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सुदर्शन क्रिया कैसे करें और जानिये इसके फायदे
सुदर्शन क्रिया एक ऐसी ही योग तकनीक है जो बहुत पहले से ही भारत में इस्तेमाल की जाती है। आइये इस क्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं।

हाल के कुछ आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में स्ट्रेस से पीड़ित मरीजों की संख्या दिन प्रति दिन बढती ही जा रही है और इसमें हर उम्र वर्ग के लोग शामिल हैं। अगर आप भी स्ट्रेस से परेशान हैं तो आप योगा की मदद से इससे छुटकारा पा सकते हैं।
हम आपको एक ऐसी ब्रीथिंग एक्सरसाइज बता रहे हैं जिसे करने से कुछ ही दिनों में आप स्ट्रेस, तनाव और अवसाद जैसी मानसिक रोगों से पूरी तरह मुक्त हो जायेंगे।
सुदर्शन क्रिया एक ऐसी ही योग तकनीक है जो बहुत पहले से ही भारत में इस्तेमाल की जाती है। आइये इस क्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं।
सुदर्शन क्रिया क्या है?
'सु’ का मतलब होता है 'सही’ और 'दर्शन’ का मतलब है 'विजन या दृष्टि’। इस तरह से इसका मतलब हुआ कि इस क्रिया को करने से आपको सही दृष्टि मिलती है। यह सांसों से जुड़ा एक योगासन है जिसमें कभी धीमे तो कभी तेज गति से सांसे अंदर बाहर करनी होती है। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से आप सांसो पर पूरी तरह नियंत्रण पा लेते हैं जिससे आपका इम्यून सिस्टम भी बेहतर होता है और आप कई तरह की मानसिक बीमारियों से दूर रहते हैं।
साल 2009 में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार सुदर्शन क्रिया एंग्जायटी और डिप्रेशन से आराम दिलाने में काफी असरदार है। इसे करने में किसी तरह का कोई रिस्क नहीं है और इससे दिमाग और शरीर का सही संतुलन बना रहता है। सुदर्शन क्रिया में कुल मिलकर 4 चरण होते हैं। आइये इस क्रिया को करने का पूरा तरीका जानते हैं। अगर आप पहली बार सुदर्शन क्रिया करने जा रहे हैं तो किसी योगा टीचर की देखरेख में ही करें।
- उज्जयी प्राणायाम
- भस्त्रिका प्राणायाम
- ओम का जाप
- क्रिया योग
प्राणायाम को शुरू करने से पहले वज्रासन की स्थिति में बैठ जायें।

1. उज्जयी प्राणायाम (Victorious Breath):
इस प्राणायाम में सांस अंदर और बाहर लेते समय आपका सारा ध्यान अपनी सांसो पर ही होना चाहिए। सांस को अंदर लेने में और बाहर छोड़ने का समय एकदम बराबर होना चाहिए। शुरुवात में आप बैठकर नाक से सांस अंदर लें और अपना सारा ध्यान उसी पर लगायें और फिर यही प्रक्रिया सांस बाहर छोड़ते समय भी अपनाएं। इसे करते समय एक मिनट में कम से कम 2-4 बार सांसे लें। इसे करते रहने से धीरे धीरे आपका अपनी सांसों पर कंट्रोल हो जायेगा और आपका दिमाग रिलैक्स फील करने लगेगा।

2. भस्त्रिका प्राणायाम (Bellows Breath):
इस प्राणायाम को करते समय काफी तेजी से सांसो को अंदर और बाहर छोड़ना पड़ता है। इसे करते समय एक मिनट में लगभग 30 बार सांसे अंदर बाहर करें। इसमें सारा ध्यान सांसो को छोड़ते समय लगाना होता है और इसीलिए सांसो को अंदर लेने में जितना टाइम लें उसे बाहर निकालने में इसका दोगुना समय लें। इसे नियमित करने से मन शांत होता है और नेगेटिव विचार दूर होते हैं।

3. ओम का जाप:
ओम का जाप करने से आपका अस्तित्व ब्रह्मांड से जुड़ जाता है और आपको अपने जीवन का उद्देश्य हासिल होता है। यह एक पवित्र मंत्र है और सदियों पहले भी भारतीय ऋषि मुनि नियमित इसका जाप करते थे। रोजाना सुबह काफी ऊँचे स्वर में इसका जाप करें। अगर संभव हो तो आप भोर में उठकर ओम का जाप करें वो ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे आपको सकारात्मक उर्जा मिलती है।

4. क्रिया (Purifying Breath) :
यह इस पूरी प्रक्रिया का आखिरी चरण है और इसमें सांसो की गति को बार बार बदलना होता है। पहले धीमी हटी से सांसे लेनी होती हैं फिर उनकी स्पीड थोड़ी बढ़ा दें और अंत में जाकर सांसो की गति काफी तेज कर दी जाती है। सांसों की यह सारी गतिविधि एक ख़ास लय में होनी चाहिए और एक चक्र पूरा होना चाहिए। इसे करते समय ध्यान रहें कि सांसो को अंदर लेने का समय बाहर छोड़ने वाले समय से दोगुना होना चाहिए। इस योगासन से आपका पूरा शरीर स्वच्छ होता है और आप पॉजिटिव एनर्जी से भर जाते हैं।

साइड इफ़ेक्ट:
कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने अपने शोध में यह बताया है कि इस प्राणायाम को करने से किसी भी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। बस इसे करते समय आप किसी योगा टीचर की देखरेख में ही इसकी शुरुवात करें। कभी भी खुद से ही इसे शुरू करने की कोशिश न करें।

6. सावधानियां:
इसे करने से पहले एक बार डॉक्टर से अपनी जांच करवा लें कि आप मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट है या नहीं फिर इसके बाद ही इसे करें। जो लोग पहले से ही किसी मानसिक रोग से पीड़ित हैं या प्रेगनेंट महिलायें इस क्रिया को ना करें।

सुदर्शन क्रिया करने के फायदे :
- इसे करने से पूरे शरीर का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
- इससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बॉडी का एनर्जी लेवल बढ़ जाता है।
- इससे शरीर का कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है और सारे अंग सुचारू रूप से काम करने लगते हैं।
- इसे नियमित करने से आपकी निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
- इससे आपका मन शांत रहता है जिससे आप भरपूर नींद का आनंद ले पाते हैं।
- स्ट्रेस और एंग्जायटी को दूर भगाने में यह प्राणायाम काफी असरदार है।
- यह आपके दिमाग को शांत रखता है जिससे आप उसका बेहतरीन उपयोग कर पाते हैं।
- इससे आपकी चेतना का विकास होता है और आप आस पास की चीजों को लेकर और ज्यादा जागरूक हो जाते हैं।
- इसे करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है।



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