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    क्या है पैन्क्रियाटिक कैंसर, जिसकी वजह से जिंदगी की जंग हार गए मनोहर पर्रिकर

    By Seema Rawat
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    गोवा के मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अग्नाशय कैंसर या पैन्क्रियाटिक कैंसर की वजह से 63 की उम्र में मुत्‍यु हो गई। उनकी पत्‍नी का देहांत भी इसी कैंसर के चलते हुए था। पैन्क्रियाटिक कैंसर पेट के निचले हिस्से में स्थित पैंक्रियाज (अग्नाशय) के ऊतकों में होता है। इसमें पैंक्रियाज में कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं और गड़बड़ी पैदा करने लगती हैं जिसके परिणामस्वरुप कैंसर युक्त ट्यूमर हो जाता है।

    Early Symptoms Of Pancreatic Cancer

    पैन्क्रियाटिक कैंसर अग्नाशय के दो महत्वपूर्ण कार्यों को गड़बड़ कर देता है- एंजाइम का स्राव जो हमारे पाचन में मदद करता है और इंसुलिन जो हमारे शरीर में शुगर बनाने में मदद करता है। यह समस्या आमतौर पर 45 वर्ष से अधिक के उम्र के लोगों में ज्यादा होती है। लेकिन कभी-कभी यंग लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। महिलाओं के मुकाबले पैन्क्रियाटिक कैंसर पुरुषों को ज्यादा होता है।

    इस स्थिति में किसी प्रकार का जोखिम पैन्क्रियाटिक कैंसर को बढ़ा सकता है। ये लक्षण आमतौर पर ज्यादा विशेष नहीं होते हैं और इसलिए लोग इन लक्षणों को पहचानने में असफल होते हैं। इन लक्षणों की जानकारी से आप अपना जीवन बचा सकते हैं।

    1. पीठ के निचले हिस्से और पेट में दर्द:

    1. पीठ के निचले हिस्से और पेट में दर्द:

    यह पैन्क्रियाटिक कैंसर के शुरूआती लक्षणों में से एक हैं। सामान्य तौर पर आपको पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द महसूस होगा और धीरे-धीरे यह दर्द पीठ तक पहुंच जाता है।

    2. पीलिया:

    2. पीलिया:

    पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों में पीलिया होना सामान्य बात है। पीलिया के कारण व्यक्ति को पैर और हाथ, मुख्य रूप से तलवों और हथेलियों में खुजली होती है। इसमें पूरा शरीर हल्के पीले रंग का हो जाता है।

    3. अचानक वजन कम होना:

    3. अचानक वजन कम होना:

    यह पैन्क्रियाटिक कैंसर के मुख्य लक्षणों में से एक है। व्यक्ति का वजन तभी घटता है जब ट्यूमर शरीर के अन्य अंगों में फैलने लगता है और उनके कार्यों में गड़बड़ी पैदा करने लगता है। यह शरीर में पोषक तत्वों को सही तरीके से पचने नहीं देता है जिसकी वजह से ठीक से भूख नहीं लगती है।

    4. जी मिचलाना और उल्टी आना:

    4. जी मिचलाना और उल्टी आना:

    मिचली आना और उल्टी होना पैन्क्रियाटिक कैंसर के लक्षणों में से एक है। जब ट्यूमर बढ़ने लगता है तो यह पाचन तंत्र के कुछ हिस्सों को अवरुद्ध कर देता है और पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। इसकी वजह से मिचली आने लगती है और लोगों को उल्टियां भी होने लगती हैं ।

    5. पेशाब के रंग में परिवर्तन:

    5. पेशाब के रंग में परिवर्तन:

    पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों के पेशाब का रंग नारंगी, भूरा या एंबर शेड जैसा हो जाता है। शरीर में बढ़ रहा ट्यूमर पित्त (bile) को अवरुद्ध कर देता है और शरीर से निकलने नहीं देता है। इसकी वजह से शरीर में अधिक मात्रा में एकत्रित बिलीरूबिन पेशाब में आ जाता है इससे पेशाब गहरे रंग का दिखने लगता है।

    6. चिकना या हल्के रंग वाला मल:

    6. चिकना या हल्के रंग वाला मल:

    गौर से देखने पर आप पाएंगे कि आपका मल पीला और बदबूदार हो जाता है। यह शरीर में ट्यूमर के बढ़ने की वजह से होता है जो कि पैंक्रियाज को शरीर में पाचन एंजाइम पैदा करने से रोकता है। शौच के समय ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवाएं।

    7. पेट फूलना:

    7. पेट फूलना:

    ट्यूमर की वजह से पेट में सूजन, गैस, जलन आदि गैस्ट्रोइन्टेस्टाइल संबंधी लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं। जब पैंक्रियाज पेट पर दबाव डालने लगता है तो व्यक्ति में ये सभी लक्षण पैदा होने लगते हैं। यह पैन्क्रियाटिक कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक है।

    8. भूख की कमी:

    8. भूख की कमी:

    इससे पीड़ित लोगों की भूख और तेजी से कम होने लगती है। इसकी वजह से वे थोड़ा खाने के बाद भी पेट भरा महसूस करते हैं। जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है यह छोटी आंत पर उतनी ही तेजी से दबाव बनाने लगता है। इसलिए पाचन तंत्र अवरुद्ध हो जाता है और भूख कम लगने लगती है।

    पैन्क्रियाटिक कैंसर की वजह

    पैन्क्रियाटिक कैंसर की वजह

    जो पुरुषों धूम्रपान करते है। उन्हें इस कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। रेड मीट और चर्बी युक्‍त आहार का सेवन करने वालों को भी पैन्क्रियाटिक कैंसर होने की आशंका बनी रहती है। कई अध्‍ययनों से यह भी साफ हुआ है कि फलों और सब्जियों के सेवन से इसके होने की आशंका कम होती है। इसके अलावा ये कैंसर आनुवांशिक कारणों की वजह से भी हो सकता है।

    पैन्क्रियाटिक कैंसर से घरेलू इलाज

    पैन्क्रियाटिक कैंसर से घरेलू इलाज

    फलों के रस का सेवन : पैन्क्रियाटिक कैंसर से बचने के ल‍िए ताजे फलों का और ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में सब्जियों का सेवन करने से अग्‍नाशय कैंसर में फायदा मिलता है।

    ब्रोकली : पैन्क्रियाटिक कैंसर के उपचार के लिए ब्रोकली को अच्छा समझा जाता है। इसमें मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में मदद मिलती है। ब्रोकली एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और खून को साफ रखने में मदद रखते हैं।

    एलोवेरा : पैन्क्रियाटिक कैंसर में ऐलोवेरा का सेवन करना इसका सेवन करने से लाभ मिलता है।

    व्हीटग्रास : व्हीटग्रास कैंसर युक्‍त कोशाणुओं को कम करने में भी सहायक होती है। इसके साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है।

    इलाज कैसे होता है?

    इलाज कैसे होता है?

    सर्जरी : इस कैंसर का इलाज सर्जरी से भी मुमकिन है लेकिन कई दफा होता है कि इस कैंसर के लक्षण मालूम होने तक सक्सेस रेट 15 से 20 परसेंट ही रह जाता है और अगर कैंसर शरीर में कई जगह फ़ैल गया है तो सर्जरी के बाद भी इंसान ठीक नहीं हो पाता है।

    रेडियोथेरेपी : इस थेरेपी में कैंसर ग्रस्त एरिया को रेडियो किरणों द्वारा नष्ट करने की कोशिश होती है।

    कीमोथेरेपी : कीमोथेरेपी की दवाएं शरीर में फ़ैल रही कैंसर सेल्स को या तो ख़त्म करती हैं या उन्हें बढ़ने से रोकती हैं। अक्सर कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी के साथ मिलाकर की जाती है। ताकि ज़्यादा से ज़्यादा एक्यूरेसी से इलाज संभव हो सके। कीमोथेरेपी में दवाईयों के सेवन के अलावा कुछ दवाओं को नसों में इंजेक्ट किया जाता है।

    English summary

    Pancreatic Cancer: Causes, Symptoms and Treatment

    Symptoms of pancreatic cancer are lower back pain, abdominal pain, jaundice, etc. Read to know the top symptoms of pancreatic cancer.
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