Latest Updates
-
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार
कैसे पता चलेगा कि मेनोपॉज आने वाला है? एक्सपर्ट ने बताए लक्षण और प्री-मेनोपॉज और मेनोपॉज में अंतर
Perimenopause vs. Menopause Symptoms : मेनोपॉज, जिसे हिंदी में रजोनिवृत्ति कहा जाता है, महिलाओं के जीवन में एक प्राकृतिक अवस्था है जब उनके मासिक धर्म (पीरियड्स) स्थायी रूप से बंद हो जाते हैं। यह सामान्यत: 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह पहले या बाद में भी हो सकती है। मेनोपॉज तब माना जाता है जब महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता। महिलाएं अक्सर मेनोपॉज और प्री-मेनोपॉज को लेकर कंफ्यूज हो जाती है।
इस बारे में एक्सपर्ट से हमने बात की तो नोएडा के मदरहुड हॉस्पिटल की वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ मंजू गुप्ता ने बताया कि प्री-मेनोपॉज मेनोपॉज का एक तरह का लक्षण है, जो मेनोपॉज होने की एक प्रकिया है। यह एक नेचुरल प्रोसेस है जिससे हर महिला को गुजारना पडता है। आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं।

मेनोपॉज के चरण
प्री-मेनोपॉज: यह वह समय होता है जब पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं होते। इसमें कई बार भारी रक्तस्राव या बहुत कम रक्तस्राव हो सकता है।
मेनोपॉज: यह वह समय होता है जब महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते।
पोस्ट-मेनोपॉज: यह मेनोपॉज के बाद की अवस्था होती है, जब हार्मोनल परिवर्तन कम हो जाते हैं लेकिन उनके प्रभाव बने रह सकते हैं।
मेनोपॉज के लक्षण
मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन अगर इसके लक्षण महिलाओं में शारीरिक और मानसिक बदलाव की वजह बनता है। ज्यादा दिक्कत होने पर महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों का स्तर काफी कम हो जाता है, जिसकी वजह से महिलाओं का लिबिडो घट जाता है और उनकी कामेच्छा में कमी आने लगती है। इसके अलावा मेनोपॉज का सबसे प्रमुख लक्षण मासिक धर्म का बंद होना है। इस अवस्था के बाद महिलाएं प्राकृतिक रूप से संतान को जन्म देने में सक्षम नहीं होतीं।
शारीरिक लक्षण
- हॉट फ्लैशेज की वजह से अचानक से शरीर में अत्यधिक गर्मी का अनुभव होना।
- रात में सोते समय अत्यधिक पसीना आना।
- वजाइना में सूखापन, जिससे असहजता या खुजली हो सकती है।
- हड्डियों का कमजोर होना और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ना।
- नींद में बाधा, अनिद्रा या ठीक से न सो पाने की समस्या।
मानसिक और भावनात्मक लक्षण
- मूड में अचानक बदलाव।
- छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।
- कई महिलाओं को इस दौरान उदासी या चिंता हो सकती है।
प्री-मेनोपॉज (Perimenopause)
प्री-मेनोपॉज वह चरण है जब महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट होने लगती है, जिससे पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। यह आमतौर पर 40-50 साल की उम्र के बीच होता है, हालांकि कुछ महिलाओं में यह पहले भी शुरू हो सकता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलावों के कारण कई लक्षण दिखाई देते हैं।
प्री-मेनोपॉज के लक्षण
- हार्मोनल बदलावों के कारण वजाइना में सूखापन और खुजली हो सकती है।
- हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव से ब्रेस्ट में सूजन और दर्द महसूस हो सकता है।
- अचानक से शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होना, खासकर चेहरे, गर्दन और सीने पर।
- मूड में अचानक बदलाव, जैसे गुस्सा, चिड़चिड़ापन या उदासी।
- खासकर रात में पसीने से भीग जाना, जिसे "नाइट स्वेट्स" कहा जाता है।
- बिना किसी खास कारण के अत्यधिक थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होना।
- हार्मोनल असंतुलन के कारण मानसिक तनाव और चिंता की स्थिति बढ़ सकती है।
ये लक्षण धीरे-धीरे उभर सकते हैं और हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।
इलाज
मेनोपॉज एक नेचुरल प्रोसेस है, जो हर महिला के जीवन में जरूर आता है। इसका कोई इलाज नहीं है लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर इसके लक्षणों को कम किया जाता है।
हाइड्रेशन
दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। यह वजाइना की ड्राईनेस और अन्य लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
अच्छी नींद लें
अच्छी नींद के लिए सोने का सही रूटीन बनाएं, कैफीन से बचें और रिलैक्सिंग एक्टिविटीज करें।
हेल्दी डाइट लें
इस समय शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, और मिनरल्स से भरपूर आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, नट्स, और साबुत अनाज का सेवन करें। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन D का सेवन जरूरी है। हार्ट और ब्रेन हेल्थ के लिए ओमेगा-3 युक्त फूड्स जैसे मछली, अलसी के बीज और अखरोट का सेवन करें। इसके अलावा कैफीन और एल्कोहल का अधिक सेवन न करें क्योंकि ये हॉट फ्लैशेज और नींद की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT)
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) एक चिकित्सा उपचार है, जिसमें महिलाओं को ऐसे हार्मोन दिए जाते हैं, जिन्हें उनका शरीर रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के दौरान बनाना कम या बंद कर देता है। इसका मुख्य उद्देश्य मेनोपॉज के कारण होने वाले लक्षणों का प्रबंधन करना होता है। HRT में महिलाओं के शरीर में बनने वाले हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन को दिया जाता है। जो मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद करता हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications