Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
Marburg Virus: 8 से 9 दिन में मर जाता है संक्रमित व्यक्ति, जानें इस खतरनाक वायरस के बारे में सबकुछ
पहला मामला दक्षिणी गुएकेडौ प्रान्त में मिला है, और अफ्रीका के डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक डॉ मात्शिदिसो मोएती ने कहा, "मारबर्ग वायरस के दूर-दूर तक फैलने की संभावना का मतलब है कि हमें इसे ट्रैक करके रोकने की आवश्यकता है।" अभी दो महीने पहले ही डब्लूएचओ ने गिनी में फैले इबोला के दूसरे प्रकोप को समाप्त करने की घोषणा की थी। जिसके बाद इस खतरनाक वायरस का मामला सामने आया। जिसमें 12 लोगों की जान चली गई। आइए जानते है इस खतरनाक वायरस के बारे में।

क्या है मारबर्ग वायरस?
मारबर्ग एक खतरनाक विषाणुजनित रोग है जिसकी वजह से रक्तस्रावी बुखार हो सकता है। मारबर्ग और इबोला दोनों एक ही वायरस के परिवार के सदस्य है।
1967 में ईस्ट सेंट्रल अफ्रीका के युगांडा से मारबर्ग नाम की महामारी फैली थी चमगादड़ के जरिये फैलने वाला वायरस था जिसके चलते 478 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

कैसे फैलता है मारबर्ग
डब्लूएचओं के अनुसार, इंसानों में मारबर्ग वायरस का संक्रमण चमगादड़ों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति सीधे तौर पर इंसान को संकमित कर सकता है। संगठन का कहना है कि यह संक्रमित लोगों के रक्त, अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थ और सतहों के माध्यम से भी फैलने में सक्षम है।

मारबर्ग के लक्षण
इस खतरनाक वायरस से संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, तेज सिरदर्द और गंभीर अस्वस्थता के साथ मांसपेशियों में दर्द का अनुभव होगा। संक्रमित होने के तीसरे दिन गंभीर पतली दस्त, पेट में दर्द, ऐंठन, मतली और उल्टी जैसे लक्षण दिखाएं देते है। जो एक सप्ताह तक रहते हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा, "संक्रमित व्यक्ति इस दौरान भूत की तरह दिखाई देना लगता है, उसका चेहरा पूरी तरह बदल कर गहरी धंसी हुई आंखें, अभिव्यक्तिहीन चेहरा और बेजान सा दिखने लगता है।
वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, संक्रमण बिगड़ने पर आमतौर पर रक्तस्राव होता है, अक्सर शरीर के कई क्षेत्रों जैसे नाक, मसूड़ों और योनि से रक्तस्राव होने लगता है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक वायरस पहुंचने से संक्रमित व्यक्ति भ्रम, चिड़चिड़ापन और आक्रमक प्रवृति जैसे लक्षण भी दिखाई देते है। अधिक रक्तस्त्राव होने की स्थिति में संक्रमित की मुत्यु 8 से 9 दिन में हो जाती है।

मरबर्ग रोग का इलाज?
डब्लूएचओ के मुताबिक, मारबर्ग वायरस रोग (एमवीडी) को अन्य संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया, टाइफाइड बुखार, शिगेलोसिस, मेनिन्जाइटिस और अन्य वायरल रक्तस्रावी बुखार से चिकित्सकीय रूप से अलग करना मुश्किल हो सकता है। लक्षणों के अलावा एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट, सीरम न्यूट्रलाइजेशन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट आदि से इसके संक्रमण की पहचान की जा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ मरीज की उचित देखभाल और लक्षणों का बेहतर उपचार संक्रमण से उबरने में मदद कर सकता है।



Click it and Unblock the Notifications
