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किस चीज की कमी से होता है बवासीर? जानिए कारण, लक्षण, क्या खाकर जड़ से खत्म होगी बीमारी
Bawaseer causes and symptoms: बवासीर (Haemorrhoids) को आम भाषा में पाइल्स भी कहा जाता है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति को बैठने, चलने और शौच के दौरान काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी में गुदा मार्ग (Anal Canal) की नसें सूज जाती हैं, जिससे दर्द, जलन, खुजली और कई बार खून आने जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य मनीष जी के अनुसार, गलत खानपान, लंबे समय तक बैठे रहना और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी बवासीर का प्रमुख कारण बन सकती है। कुछ मामलों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन कई बार सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव जरूरी हो जाता है।
बवासीर किसकी कमी से होती है? | Bawaseer Kiski Kami Se Hoti Hai
बवासीर मुख्य रूप से फाइबर और पानी की कमी के कारण होती है। जब शरीर को पर्याप्त फाइबर और तरल नहीं मिलता, तो कब्ज की समस्या पैदा होती है। कब्ज के दौरान मल त्याग में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे गुदा की नसों पर दबाव बढ़ जाता है और वे सूज जाती हैं।

बवासीर होती क्या है?
बवासीर में गुदा (Anus) के अंदर या बाहर मस्से बन जाते हैं। ये मस्से छोटे दानों जैसे दिखाई देते हैं, जिनमें खुजली, सूजन, दर्द और खून आने की समस्या हो सकती है। जब ये मस्से अंदर-बाहर होते हैं, तो दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है।
बवासीर होने की मुख्य वजहें
बवासीर के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ आम कारण नीचे दिए गए हैं:
लंबे समय तक कब्ज रहना या मल का कठोर होना
फाइबर युक्त भोजन की कमी
कम पानी पीना
ज्यादा देर तक बैठे रहना
शौच के दौरान जरूरत से ज्यादा जोर लगाना
अत्यधिक मसालेदार और जंक फूड का सेवन
बवासीर होने के लक्षण | Symptoms of Bawaseer
बवासीर के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर हो सकते हैं:
गुदा के आसपास खुजली या जलन
बैठने में दर्द या परेशानी
मल त्याग के समय या बाद में खून आना
गुदा के पास गांठ या सूजन महसूस होना
बार-बार शौच जाने की इच्छा
मल त्याग में कठिनाई
बवासीर होने पर क्या खाएं?
फल शामिल करें
पाचन को दुरुस्त रखने के लिए फाइबर युक्त फल बेहद जरूरी हैं। आप सेब, केला, पपीता, संतरा, अमरूद, तरबूज और अंजीर जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं।
हरी सब्जियां खाएं
पालक, मेथी, लौकी, तोरई, गाजर, बीन्स और अन्य पत्तेदार सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं, जो कब्ज से राहत दिलाने में मदद करती हैं।
साबुत अनाज को डाइट में शामिल करें
ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन ब्रेड, दालें और फलियां पेट को हल्का रखती हैं और पाचन सुधारती हैं।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
अगर खानपान सुधारने और परहेज करने के बाद भी:
लगातार खून आ रहा हो
दर्द असहनीय हो
मस्सों का आकार बढ़ रहा हो
तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर इलाज शुरू करने से बवासीर को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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