अनुष्‍का शर्मा को हुई बल्‍जिंग डिस्‍क की शिकायत, इस बीमारी में शरीर के कई अंगों में होता है दर्द

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस अनुष्‍का शर्मा इन दिनों बल्जिंग डिस्क (Bulging Disc) नामक एक बीमारी से परेशान हैं। इस बीमारी की वजह से उन्‍हें भयानक कमर दर्द का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से उन्‍हें एक जगह पर लगातार बैठने में दिक्‍कत महसूस हो रही है।

यह बीमारी इतनी खतरनाक होती है अनुष्‍का को ये बीमारी इंटेन्सिव फिजियोथेरेपी सेशन के कारण हुई। अनुष्‍का का ट्रीटमेंट करने वाले डॉक्‍टर ने उन्‍हें 3-4 हफ्तों के लिए बेड रेस्‍ट करने की सलाह दी है। ये बीमारी के लक्षण उन लोगों में ज्‍यादा देखने को मिलते हैं। जब तक

जानें इस बीमारी के लक्षण, इलाज और बचने के उपायों के बारे में...

क्‍या होती है बल्‍जिंग डिस्‍क?

क्‍या होती है बल्‍जिंग डिस्‍क?

बल्‍जिंग डिस्‍क को हर्नियेटेड डिस्क के नाम से भी जाना जाता है, जो इन दिनों एक सामान्‍य बीमारी बन चुकी है। अगर आपको एक जगह लगातार बैठने की लत है तो आप भी इस बीमारी के चपेट में आ सकते हैं। ये रीढ़ की हड्डियों से शुरु होती है और धीरे-धीरे करके शरीर के बाकी अंगों तक पहुंच जाती है। इस वजह से पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। हर साल दुनियाभर में बल्जिंग डिस्क की बीमारी से लाखों लोग जूझते हैं। इस बीमारी से पीड़ित आयु वर्ग 30 से 50 वर्ष के बीच होती है। यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो मूत्राशय या आंत रोग हो सकता है।

बल्जिंग डिस्क के लक्षण:

बल्जिंग डिस्क के लक्षण:

हाथ पैर या गर्दन में दर्द

इस बीमारी की वजह से आपके पिछले भाग के निचले हिस्‍सें में काफी दर्द महसूस होता है। खासकर नितंबों और जांघों में सबसे ज्‍यादा दर्द महसूस होगा। पैर के कुछ पर भी आपको दर्द महसूस हो सकता है। यदि आपको बल्‍जिंग डिस्‍क की शिकायत गर्दन में है, तो इसका असर कंधे और हाथ तक भी देखने को मिलता है। बल्‍जिंग डिस्‍क का दर्द खांसने और छींकने पर भी बढ़ जाता है।

झनझनाहट महसूस होना

झनझनाहट महसूस होना

जिन लोगों में बल्जिंग डिस्क की समस्‍या होती है उन्‍हें अक्‍सर दर्द के साथ-साथ झुनझुनाहट का भी अनुभव होने लगता है। इसके अलावा कभी-कभी हाथ-पांव में भी सुन्‍नाहट सी लगने लगती है।

मांसपेशियों में दर्द

मांसपेशियों में दर्द

इस बीमारी में मांसपेशियां के दर्द के कारण कमजोर हो जाती हैं, जिसकी वजह से प्रभावित अंग को उठा पाना या झुका पाना बेहद मुश्‍किल होता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द की शिकायत बनी रहती है।

क्‍या करें?

क्‍या करें?

शरीर के ऊपरी या फिर निचले हिस्से में बल्जिंग डिस्क की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टरी जांच बहुत जरूरी है। डॉक्टरी की सलाह से बिना देर किए दवाएं शुरू कर देना चाहिए। कई बार बीमारी गंभीर रूप से बढ़ जाने पर इसकी सर्जरी भी करवानी पड़ती है। फिजियोथेरेपी से भी इसका इलाज करवाने की सलाह दी जाती है। इससे धीरे-धीरे मांसपेशियों में लचीलापन आने के साथ-साथ दर्द से भी बहुत आराम मिलता है। इस दौरान किसी भी तरह की एक्‍सरसाइज करने से बचना चाह‍िए। इस समय बहुत आराम की जरुरत होती है।

इन बातों का रखें ध्‍यान

इन बातों का रखें ध्‍यान

बल्जिंग डिस्‍क एक जगह पर ज्‍यादा देर बैठने या गलत एक्‍सरसाइज के वजह से होता है। इस समय एक्टिव रहने की बहुत जरूरत होती है। व्यायाम, वॉकिंग, योगा, स्विमिंग के अलावा हल्की एक्सरसाइज करने से फायदा मिलता है। रोजाना कम से कम 40-45 मिनट ये काम जरूर करें। लगातार एक ही जगह पर बैठने से बचें और सही तरीके से बैठें। इसके अलावा अपनी डिस्क पर कम दवाब डालें, इसके साथ ही शरीर का वजन ज्‍यादा बढ़ने न दें। पौष्टिक आहार पर ध्‍यान दें

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