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कूल्हे में मवाद वाली गांठ की वजह होती है ये बीमारी, पुरुषों को अधिक होती है ये दिक्कत
पिलोनाइडल साइनस या गांठ एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें रीढ़ की हड्डी के अंतिम सिरे पर छोटा सा छेद हो जाता है और इसका आकार बढ़ता जाता है। बैक्टीरिया से संक्रमित होने पर सूजन व दर्द होता है। इसके बाद साइनस के भीतर ही मवाद से भरा फोड़ा बनने लगता है। जिससे कच्चे खून के साथ हल्का मवाद हर समय रिसता रहता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये समस्या वयस्क पुरुषों में अधिक देखी जाती हैं।
हर पांच में से चार पुरुष इस समस्या से परेशान होता हैं। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों में पाइलोनाइडल साइनस की समस्या सबसे ज्यादा सामने आई थी क्योंकि वे लंबे समय तक ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर जीप में सवारी करते थे। आइए जानते है इस बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में।

इसके लक्षण क्या होते हैं?
इस रोग को प्रभावित हिस्से की त्वचा पर छोटे से धंसाव के रूप में महसूस किया जा सकता है। जब साइनस संक्रमित हो जाता है तो इसमें सूजन आती है और दर्द, त्वचा में लालिमा, साइनस से मवाद या रक्त निकलने और बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं।

इसका कारण क्या है?
इसके कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। कई लोगों का मानना नहीं है कि ये समस्या बाल टूटने के कारण होता है। टूटा हुआ बाल त्वचा के अंदर चला जाता है। कुछ लोगों को जन्म से ही मामूली दोष होता है जिसके कारण उनके नितंबों की बीच की त्वचा कुछ हद तक धंस जाती है और इसके कारण टूटा हुआ बाल त्वचा के अंदर आसानी से चला जाता है। इससे रोग की शुरूआत होती है।
पाइलोनाइडल सिस्ट एक थैली की तरह संरचना होती है, जोकि कोक्सीक्स या टेलबोन (coccyx or the tailbone) के किनारे पर, कूल्हों को बांटने वाली लाइन पर हो जाती है। अल्सर पर आमतौर पर बाल होते हैं और ये मृत त्वचा कोशिकाओं का मलबा इकट्ठा होने से बनते हैं।

इन वजह से भी हो सकती है समस्या
मोटापा, शरीर पर औसत से अधिक बालों का होना, फैमिली हिस्ट्री आदि। इसके अलावा लंबे समय तक ड्राइविंग करने या बैठे की वजह से भी ये समस्या हो सकती हैं।

इसका इलाज कैसे होता है?
अगर पिलोनाइडल साइनस के भीतर संक्रमण हो तो साइनस को खोलने और मवाद, बैक्टीरिया व पदार्थों को निकालने के लिए ऑपरेशन करते हैं। सर्जन त्वचा के प्रभावित हिस्से को काट देते हैं और टांके की मदद से घाव को सिलते हैं। इस तकनीक से घाव को काफी जल्द ठीक किया जा सकता है। इसके अलावा यह बेहद जरूरी है कि ऑपरेशन के बाद घाव की जगह को साफ रखा जाए।



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