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अरुण जेटली का निधन, सॉफ्ट टिश्यू कैंसर थे पीड़ित
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार सुबह दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 66 साल के थे। जेटली की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। अपनी खराब सेहत के चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति से खुद को दूर कर लिया था।

दरअसल, किडनी संबंधी बीमारी से ग्रसित अरुण जेटली का पिछले साल मई में किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। लेकिन किडनी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे हैं। उनके बायें पैर में सॉफ्ट टिशू कैंसर हो गया है जिसकी सर्जरी के लिए जेटली इसी साल जनवरी में अमेरिका भी गए थे। फिलहाल वह कीमो के दौर से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं। तो आखिर क्या है सॉफ्ट टिशू कैंसर हम आपको बताते हैं...

जानें क्या होता है सॉफ्ट टिशू ट्यूम
वैसे तो हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं लेकिन सभी कैंसरस नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई मामूली ट्यूमर भी होते हैं जिसका मतलब है कि इनमें कैंसर नहीं होता और वे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल नहीं सकते। लेकिन जब इस तरह की बीमारी के साथ सार्कोमा शब्द जुड़ जाता है तो इसका मतलब है कि उस ट्यूमर में कैंसर विकसित हो गया है और वह घातक है।

हाथ या पैर की हड्डी या मसल्स में शुरू होता है सार्कोमा
सार्कोमा एक तरह का कैंसर है जो हड्डी या मांसपेशियों के टिशू में शुरू होता है। बोन और सॉफ्ट टिशू सार्कोमा मुख्य तरह का सार्कोमा होता है। सॉफ्ट टिशू सार्कोमा, फैट, मसल्स, नर्व्स, फाइबर टिश्यू, रक्त धमनियां या फिर डीप स्किन टिशू में विकसित होता है। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं लेकिन मुख्य तौर पर सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत हाथ या पैर से होती है। 50 से भी ज्यादा अलग-अलग तरह का होता है सॉफ्ट टिशू सार्कोमा। इनमें से कुछ तो बेहद रेयर होते हैं।

सामान्य लक्षण
- शरीर के किसी भी हिस्से में कोई नई गांठ दिखे या फिर कोई गांठ जो बढ़ रही हो
- पेट में दर्द जो हर दिन धीरे-धीरे बढ़ रहा हो
- स्टूल या वॉमिटिंग में खून आना
वैसे तो यह लक्षण किसी और बीमारी के भी हो सकते हैं लेकिन इन्हें हल्के में न लें और डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं।



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