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Dead Butt Syndrome: वर्क फ्रॉम हॉम वालों को घंटो बैठे रहने से हो सकती है यह दर्दनाक स्थिति, जानें क्या करें?
Dead Butt Syndrome : कोविड-19 के बाद वर्क फ्रॉम होम अब ऑफिस जॉब का एक कल्चर सा बन गया है। पूरे दिन स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने के कारण कई सारी समस्याएं होने लगती है। कई लोगों को तो वर्क फ्रॉम होम कल्चर रास भी आने लगा है। लेकिन पूरे दिन घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने की वजह से कई सारी हेल्थ समस्याएं होने लगी है।
कमर दर्द और गले के दर्द के अलावा एक और दर्द है जिनमें से एक है डेड बट सिंड्रोम। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में-

डेड बट सिंड्रोम क्या है?
डेड बट सिंड्रोम को मेडिकल टर्म में ग्लूटस मेडियस टेंडिनोपैथी कहा जाता है। यह कंडीशन तब होता है जब ज्यादा बैठने के कारण शरीर पर इसका असर होता है। कूल्हे यानी हिप्स और मांसपेशियों में दर्द होता है। इसकी वजह से कारण कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। इसके कारण ग्लूट मांसपेशियां पेल्विस को स्टेबल करने और पोश्चर बनाए रखने के लिए किया जाता है।
डेड बट सिंड्रोम की वजह
इनएक्टिव लाइफस्टाइल की वह से यह समस्या होने लगती है। जिसमें बहुत ज्यादा बैठना या लेटना और पर्याप्त मूवमेंट न करना इसका कारण बन सकता है। इतना ही नहीं, जो लोग सुबह-शाम दौड़ते हैं, अगर वे अपना बाकी का समय बिना दौड़े डेस्क पर बिताते हैं, तो उन्हें भी इस सिंड्रोम का खतरा ज्यादा होता है।
डेड बट सिंड्रोम से कैसे करें बचाव
इस सिंड्रोम से बचने के लिए आपको लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है। इस समस्या को निपटने के लिए अपनी रूटीन में एक्सरसाइज को जगह दें, ग्लूट-मजबूत करने वाली एक्टिविटीज आदि कर सकते हैं। साथ ही स्टेंडिंग डेस्क एक्सरसाइजेज, स्क्वाट्स, लंजेस, स्ट्रेचिंग की मदद से भी इससे राहत पा सकते हैं।
अच्छा पोश्चर बनाए रखने के लिए आरामदेय कुर्सी का इस्तेमाल करें। भीअगर समय रहते इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो कई बीमारी हो सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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