सावधान! कहीं आप तो रोजा खोलते समय नहीं खा रहे हैं नकली खजूर, जान‍िए कैसे करें असली की पहचान

रमजान के द‍िन चल रहें है, ऐसे में रोजा खोलते समय खजूर जरुर खाया जाता है। खजूर को रोजेदार सेहतमंद और काफी पोष्टिक मानते हैं। लेक‍िन क्‍या आप जानते हें क‍ि बाजार में बिकने वाला हर खजूर असली नहीं होता है। कई मुनाफाखोर मोटी कमाई के चक्‍कर में नकली खजूर को असली खजूर बताकर बाजार में बेचते है। ऐसे में असली और नकली खजूर में फर्क करना आम जनता के ल‍िए बेहद मुश्किल हो जाता है।

गुजरात और राजस्‍थान के रेगिस्‍तान से लाए गए सस्‍ते जंगली खजूर को गुड़ का पानी चढ़ाकर उसे 10 गुनी महंगी कीमत में बेचा जाता है। आइए जानते है क‍ि कैसे आप असली और नकली खजूर का पता लगाकर इस धोखे से बच सकते हैं।

ऐसे बनाया जाता है नकली खजूर

ऐसे बनाया जाता है नकली खजूर

नकली खजूर को असली जैसा रंग रुप देने के ल‍िए जंगली कच्‍चे खजूर को साफ कर उसे गुड़ के पानी में उबाल ल‍िया जाता है। इसके बाद उसे अच्‍छी तरह से सूखा द‍िया जाता है। जिससे गुड़ की चासनी खजूर के ऊपर लग जाती है। वहीं जंगली कच्‍चे खजूर पानी में उबालने पर काफी नरम हो जाते है और फिर असली खजूर जैसे द‍िखने लगते हैं। गुड़ के पानी में उबालकर इस 30 रुपए क‍िलो के खजूर को 300 से 600 रुपए क‍िलो तक मार्केट में बेचा जाता है।

ऐसे करें असली और नकली खजूर की पहचान

ऐसे करें असली और नकली खजूर की पहचान

असली और नकली खजूर में पहचान करना जरा मुश्किल है। नकली खजूर भी कच्‍चे खजूर में गुड़ की चाशनी चढ़ा कर बनाया जाता है। इसल‍िए इससे स्‍वाद से ही इसकी पहचान हो सकती है। असली खजूर का मीठापन न ज्‍यादा होता है न ही कम होता है। असली खजूर में मिठास थोड़ी मध्‍यम होती है। वहीं गुड़ की चाशनी से बना खजूर मुंह में डालते ही शक्‍कर सा मिठास का अहसास करवा देती है।

रंग से पहचानें

रंग से पहचानें

इसके अलावा एक और तरीका है जब भी पानी में असली खजूर डालेंगे तो वह न तो रंग बदलेगा और न ही अपनी आकृति जबकि नकली खजूर रंग छोड़ेगा, गुड़ की शक्‍कर और जंगली खजूर दोनों ही अलग हो जाएंगे।

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