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मेंटली स्ट्रांग बनने के लिए ड़ालें रीडिंग की आदत, लाइफ भी होगी स्ट्रेस फ्री
रीडिंग यानि पढ़ना इंसान की वो अच्छी आदतों में से एक है, जो हमारे व्यक्तित्व को विशिष्ट बनाती है। ये हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, जो हमारे फिजिकल और मेंटल डवलपमेंट के लिए जरूरी है। शायद यही कारण है कि बचपन से ही बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्यूंकि किताबें आपकी हेल्थ और वेलनेस के लिए फायदेमंद होती हैं। लेकिन क्या किसी ने आपको बताया है कि रीडिंग करने से आपके दिमाग पर क्या असर होता है?तो चलिए जानते है रीडिंग की हैबिट आपकी मेंटल हेल्थ को किस तरह बढ़ावा दे सकती है।

1. फील गुड फैक्टर
जब आप अच्छी किताब पढ़ना शुरू करते हैं तो इसे बीच में छोड़ देना अक्सर मुश्किल होता है, क्यूंकि किताब में जो कहानी बताई जाती है वो आपको अट्रेक्ट करती है और जैसे-जैसे आप इसमें लीन होते जाते हैं समय कहां बीत जाता है पता ही नहीं चलता। बल्कि जब कहानी समाप्ति की ओर बढ़ने लगती है तो आप दुखी महसूस करते हैं। दरअसल रीडिंग से फील गुड फैक्टर को बढ़ावा मिलता है। क्यूंकि जब आप कुछ पढ़ रहे होते है तो उस समय आप एक ही अलग ही दुनिया में होते है। जिसमें आपको किसी तरह का तनाव नहीं रहता, बल्कि एक अलग तरह की खुशी का अनुभव होता है।

2. स्ट्रेस रहता है कंट्रोल में
एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि प्रतिदिन 6 मिनट तक पढ़ने से आपकी हार्ट बीट और मांसपेशियों के तनाव को कम करके और आपके मन की स्थिति को बदलकर स्ट्रेस लेवल को 60% तक कम किया जा सकता है। बल्कि एक स्टडी यह भी बताती है कि रीडिंग की प्रेक्टिस म्यूजिक की तुलना में स्ट्रेस कम करने, एक कप चाय पीने, टहलने और वीडियो गेम खेलने से बेहतर है। इस तरह हम कह सकते है कि अगर आप रीडिंग की आदत ड़ाल लेते है तो इससे आपका स्ट्रेस लेवल काफी हद तक कंट्रोल में रहेगा।

3. सोच को आशावादी बनाता है
जब आप पढ़ते हैं तो वो सारी बातें भूल जाती है जो आपके पास घटित हो रही है, या जो घटित हो चुकी है। देखा जाए तो ये कल्पनाओें का एक ऐसा सागर है जो हमें ऐसी अदभुत दुनिया की सैर कराता है जहां हम स्ट्रेस फ्री जिंदगी पाते है। एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि पलायनवाद केवल हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए पढ़ने की तुलना में अधिक मुश्किल है, लेकिन इसने लोगों के साथ डील करने का उनसे बातचीत करने की प्रकिया को बदल दिया है। रीडिंग की हैबिट डवलप होने के बाद हमारा नजरिया सकारात्मक हो जाता है, ऐसे में हम हर परिस्थिति में आशावादी सोच रखते है।

4. दूसरों के प्रति सहानुभूति बढ़ती है
जो लोग कथा साहित्य पढ़ते हैं, उनके सहानुभूति का स्तर उन्नत होता जाता है। इससे किसी और के विश्वास, भावनाओं और विचारों को समझने की क्षमता में सुधार आता हैं। यही कारण है कि इसे थ्योरी ऑफ माइंड जाना जाता है।

5. ब्रेन और मेमोरी को बनाता है शार्प
एक रिसर्च में ये बात सामने आई कि जब लोगों ने अपने जीवन में कुछ समय निकलने में बाद में पढ़ने, लिखने और अन्य गतिविधियों में भाग लिया तो मानसिक गिरावट की दर में 32% की कमी आई। जबकि कम उत्तेजक गतिविधि वाले लोगों ने पाया कि औसत गतिविधि वाले लोगों की तुलना में उनकी गिरावट 48% तेज थी। यानि इससे ये बात साफ जाहिर होती है कि रीडिंग की हैबिट आपके ब्रेन को बेहतर ढंग से काम करने में मदद करती है। और इससे बढ़ती उम्र में मेमोरी लॉस की प्रॉब्लम भी नहीं होती।

6. ग्रुप रीडिंग मेंटल हेल्थ बनाता है बेहतर
जो आपने पढ़ा है उसके बारे में बात करना मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है। बिब्लियोथेरेपी नाम की कोई चीज होती है और डिप्रेशन से पीड़ित लोगों पर इसका गहरा असर होता है। लेकिन जब हम रीडिंग करके इस बारे में ग्रुप डिस्कशन करते है तो इससे बेहतर एकाग्रता, बेहतर भावनात्मक समझ, आत्म-जागरूकता में वृद्धि, और अपने अस्तित्व से संबंधित सार्थक मुद्दों पर चर्चा करने की क्षमता बढ़ती है।



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