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लॉन्ग कोविड में दिख सकते है 200 से अधिक लक्षण, नई स्टडी का दावा
कोविड संक्रमित मरीजों में लंबे समय बाद लॉन्ग कोविड के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जिसमें मरीज रिकवर तो हो जाते है लेकिन उनमें कोविड के हल्के-फुलके लक्षण जरुर रहते है। ऐसे मरीजों की कोविड रिपोर्ट भी नेगेटिव आती है। गुरुवार को लैसेंट की जर्नल ईक्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च की मानें तो लॉन्ग कोविड से गुजर रहे मरीजों में 200 से ज्यादा लक्षण देखने को मिल सकते हैं, जो शरीर के अलग-अलग 10 अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि लॉन्ग कोविड के मरीजों के शरीर के 10 अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसके लक्षण मरीज में कम से कम 6 महीने तक रहते हैं।

इस रिसर्च में ये भी सलाह दी गई है कि नेशनल स्क्रीनिंग प्रोग्राम के जरिए मालूम किया जा सकता है कितने लोग लॉन्ग कोविड से गुजर रहे है और उनमें किस-किस तरह के लक्षण मौजूद हैं।
द गार्जियन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस रिसर्च में भाग लेने वाली रिसर्चर डॉक्टर एथेना अकरामी जो खुद एक लॉन्ग कोविड की मरीज है। उन्होंने कहा है कि लॉन्ग कोविड के 200 से ज्यादा लक्षणों को लेकर क्लीनिकल गाइडलांइस की आवश्यकता है ताकि इससे जूझ रहे मरीज सिर्फ दिल और फेफड़ों के स्वास्थय को ही तरजीह न दें। उन्होंने आगे बताया कि इंग्लैंड में ज्यादातर मरीज कोविड से रिकवर होने के बाद फेफड़ों से संबंधित जांच और इलाज पर जोर दे रहे हैं। क्योंकि कई लोगों में सांस लेने संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिली थी। लेकिन इसके बाद भी दूसरी समस्याएं और बढ़ रही हैं, जिस पर गौर करना बहुत आवश्यक हो गया है। इसके अलावा हमें हर लॉन्ग कोविड मरीज के सारे लक्षणों को मॉनिटर करके उसे पूरा इलाज करना जरुरी हैं।
एथेना कोविड से रिकवर होने के 16 महीनें बाद भी पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं कर पाती है। उनका मानना है कि ऐसे लाखों लोग होंगे जो इस परेशानी से गुजर रहे होंगे।
ये शोध यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में कराया गया था। जिसमें 56 देशों के 3,762 प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं पर अध्ययन किया गया है। इस रिसर्च में पाया गया कि लंबी अवधि तक कोविड की सबसे आम लक्षण थकान, एक्सरसाइज करने के बाद कमजोरी और कान में दर्द शामिल है। इसमें अलावा अन्य लक्षणों में ईची स्किन, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, सेक्सुअल डिस्फंक्शन, मूत्राशय नियंत्रण की समस्या, दिल की धड़कन, हाई ब्लड प्रेशर, प्रजनन संबंधी, याददाश्त में कमी, ऑटोइम्यून संबंधी, आंखों की रोशनी धुंधली पड़ना और डायरिया शामिल थे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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