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World Environment Day 2018: हवा, पानी के साथ आपकी बीयर को भी प्रदूषित कर रहा है प्लास्टिक
प्लास्टिक धीरे धीरे हर आम जिंदगी की हिस्सा बनता जा रहा है। चाहे आम दिन की शुरुआत ब्रश से करें या नहाने के लिए टैप वाटर। सब जगह धीरे धीरे प्लास्टिक हमारे जीवन में अपना दबदबा कायम करता जा रहा है। जो कि हमारे लिए घबराने की बात है। पर्यावरणविदों की मानें तो माइक्रो प्लास्टिक या प्लास्टिक के सूक्ष्म कण मिट्टी में, नलकों से, पानी की बोतल , बीयर की बोतल यहां तक की हवा में घुलकर सांसो के जरिए हमारे स्वास्थय के लिए हानिकारक होते जा रहे हैं।
2015 में हुए एक रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में 6.3 बिलियन टन के आसपास प्लास्टिक वेस्ट का उत्पादन हो चुका है और इससे भी खतरनाक बात ये है कि इस प्लास्टिक वेस्ट में से 90 प्रतिशत कचरे और कबाड़ को अगले 500 साल तक नष्ट नहीं किया जा सकता है।अगर समय रहते प्लास्टिक के प्रदूषण को नहीं रोका गया तो अगले 30 सालों में प्लास्टिक से फैलने वाला ये प्रदूषण दोगुना हो जाएगा और समुद्र में मछलियों से ज्यादा हमें प्लास्टिक तैरता हुआ नजर आएगां। जानिए, प्लास्टिक बोतल पर लिखे संकेत किस बात की तरफ इशारा करते है?
इस बार विश्व पर्यावरण दिवस यानी World Environment Day पर पूरी दुनिया ने प्लास्टिक के खतरों को समझते हुए प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। भारत भी प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ अपने प्रयास शुरु कर दिए है। बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया पर #BeatPlasticPollution के नाम से कैंपेन के जरिए फैंस को प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए कहा है।

इस मौके पर हम भी आपकों प्लास्टिक से फैल रहे प्रदूषण के बारे बता रहे है कि अगर समय रहते इस प्रदूषण को नहीं रोका गया तो आने वाला मंजर और भी भयावह हो सकता है। आइए जानते प्लास्टिक पॉल्यूशन से जुड़े कुछ फैक्ट और इसके दुष्परिणामों के बारे में।
क्यों है खतरनाक प्लास्टिक प्रदूषण?
जमीन या पानी में प्लास्टिक उत्पादों के ढेर को प्लास्टिक प्रदूषण कहा जाता है प्लास्टिक प्रदूषण का वन्यजीव, वन्यजीव आवास और मनुष्य पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक प्रदूषण भूमि, वायु, जलमार्ग और महासागरों को प्रभावित करता है। प्लास्टिक मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों से उत्सर्जित सिंथेटिक रेजिन से बना है। रेजिन में प्लास्टिक मोनोमर्स अमोनिया और बेंजीन का संयोजन करके बनाया जाता है। प्लास्टिक में क्लोरीन, फ्लोरीन, कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और सल्फर के अणु शामिल हैं। 40 माइक्रोन से कम तापमान पर प्लास्टिक बैग बायोडिग्रेडेबल नहीं हैं। वे हमेशा के लिए पर्यावरण में बने रहेंगे। लंबे समय तक अपर्याप्त नहीं होने के अलावा प्लास्टिक के कई दुष्प्रभाव भी होते हैं जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
प्लास्टिक के स्वास्थय पर साइड इफेक्ट?
खिलौनों के रूप में प्लास्टिक है जहर
रंग बिरंगे प्लास्टिक के खिलौनों में कैमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो उनके लिए हानिकारक होता है। इन खिलौनों में आर्सेनिक और सीसा मिला हुआ होता है। खेलते हुए बच्चें इन खिलौनों को छूने के बाद सीधा मुंह में हाथ डालते है जो जिससे ये केमिकल उनके शरीर में पहुंचते है। इस वजह से उनको कैंसर तक हो सकता है।
मिनरल वाटर भी नहीं सुरक्षित
अगर आप प्लास्टिक बोतल में बंद मिनरल पानी के आदी है, और सोचते है कि बोतल बंद ये पानी मिनरल युक्त और सुरक्षित है तो आप गलत हैं। हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार चाइना, ब्राजील, इंडोनेशियां, यूएस समेत 9 देशों में बेची जाने वाली 11 अलग अलग ब्रांड की करीब 259 पैकेज्ड बोतल की जांच की हैं। इस शोध में उन्होंने पाया है कि भारत समेत दुनियाभर में मिलने वाले मशहूर पैकेज्ड मिनरल पानी में 93% तक प्लास्टिक के छोटे छोटे कण शामिल थे।
प्लास्टिक से हो सकती है बीमारियां
पहले के जमाने में लोग स्टील या दूसरी धातु से बने बोतल या बर्तन में दूध या पानी पीना पसंद करते थे। लेकिन सस्ते और अट्रेक्टिव होने के कारण लोगों ने प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना शुरु कर दिया जो कि आपके सेहत के लिए खतरनाक है। अगर आप प्लास्टिक के बोतल से पानी पीते हैं, तो इसके कारण कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, गर्भवती मां और बच्चे को खतरे के अलावा कई दूसरी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।
बीयर में भी प्लास्टिक
एक रिसर्च के अनुसार बीयर बनाने में भी माइक्रो प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है। ये रिसर्च प्लास्टिक पॉल्यूशन पर रिसर्च करने वाली टीम ने किया है। उन्होंने बीयर के कुछ सैम्पल पर रिसर्च करके पाया कि प्रति लीटर बीयर की बोतल में 4.05 मानव निर्मित कण के साथ, ज्यादातर प्लास्टिक फाइबर मौजूद थे। यदि आप हर दिन एक बीयर पीते हैं तो सालाना 520 कणों को आप अपने शरीर में उतारते हैं।
प्लास्टिक की थैलियां भी है जहरीली
आपको शायद ना पता हो लेकिन प्लास्टिक की थैलियां जहरीले केमिकल्स से मिल कर बनाई जाती हैं। इन्हें बनाने में जिन कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है उनसे बीमारियों के साथ साथ कई डिसऑडर्स भी हो सकते हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण को ऐसे रोके
जब आप बाजार में खरीदारी करते हैं तो अपने साथ कपड़े से बना एक जूट या बैग का इस्तेमाल करें।
प्लास्टिक की बोतल की जगह स्टील की बोतल में पानी पीएं।
रि-साइकिल करके प्लास्टिक से बनाए जाने वाले प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करें।
प्लास्टिक के खिलौनें न खरीदें।
प्लास्टिक वेस्ट को कहीं भी ऐसे न फैंके, प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या की गंभीरता को समझते हुए इसे डस्टबिन में फैंके। पानी या भूमि पर प्लास्टिक न फैंके
कुछ फैक्ट
प्लास्टिक कचरे के कुप्रबंधन में चीन का नाम सबसे ऊपर है, जो कि 8.82 मिलियन मीट्रिक टन का उत्पादन करता है। प्लास्टिक की बर्बादी के प्रबंधन में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत पांचवें स्थान पर है।
पिछले एक दशक में प्लास्टिक की बिक्री में काफी तेजी हुई है। एक मिनट में एक मिलियन प्लास्टिक की बोतलें खरीदी और बेची जाती है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि हर एक मिनट में प्लास्टिक के कबाड़ से भरा ट्रक समुद्र में डाला जाता है। 2030 तक ये संख्या बढ़कर दो ट्रक तक पहुंच जाएंगी और 2050 तक चार ट्रक।
आप मानेंगे नहीं कि भारत में हर साल 30 टाइटैनिक जहाज के वजन के बराबर प्लास्टिक वेस्ट का उत्पादन होता है। जिसमें से यह वेस्ट उत्पादन करने में महाराष्ट्र पहले और गुजरात दूसरे नम्बर पर है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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