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अस्थमा का चमत्कारिक इलाज है हैदराबाद की ये मछली
पेट में जाकर मछली अपने मुंह में लगी दवाई को छोड़ती है। इससे मकस को साफ करती हैं और सांस लेने को आसान बनाती है। मरीज को कम से कम आधे घंटे तक पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है।
आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में एक मछली मिलती है जिसका नाम 'प्रसादम' है। ऐसी मान्यता है कि इस मछली को खाने से अस्थमा की बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो जाती है।
इस मछली को बाधिनी गौड़ परिवार द्वारा वार्षिक कार्यक्रम मृगसिरा कार्ती में बांटा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में इस मछली से अस्थमा का इलाज होता है? चलिए जानते हैं सच क्या है।
इसे मरेल फिश भी कहा जाता है जिसे स्नैकहेड मछली के रूप में भी जाना जाता है। इसे साल 2016 में तेलंगाना की राज्य की मछली घोषित कर दिया गया था।

यह मछलियां ताजे पानी के पाली जाती हैं और तालाब, झील और नदियों में पाई जाती हैं। कई देशी संस्कृतियों में इसे एक स्वास्थ्य लाभकारी मछली माना जाता है।
गौड़ परिवार इस मछली में येल्लो हर्बल पेस्ट भरकर तैयार करता था। इस परिवार ने इस रेसिपी को हिंदू संत के माध्यम से आगे बढ़ाया। परिवार के अनुसार, मछली के मुंह में एक विशेष प्रकार का प्राकृतिक लेप लगाकर मरीज को वह मछली निगलनी पड़ती है।

पेट में जाकर मछली अपने मुंह में लगी दवाई को छोड़ती है। इससे मकस को साफ करती हैं और सांस लेने को आसान बनाती है। मरीज को कम से कम आधे घंटे तक पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा उन्हें डायट का भी ध्यान रखने को कहा जाता है।
मत्स्य पालन विभाग के मुताबिक, इस कार्यक्रम के लिए लगभग 60,000 मरेरल की मछली रखी गई थी। हालांकि इसके क्लिनिकल बेनेफिट्स के लिए कोई सबूत नहीं है, लेकिन लोग इसे लेने के लिए वहां पहुंचते हैं।
कई लोगों का दावा है कि उन्हें इससे फायदा हुआ है और उनकी बीमारी ठीक हो गई है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इस उपचार के समर्थन में नहीं हैं. उनका कहना है कि यह केवल एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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