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लंग्स इंफेक्शन की वजह से सेप्टिक शॉक में थे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जाने इस स्थिति के बारे
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे और उनका इलाज दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में चल रहा था। अस्पताल की तरफ से बताया गया था कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे। सेप्टिक शॉक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें रक्तचाप काम करना बंद कर देता है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। आइए जानते हैं क्यों होता है सेप्टिक शॉक।

सेप्टिक शॉक के लक्षण-
लो ब्लड प्रेशर खासकर तब जब आपको खड़े होने पर चक्कर महसूस होने लगे।
- मितली और उल्टी
- डायरिया
- कोल्ड, रूखी और रूखी त्वचा
- 101 डिग्री से अधिक बुखार
- आपकी मानसिक स्थिति में बदलाव, जैसे भ्रम या भटकाव
- सेप्टिक शॉक एक मेडिकल इमरजेंसी है और अगर आपको लगता है कि आपको या आपके परिवार के किसी व्यक्ति को सेप्टिक शॉक है तो आपको तुरंत डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए।

सेप्टिक शॉक के कारण
एक जीवाणु, फंगल या वायरल संक्रमण आदि इसके प्रमुख कारण होते हैं।
- पेट या पाचन तंत्र में संक्रमण
- फेफड़ों में हो सकता है संक्रमण
- मूत्र नली में हो सकता है संक्रमण
- इसके अलावा प्रजनन प्रणाली में संक्रमण संभव है

सेप्टिक शॉक का इलाज
आमतौर पर, मरीजों का अधिक देखभाल के लिए आईसीयू में भर्ती कराया जाता है, ताकी उनके शरीर के अंगों और तंत्रों को सहारा दिया जा सके। कुछ मामलों में इमरजेंसी डिपार्टमेंट विभाग में उपचार शुरू हो सकता है, इसके अलावा यहां बताए गए तरीकों के जरिए इसका इलाज किया जा सकता है:
- एंटीबायोटिक्स
- ऑक्सीजन थेरेपी
- आपके रक्त प्रवाह को बढ़ाने के लिए दवा
- वासोप्रेसोर दवाएं- दवाएं जो रक्त वाहिकाओं को संकुचित करती हैं और रक्तचाप सर्जरी को बढ़ाने में मदद करती हैं (कुछ मामलों में)
- एक नस के माध्यम से सीधे दिए गए तरल पदार्थ (नसों)

इन्हें होता हैं खतरा
सेप्टिक शॉक बड़े-बुजुर्ग और एक से कम उम्र के बच्चों में सबसे आम स्थिति है। हालांकि इसके विभिन्न कारक जैसे गर्भवती होना, कुछ बीमारियां जैसे मधुमेह,किडनी या फेफड़े की बीमारी, कैंसर और कमजोर इम्यूननिटी आदि। इसकी वजह से सेप्टिक शॉक होने का खतरा अधिक रहता है।

सेप्टिक शॉक से क्या हो सकता है
सेप्टिक शॉक कई खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। इस दौरान मरीज की मौत भी संभव है।
- दिल की धड़कन रुकना
- असामान्य रक्त के थक्के बनना
- किडनी खराब होना
- सांस नहीं ले पाना
- आघात
- लीवर फेल
- आंतों के भाग में संक्रमण से क्षति होना



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