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ऑवरग्लास सिंड्रोम क्या है? महिलाओं में इस एडिक्शन वजह हैं जानें, इन तरीकों से होता है ट्रीटमेंट
आपने महिलाओं के इस क्रेज के बारें में सुना होगा और देखा भी होगा कि वो लगातार एक्सरसाइज कर रही हैं, खाना नहीं खा रही हैं, अगर कुछ खाती हैं तो उल्टी के जरीये निकाल देती है। इसके साथ ही पुरूष भी एब्स की चाहत में घंटों-घंटों जिम में एक्सरसाइज करने में लगे रहते हैं। इसकी वजह से वो कई तरह के फूड को अवॉइड करते हैं, जिससे उनकी बॉडी में 6 पैक्स एब्स नजर आयें, और महिलाओं की चाहत ऑवर ग्लास जैसे पतली कमर की तमन्ना होती है। वो भी अपनी फेवरेट एक्ट्रेसेस की तरह ऑवर ग्लास कमर की इच्छा रखती हैं, लेकिन ये शौक कब सिड्रोंम बन जाता है उनको पता ही नहीं चलता। कई बार ये सिंड्रोम अनुवांशिक भी होती है या फिर किसी एक्सिडेंट की वजह से भी हो जाता है।

ऑवरग्लास सिंड्रोम क्या है?
ऑवरग्लास सिंड्रोम, जिसे स्टमक ग्रिपिंग के रूप में भी जाना जाता है। इसमें पेट में दर्द, खराब पोश्चर, और बॉडी इमेज कन्सर्न जो छोटी या पतली कमर के लिए दबाव का कारण बन सकती हैं।
ऑवरग्लास सिंड्रोम के कारण क्या हैं?
कुछ लोगों में, यह सिंड्रोम खराब पेट की मांसपेशियों, की वजह से भी हो सकता है। जबकि कुछ लोग अपने वजन को लेकर व साथ ही अपनी पतली कमर को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, जो पतली कमर की इच्छा रखते हैं, और इसे पाने के लिए कई प्रकार का एक्सरसाइज, फास्टिंग करते हैं, इसके साथ ही दवाइयां और ऑपरेशन भी करवाते हैं। ये परेशानी पर यंग लड़कियों में सबसे आम है। वहीं ऑवरग्लास सिंड्रोम किसी चोट या दुर्घटना के बाद भी हो सकता है। ये सिंड्रोम ठीक होने के बाद लंबे समय तक बना रह सकता है। कभी-कभी एक जीन में डिफेक्ट के कारण आवरग्लास सिंड्रोम आनुवंशिक हो जाता है। ये पैराथायराइड हार्मोन रिसेप्टर एक्टिवेटर को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से कैल्शियम के स्तर कम हो जाता है, जिससे मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

ऑवरग्लास सिंड्रोम कैसे विकसित होता है?
ऑवरग्लास सिंड्रोम, अक्सर उन लोगों को हो जाता है जो अपनी पतली कमर की इच्छा रखते हैं साथ ही एब्स बनाने के लिए हैवी एक्सरसारइज करते है। वहीं गलत सांस लेने के साथ गलत एक्सरसाइज करना इसका बड़ा कारण हो सकता है। जब छाती ऊंची हो जाती और पेट कम हो जाता है तब डायाफ्राम से पहले पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जो पीठ की कोर मसल्स को एक्टिव करती हैं, जिससे रेक्टस पेट की मसल्स के ऊपरी फाइबर्स में सिकुड़न हो जाती है।

आवरग्लास सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
- पेट में जकड़न, जी मचलाना, गैस का ज्यादा पास होना, सांस फूलना, पेट फूलना, एसिड रिफ्लक्स, उल्टी, लगातार दर्द, निगलने में कठिनाई, भूख कम लगना।
- भूख और वजन, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और गर्दन में दर्द।
- डायाफ्राम और पेट की मांसपेशियों के लगातार सिकुड़न के कारण पीठ की मांसपेशियों और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द
- कमर और गर्दन में लगातार दर्द रहने से सिरदर्द और माइग्रेन
- ऑवरग्लास सिंड्रोम से पीड़ित लोग वजन बढ़ने, अधिक परहेज़ और अधिक व्यायाम से ग्रस्त होते हैं
- एनोरेक्सिया नर्वोसा और बुलिमिया नर्वोसा नामक मनोवैज्ञानिक खाने के विकार हो सकते हैं।
- पुरुषों में ये सिंड्रोम महिलाओं से अलग है क्योंकि पुरुषों के लिए वजन कम होना मांसपेशियों के नुकसान के साथ दिखाई देता है

ऑवरग्लास सिंड्रोम का इलाज क्या है?
ऑवरग्लास सिंड्रोम का डायग्नोस गैस्ट्रोस्कोपी, बेरियम फूड टेस्ट से होता है।
व्यायाम जैसे कोर प्लैंक और वॉल पोस्चर कोर मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
टमी टक सर्जरी जैसी पेट की सर्जरी के बाद चलने से पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है।
ऑवरग्लास सिंड्रोम से बचने के लिए, इसके कारण होने वाले लक्षणों का इलाज करना चाहिए।
कब्ज से बढ़ जाता है, तो हाई फाइबर आहार शामिल करें और खूब पानी पिएं।

निष्कर्ष
ऑवरग्लास सिंड्रोम का डायग्नोस मुश्किल हो सकता है, ये अस्थायी या फिर लंबे समय तक भी हो सकता है। एक्सरसाइज, अपन लाइफ स्टाइल में बदलाव और फिजियोथेरेपी से ट्रामेंट से इसे सही किया जा सकता है।
नोट- अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक के पास जाकर इस सिड्रोंम के बारें में विस्तार से जानकारी पा सकते हैं।यहां बताई गई जानकारी सामान्य है।



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