KFC के चिकन में म‍िला मैग्नीशियम सिलिकेट, आंतों के ल‍िए जहर है ये केम‍िकल, जानें नुकसान

तमिलनाडु के थूथुकुडि जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दुनियाभर में चिकन के ल‍िए फेमस अमेरिकी रेस्टोरेंट चेन KFC के एक आउटलेट में छापा मारा। इस आउटलेट से लगभग 18 किलो मैग्नीशियम सिलिकेट-सिंथेटिक और इसे इस्तेमाल कर शुद्ध किए गए 45 लीटर पुराना खाना पकाने का तेल जब्त क‍िया गया।

जानकारी के मुताबिक KFC अपने चिकन को क्रंची बनाने के ल‍िए मैग्नीशियम सिलिकेट-सिंथेटिक का इस्तेमाल कर रहा था। अब FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्‍टैंटर्ड ऑथरिटी ऑफ इंडिया)ने इस फ्रेंचाइजी का लाइसेंस टेम्पररी कैंसल कर दिया गया है। आइए जानते हैं क‍ि मैग्नीशियम सिलिकेट-सिंथेटिक कलर क्‍या है? जिसके इस्‍तेमाल पर भारत में लगी है रोक।

What is Magnesium Silicate Which Found in KFC s Chicken

हालांकि KFC ने दावा किया है कि उनके यहां खाद्य पदार्थों को बनाने के ल‍िए FSSAI की गाइडलाइंस को फॉलो क‍िया जाता है।

मैग्नीशियम सिलिकेट-सिंथेटिक कलर क्‍या है?

मैग्नीशियम सिलिकेट-सिंथेटिक एक खतरनाक केमिकल है, जिसके इस्तेमाल पर FSSAI ने प्रतिबंध लगा रखा है मैग्नीशियम सिलिकेट सिंथेटिक एक तरह का सफेद, गंधहीन, बारीक पाउडर है, जिसे लैब में तैयार क‍िया जाता है। यह पाउडर पानी में आराम से घुल जाता है। इसका इस्तेमाल दवाएं, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। यह केमिकल पानी को सोख लेता है और इसमें एंटासिड गुण पाए जाते हैं।


क‍िस काम आता है मैग्नीशियम सिलिकेट सिंथेटिक?

मैग्नीशियम सिलिकेट का इस्‍तेमाल कई खाद्य पदार्थों में एंटी-केकिंग एजेंट यानी खाने की चीजों को सूखा और क्रंची बनाने के ल‍िए जाता। इस पदार्थ को अक्सर सूखे पाउडर वाले खाद्य पदार्थों, नमक और अन्य खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है ताकि वो आपस में एक दूसरे से चिपके नहीं और उनकी बनावट अच्‍छी बनी रहे।

मैग्नीशियम सिलिकेट सिंथेटिक के साइडइफेक्‍ट

मैग्नीशियम सिलिकेट सिंथेटिक की ज्यादा मात्रा में सेवन करने से इससे सेहत को नुकसान पहता है। इसे सांस के जरिए अंदर लेने से श्वसन मार्ग में जलन हो खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्‍याएं हो सकती है। यह पदार्थ आंतों के ल‍िए जहर समान होता है।

इसके अलावा इसके सेवन से मतली, उल्टी, कब्ज, हाइपरमैग्नेसीमिया (खून में मैग्नीशियम का लेवल बढ़ जाना) और दस्त भी हो सकती है। एसिडिटी दवाओं में भी इस पदार्थ का इस्‍तेमाल होता है। जिसके सेवन से कब्ज और दस्त की शिकायत भी हो सकती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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