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अनलॉक की ढिलाई ने बढ़ाया कोविड की तीसरी लहर का खतरा, जानिए क्या कहता है रिसर्च
देशभर में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी पड़ते ही लोगों ने कोरोना की गंभीरता को फिर से नजरअंदाज करना शुरु कर दिया है। ज्यादात्तर राज्यों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरु होते ही लोग छुट्टियां मनाने की प्लानिंग करने लगे हैं। एक्सपर्ट पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर दूसरी लहर के अनुभव से नहीं संभले और कोविड-19 की गाइडलाइंस में लापरवाही बरतने की वजह से तीसरी लहर की मार झेलनी पड़ सकती है।
हाल ही में सोशल मीडिया में शिमला और मनाली जैसे हिल स्टेशनों से पर्यटकों की भीड़ की तस्वीरें सामने आई है। जिसमें लोग बेखौफ होकर घूमते हुए नजर आ रहे है। केंद्र सरकार ने भी इन तस्वीरों को देखकर इसे गंभीरता से लेते हुए हिमाचल सरकार को इस संदर्भ में तलब किया है। लेकिन चिंता की बात ये है कि लोग इन नियमों और कोरोना गाइडलाइंस को हल्के में लेंगे तो कोरोना की तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है। आइए जानते है कि कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है और क्यों तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है।

आसानी से फैलता है कोरोना वायरस
तीसरी लहर से डरने की जरुरत इसलिए भी है कि ये वायरस अन्य वायरस की तुलना में अधिक और आसानी से फैलता है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लांसेट' में छपी एक स्टडी की मानें तो ज्यादातर ट्रांसमिशन हवा के रास्ते (aerosol) से हो रहा है। इसलिए लोग इससे ज्यादा देर तक बच नहीं पा रहे हैं। अगर तीसरी लहर को आने से रोकना है तो अनलॉक में बाहर निकलते हुए लोगों के सीधे संपर्क में आने से बचे और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना जरुरी है।

एम्स निदेशक दे चुके है चेतावनी
पिछले जून में ही कोरोना की तीसरी लहर के बारे में एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने पहले ही चेता दिया था कि यदि कोरोना गाइडलाइंस को गंभीरता से नहीं लिया गया और बाजारों या टूरिस्ट स्पॉट पर लगने वाली भीड़ पर नियंत्रण नहीं लाया गया, तो कोरोना की तीसरी लहर सिर्फ 6 से 8 हफ्तों के भीतर ही पूरे देश पर हमला कर सकती है। इसलिए अनलॉक की प्रक्रिया में हमें कोविड प्रोटोकॉल को अवॉइड करने से बचना चाहिए। इसलिए हमें लॉकडाउन की ढिलाई को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कई देशों में बढ़ा तीसरी लहर का अंदेशा
यूके में तीसरी लहर आने की संभावना बहुत तेज हो गई है। यूके में प्रतिदिन 25 हजार से ज्यादा कैसेज सामने आ रहे है। जुलाई के मध्य तक ये संख्यां बढ़कर 50 हजार तक बढ़ सकती है। इतनी बदत्तर हालात होने के बावजूद भी यूके सरकार 19 जुलाई से अंतिम कोविड प्रतिबंध हटाने जा रही है। ब्रिटेन में कोरोनावायरस संक्रमण की तीसरी लहर चल रही है। सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वालेंस के अनुसार, नए मामलों की संख्या लगभग हर नौ दिनों में दोगुनी हो रही है। यदि गति धीमी नहीं हुई, तो राष्ट्रीय महामारी जल्द ही सर्दियों में देश में आने वाली दूसरी लहर से भी बड़ी हो सकती है।

वायरस कब हो जाता है खतरनाक
हम सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस के ऊपर मौजूद स्पाइक के कारण ही यह बहुत तेज़ी से मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है। लेकिन इन स्पाइक में ऐसी क्या चीज होती है, और मानव कोशिकाओं में ही क्यों इंफेक्ट करती है, यह सोचने वाली बात है। कोरनेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार SARS-CoV-2 पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन जब मानव कोशिकाओं के संपर्क में आता है, तब दस गुना ज्यादा मजबूती से चिपक जाता है। यह फ्यूरिन नाम के एंजाइम के कारण होता है। और यही फ्यूरिन एंजाइम हमारे कुछ अंगों की कोशिकाओं पर पाया जाता है। यही कारण है कि जब हम कोरोना वायरस के संपर्क में आते हैं तो हमारी कोशिकाओं और वायरस के बची मजबूत बॉन्ड बन जाता है। और ऐसा होते ही वायरस खतरनाक रूप ले लेता है और एक साथ कई अंगों जैसे फेफड़े, हृदय, किडनी, आदि पर हमला कर देता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर वायर इन अंगों को डैमेज करना शुरू कर देता है।



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