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100 डेसिबल की ध्वनि पर गाना सुनने से हो सकते है आप बहरे, डब्लूएचओ ने जारी की गाइडलाइन
आपको हेडफोन लगाकर तेज आवाज में गाने सुनने के शौकीन है?, आपका ये शौक आपको बहरा बना सकता है। हाल ही में यूनाइटेड नेशन की ओर से जारी एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि दुनियाभर में एक बिलियन से ज्यादा युवा अत्यधिक स्मार्टफोन और ऑडियो उपकरणों का इस्तेमाल करने की वजह से बहरेपन का शिकार हो सकते है। इस समस्या को गौर करते हुए ही यूएन ने नई गाइडलाइंस भी जारी की है।

12-35 वर्ष के युवाओं पर अधिक खतरा
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, लम्बे समय तक तेज आवाज में हेडफोन पर गाना सुनने की वजह से 12 से 35 साल के करीब एक बिलियन लोगों अपनी सुनने की क्षमता खो सकते है। डब्लूएच का मानना है कि 85 डेसिबल की ध्वनि पर लगातार 8 घंटे गाना सुनना और 100 डेसिबल की आवाज में 15 मिनट गाना सुनना कानों के लिए असुरक्षित है।

फोन में वॉल्यूम कंट्रोल यूज करें
आजकल तकरीबन हर स्मार्टफोन में एक साउंड कंट्रोलिंग सिस्टम होता है, जो आपको बताता है कि आपको कितनी साउंड मिल रही है और आप साउंड लिमिट से ऊपर जा रहे हैं या नहीं। ऐसे में अगर बहरेपन का शिकार होने से बचना है तो स्मार्टफोन में दी गई उस गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें। इसके अलावा आप बहरेपन का शिकार होने से बचने के लिए ऐसी डिवाइस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें ऑटोमैटिक वॉल्यूम कंट्रोल हो। कान में तेज आवाज होने पर आवाज अपने आप कम हो जाए।

ज्यादा देर न सुने
अगर आपको हेडफोन पर गाने सुनने की आदत है तो ज्यादा देर तक गाने न सुनें। थोड़ी देर के लिए माइंड रिफ्रेश करने के लिए तो ठीक है। लेकिन इसे अपनी आदतों में शुमार न करें।

90 डेसिबल सुनने से फट सकती है कान की नसें
बता दें कि आमतौर पर कान 65 डेसिबल की ध्वनि को ही सहन कर सकता है। लेकिन ईयरफोन पर अगर 90 डेसिबल की ध्वनि अगर 40 घंटे से ज्यादा सुनी जाए तो कान की नसें पूरी तरह डेड हो जाती है।

ये भी हो सकती है समस्याएं
डॉक्टरों के अनुसार इनके ज्यादा उपयोग लेने से कानों में अनेक प्रकार की समस्या हो सकती है जिनमें कान में छन-छन की आवाज आना,चक्कर आना, सनसनाहट, नींद न आना, सिर और कान में दर्द आदि मुख्य है।



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