Latest Updates
-
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम -
Corona Alert: फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश में 2 मौतें, 4 नए केस से बढ़ी चिंता -
बारिश में बनाएं क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े और हरे धनिए-पुदीने की चटनी, नोट कर लें आसान रेसिपी -
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय -
इस कथा के बिना अधूरा है योगिनी एकादशी व्रत, मिलता है 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य -
Yogini Ekadashi 2026 Wishes: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें शुभकामनाएं -
बारिश का पानी स्किन के लिए अच्छा या खराब, जानें मानसून में इसके फायदे और नुकसान -
AC कोच बना 'हनीमून सुइट', फूलों-गुब्बारों से सजाया ट्रेन का डिब्बा, वायरल हुआ वीडियो, जानें रेवले के नियम -
Kiara Advani ने यश संग 'तबाही' में दिए दिए इंटीमेट सीन, जानें कैसे शूट किए जाते हैं बोल्ड सीन?
शादी में दूल्हा-दुल्हन को क्यों लगाई जाती है हल्दी? जानें इसके पीछे का विज्ञान
Why do we apply haldi to the bride and groom before wedding : वेडिंग सीजन शुरू हो चुका है। शादी के बंधन में बंधने से पहले दूल्हा और दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। आजकल जहां हल्दी लगाने की परांपरा मात्र रस्म बनकर रह गई है जबकि पुराने जमाने में शादी से 10 से 15 दिन पहले हल्दी लगाने की रस्म शुरू हो जाती थी।
वैसे आपको बता दें कि शादियों में हल्दी की रस्म का महत्व केवल परंपरा और रीति-रिवाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं शादी में हल्दी लगाने की रस्म की पीछे की वजह।

हल्दी लगाने के फायदे
शादी के अवसर पर हल्दी का इस्तेमाल इसलिए भी किया जाता है क्योंकि यह त्वचा को संक्रमण से बचाने के साथ-साथ उसे डिटॉक्स भी करती है। हल्दी त्वचा की गहराई में जाकर उसे साफ करती है और चमकदार बनाती है। साथ ही इसके आरामदायक गुणों से शरीर रिलेक्स होता है, जिससे शादी के समय होने वाली तनाव और नर्वसनेस भी कम हो जाती है। हल्दी का यह रस्म सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक उपचार भी है जो मन और शरीर दोनों को सुकून और ऊर्जा देता है।
हल्दी की रस्म की धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में शादी एक पवित्र और आध्यात्मिक बंधन माना गया है। इसमें देवी-देवताओं की कृपा और आशीर्वाद को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। भगवान विष्णु को वैवाहिक जीवन का संरक्षक माना जाता है।
पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है, जो पवित्रता, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है क्योंकि यह शुद्धिकरण, शुभता और स्वास्थ्य का प्रतीक है। यही कारण है कि शादी की रस्मों में हल्दी और पीले रंग को विशेष स्थान दिया गया है। दूल्हा और दुल्हन इस रस्म के दौरान पीले कपड़े पहनते हैं, जो इस शुभ अवसर की पवित्रता और उल्लास को और अधिक बढ़ाता है।
स्किन केयर में वरदान
त्वचा की देखभाल में हल्दी का महत्व बहुत हरा है। ब्यूटिशियन प्राची गोस्वामी बताती है कि आजकल ब्यूटी ट्रीटमेंट में कई तरह स्किन केयर ट्रीटमेंट मार्केट में अवेलेबल है। मगर शादियों में हल्दी का अलग ही महत्व है। हल्दी, विशेष रूप से उबटन के रूप में, त्वचा की समस्याओं का प्राकृतिक समाधान है। पुराने समय में ब्यूटी पार्लर और स्किन केयर ट्रीटमेंट का ट्रेंड नहीं था, तो दुल्हन के लिए हल्दी से खासतौर पर उबटन तैयार किया जाता था। शादी से पहले कई दिनों पहले दुल्हन की हल्दी का उबटन लगाना शुरु कर दिया जाता था। इसे पीठी लगाना भी कहा जाता था। शादी के दिन दुल्हन का रंग खुलकर सामने आ सकें इसलिए सिर से लेकर पांव तक दुल्हन को हल्दी लगाई जाती थी।
में हल्दी का उपयोग एक प्राकृतिक शुद्धिकरण एजेंट की तरह काम करता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है, जो त्वचा को दाग-धब्बों, खुजली और संक्रमण से बचाता है। यह न केवल बाहरी सुंदरता को निखारता है, बल्कि त्वचा की भीतरी सेहत को भी बनाए रखता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications