Latest Updates
-
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय
गुर्दा रोगियों के लिए उम्मीद की किरण
आईएएनएस| एक शोध गुर्दे के रोगियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। शोध में पता चला है कि गुर्दे के कार्य में सहयोग देने वाली कोशिकाओं को मजबूत बनाकर गुर्दे की खराबी के उपचार में मदद मिल सकती है। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी की पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में कहा गया है कि गुर्दे में रक्त शोधन करने वाली कोशिकाएं पोडोसाइट्स, गुर्दे के काम के लिए महत्वपूर्ण हैं और गुर्दे खराब तब हो सकते हैं, जब ये कोशिकाएं 20 से 30 प्रतिशत तक नष्ट हो जाती हैं।
गुर्दे की खराबी के संभावित उपचार के तौर पर वैज्ञानिकों ने गुर्दे की अन्य भित्तीय उपकला कोशिकाओं (पीईसी) से पोडोसाइट्स बनाने का प्रयास किया। चूहे पर किए गए प्रयोगों में शोधकर्ताओं ने पाया कि भित्तीय कोशिकाओं से पोडोसाइट्स का नवीनीकरण नहीं हो सकता।

यहां तक कि पोडोसाइट्स के नष्ट होने के बाद भित्तीय कोशिकाएं गुर्दे को क्षतिग्रस्त करके नकारात्मक भूमिका निभाती हैं। जर्मनी के आखन में स्थित आरडब्ल्यूटीएच यूनिवर्सिटी के मारकस मोइलर ने कहा, "इस शोध ने भित्तीय कोशिकाओं को नकारात्म काम करने से रोक कर गुर्दे को विफल होने से बचाने की नई रणनीति सुझाई है।"
शोधकर्ताओं ने हालांकि पोडोसाइट्स का अतिरिक्त लेकिन सीमित संचय पाया जो किसी भी इंसान में जन्म के समय से मौजूद होता है। अतिरिक्त संचित ये कोशिकाएं वयस्क होने पर परिपक्व और कार्य निष्पादक कोशिकाएं बन जाती हैं।
मोइलर ने कहा, "हमारे परिणाम संकेत देते हैं कि भित्तीय कोशिकाओं को गुर्दे को क्षतिग्रस्त करने से रोकने के लिए निष्पादन कोशिकाओं के सीमित पूल के संरक्षण और औषधीय रणनीति विकसित करने की दिशा में शोध के प्रयास किए जाने चाहिए।"
MORE: किडनी को हेल्दी बनाएंगे ये आहर
भारत में हर साल लगभग 5.4 लाख लोगों को गुर्दा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन केवल 6,000 लोग ही गुर्दा प्रत्यारोपण कराने में सक्षम हैं। अध्ययन में बताया गया कि दुनियाभर में लगभग 60 करोड़ लोगों को गुर्दे की दीर्घकालिक बीमारियां हैं और उनमें से 2 करोड़ लोगों के गुर्दे विफल हो चुके हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
