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Nipah Virus: WHO ने किया सावधान, भूलकर भी न खाएं ये 3 फल

केरल में फैले निपाह वायरस से हालांकि देश के दूसरे राज्य खासकर उत्तर भारत अभी तक महफूज है। लेकिन कर्नाटक में निपाह वायरस के दो संदिग्ध कैस मिलने से स्वास्थय विभाग ने इस ओर बचाव के लिए सख्ती से कदम उठाना शुरु कर दिए है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि लोगों को बचाव के उपाय मालूम होना जरुरी है। निपाह वायरस लोगों में फलों के जरिए फैल सकता है इसलिए केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें। अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं। क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं। ऐसे में इन्हें खाना मौजूदा हालात में सही नहीं है।
WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है। यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है, चमगादड़ जिस फल को खाता है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है। ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है। ऐसे में केरल से आने वाले फलों को विशेषकर ध्यान से खाया जाएं। Nipah Virus: ब्रेन में पहुंचा तो कोमा में जा सकता है मरीज, 4 से 8 दिन में दिखते है लक्षण

हालांकि लोगों के लिए यह मालूम करना बहुत ही मुश्किल होगा कि कौनसे फल केरल से भारत के बाकी हिस्सों में बिक रहें है तो बेहतरी यही होगी कि या तो आप केले, आम और खजूर को खाने से बचे या इन्हें धोकर ही खाएं।
धोकर खाएं खजूर और आम
खजूर और आम को भी धोकर खाएं। रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। भारत में कई जगह बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं। निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा उत्पाद किए जाते है। Nipah Virus, इन चीजों का रखे ध्यान, छूने से भी फैलती है ये बीमारी
क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण
मनुष्यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है। कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है।
4 से 18 दिनों में दिखते हैं लक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वायरस से संक्रमित लोगों में इंफ्लूयेंजा की तरह लक्षण दिखते हैं। जिसमें तेज बुखार आना और शरीर में तेज दर्द होना प्रारंभिक लक्षण है। कुछ परिस्थितियां ऐसी भी आई हैं, जहां सही समय पर ईलाज नहीं मिलने पर मरीज कोमा में चला गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड 4 से 18 दिनों के बीच है। इस वायरस के ब्रेन में पुहंचने पर मरीज कोमा में जा सकता है। इसलिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
इन बातों का रखे खास ख्याल
- खाना खाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि आप जो खाना खा रहे हैं वह किसी चमगादड़ या उसके मल से दूषित नहीं हुआ हो।
- चमगादड़ के कुतरे हुए फल न खाएं। खजूर के पेड़ के पास खुले कंटेनर में बनी टोडी शराब पीने से बचें।
- बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करें। यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें। इस बीमारी से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए।
- पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
- आमतौर पर शौचालय में इस्तेमाल होने वाली चीजें, जैसे बाल्टी और मग को खास तौर पर साफ रखें। निपाह बुखार से मरने वाले किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर को ले जाते समय चेहरे को ढंकना महत्वपूर्ण है।
- मृत व्यक्ति को गले लगाने से बचें और उसके सम्पर्क में आने से बचें क्योंकि उसमें वायरस के अवशेष मौजूद होंगे। और उसके अंतिम संस्कार से पहले शरीर को स्नान करते समय सावधानी बरतें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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