पुरुष सिर्फ इसलिए अलग होते हैं, क्योंकि जिस दुनिया में हम जीते हैं, वहां लिंग के आधार पर भूमिकाएं थोपी जाती हैं। मोटी महिला या पतली महिला? पुरुष किसे करते हैं पसंद?
समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार, रिपॉन ने कहा, "आप मस्तिष्क का चयन इस तरह नहीं कर सकते कि यह लड़कियों का मस्तिष्क है और यह लड़कों का। वे एक तरह के दिखते हैं।"
उन्होंने कहा, वास्तविकता यह है कि लड़के एवं लड़कियों को उनके लिंग के आधार पर बचपन से ही खिलौने भी अलग तरह के दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, लड़कियों को खेलने के लिए बार्बी डॉल दी जाती है तो लड़कों को सुपरहीरो। इस प्रकार, गुड़िया से खेलते-खेलते लड़की में स्वाभाविक रूप से नारीसुलभ सोच विकसित होती है।
रिपॉन के अनुसार, वास्तव में मस्तिष्क एक मांशपेशी है और यह आवश्यकता के अनुसार काम करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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