कोविड वैक्‍सीन: अगर वैक्सीन की दूसरी डोज लगाने में हो जाएं देर, तो क्या हो सकते हैं नुकसान?

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए दुनियाभर में वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञ टीकाकरण को ही कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। भारत में भी अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। इस बीच देश में टीकों की कमी के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिससे वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका है। जिन लोगों को वैक्सीन की एक डोज मिल चुकी है, वह दूसरी डोज के इंतजार में हैं। हाल ही में सरकार ने दोनों डोज के बीच के अंतराल को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है। टीकाकरण को लेकर तमाम खबरों के बीच लोगों के मन में सवाल है कि अगर दूसरी डोज के लिए भी देश में वैक्सीन की कमी रहती है और तय समय पर उन्हें खुराक नहीं मिल पाती है तो इसका शरीर पर क्या असर हो सकता है? दूसरी डोज को तय समय से और कितने दिनों तक आगे बढ़ाया जा सकता है?

दोनों डोज में 12-14 सप्ताह का अंतराल

दोनों डोज में 12-14 सप्ताह का अंतराल

दुनियाभर के तमाम स्वास्थ्य संगठन पहली और दूसरी डोज में अंतराल रखने की सलाह देते हैं। पहले यह अंतराल 4-6 हफ्ते था जिसे बाद में बढ़ाकर 6-8 हफ्ते और अब 12-14 हफ्ते का कर दिया गया है। वैक्सीन कीदोनों डोज में 12-14 हफ्ते हफ्ते का अंतराल रखने से इसकी प्रभाविकता 90 फीसदी से ऊपर की पाई गई है।

तय समय पर दूसरी खुराक न मिलने के प्रभाव

तय समय पर दूसरी खुराक न मिलने के प्रभाव

यदि किसी को किन्हीं कारणों से तय समय पर दूसरी खुराक नहीं मिल पाती है तो इससे घबराना नहीं चाहिए। आप कुछ दिनों बाद भी टीकाकरण करा सकते हैं। हां, यह ध्यान रखें कि दूसरी खुराक के तय समय से बहुत ज्यादा देर न हो। ऐसी स्थिति में पहली डोज के बाद बनी इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है और शरीर में एंटीबॉडीज को ज्यादा बूस्ट नहीं मिल पाएगा।

दूसरी खुराक के तय समय को कितना और बढ़ाया जा सकता है?

दूसरी खुराक के तय समय को कितना और बढ़ाया जा सकता है?

वैक्सीन की दोनों खुराक के बीच का अंतराल 16 हफ्तों से अधिक का नहीं होना चाहिए। दूसरी डोज को बूस्टर डोज माना जाता है, इसलिए इसे लगवाना बेहद जरूरी है। इससे शरीर में पहले से बनीं एंटीबॉडीज को ज्यादा शक्ति मिल पाती है। दूसरी डोज लग जाने के बाद व्यक्ति को वायरस के खिलाफ 90 फीसदी तक सुरक्षित माना जा सकता है।

क्या दोनों खुराक में अलग-अलग वैक्सीन ले सकते हैं?

क्या दोनों खुराक में अलग-अलग वैक्सीन ले सकते हैं?

भारत में बनी दोनों वैक्सीन- कोवैक्सीन और कोविशील्ड की कार्यप्रणाली अलग-अलग है, इसलिए दोनों डोज में अलग-अलग वैक्सीन लेने से इसकीप्रभाविकता कम हो सकती है। दोनों डोज में वैक्सीन अलग-अलग होने से आपको वैक्सीन का बूस्टर डोज नहीं मिल पाता है। कोविशील्ड वैक्सीन को वायरस के प्रोटीन स्पाइक के आधार पर तैयार किया गया है वहीं कोवैक्सीन की डोज में कोविड के निष्क्रिय वायरस को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। ऐसे में अगर दोनों डोज में अलग-अलग वैक्सीन दी जाएं तो शरीर को वैक्सीन का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

Story first published: Thursday, June 3, 2021, 9:07 [IST]
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