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कच्चा दूध पीने से हो सकती है ये बीमारी, जानें लक्षण और इलाज
कच्चे दूध के सेवन के फायदों के बारे में तो आपने बहुत पढ़ा और सुना होगा। लेकिन आपको यह शायद ही पता हो कि दूध मवेशी के थन से निकालते समय पूरी साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान ना रखा जाए तो ऐसे दूध का सेवन करने से ब्रूसेलोसिस नामक बीमारी हो सकती है। ये बीमारी जीनस ब्रूसेला के बैक्टीरिया समूह से फैलती है जो जानलेवा नहीं होती है। संक्रमित माता के ब्रेस्ट फीडिंग से शिशुओं में संक्रमण हो सकता है। बीमारी के लक्षण स्वाइन फ्लू के समान जैसे भूख नहीं लगना, ठंड लगकर बुखार आना, पीठ दर्द, सुस्ती और चक्कर आना, सिर-दर्द, पेट दर्द, जोड़ों में दर्द और वजन लगातार घटता रहता है।

कच्चे दूध से समस्या?
- हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिस भी जानवर का दूध जब निकाला जाता है, वह अगर पूरी तरह स्वस्थ है और दूध निकालते समय हाइजीन का पूरा ध्यान रखा जाए तो कोई दिक्कत नहीं।
- बिना हाइजीन के अभाव में दूध किटाणुओं से दूषित हो सकता है या जानवरों के मल के संपर्क में आ सकता है। ऐसा होने पर दूध उपयोग करनेवालो लोगों को कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
- संक्रमित कच्चा दूध पीने से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, लूज मोशन और उल्टियां होने की आशंका बढ़ जाती है। लक्षण ज्यादा बढ़ने में समस्याएं बढ़ सकती है।
- अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक संक्रमित दूध का सेवन कर ले तो उसे पैरालिसिस जैसी बीमारी का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि ऐसा बहुत ही कम होता है लेकिन इसकी आशंका रहती है।

बचाव के तरीके?
इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे अहम बात ये है कि हम दूध को पकाकर ही उपयोग में लाएं। दूध को पकाने से उसमें मौजूद ज्यादातर वायरस और किटाणु मर जाते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं पकाने से दूध की गुणवत्ता कम हो जाती है। अगर दूध पूरी शुद्धता के साथ निकाला जाए तो कच्चा दूध पकाए गए दूध से कहीं अधिक पौष्टिक होता है। दूध में बैक्टीरिया बढ़ने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि पकाने के बाद जब दूध ठंडा हो जाए तो आप इसे फ्रिज में स्टोर करें। पोषक तत्वों का ध्यान रखते हुए दूध को दो दिन में खत्म कर लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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