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क्या होती है वैजाइनल एट्रोफी, जानिए किन कारणों से ये होती है?
जब प्राइवेट पार्ट के आस पास की त्वचा सूखी और बेजान सी हो जाती है, उस स्थिति को वैजाइनल एट्रोफी कहते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में कई शारीरिक बदलाव आते हैं जिसमें से एक वेजाइनल एट्रॉफी है। इस अवस्था में जननांगों के पास की त्वचा रूखी और पतली हो जाती है। ऊत्तकों में लचीलापन कम हो जाता है जिस वजह से असहज महसूस होता है। ऐसा होने पर मूत्राशय संबंधी परेशानी और यौन अंगों में असहजता भी बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में सेक्स करने पर महिलाओं को दर्द और जलन महसूस होती है। वैजाइनल एट्रॉफी में त्वचा रूखी होकर अपना लचीलापन खो देती है। वेजाइना में संक्रमण होने से मूत्राशय के मार्ग और घातक योनि संक्रमण का खतरा रहता है। क्या आप जानते हैं कि महिलाओं में होने वाले इस रोग के पीछे क्याा कारण है?
तो चलिए जानते हैं इस सवाल का जवाब।

रजोनिवृत्ति (मेनापॉज़)
मेनापॉज की स्थिति में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा काफी घट जाती है जिससे वैजाइनल एट्रॉफी का खतरा रहता है। आमतौर पर मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट आती है। ऐसा 40-45 उम्र की महिलाओं के साथ होता है। वैजाइनल एट्रॉफी में माहवारी बंद हो जाती है और एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है।

कैंसर का ईलाज
कैंसर की ट्रीटमेंट में प्रयोग होने वाली कीमोथेरेपी, पेल्विक रेडिएशन और ट्रीटमेंट से भी एस्ट्रोजन का स्तर गिर जाता है जिस वजह से वैजाइनल एट्रॉफी की संभावना बढ़ जाती है।

पेरीमेनापॉज़
पेरीमेनोपॉज़ में भी एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है। इसलिए कई महिलाओं में पेरीमेनोपॉज़ के दौरान वेजाइनल एट्रॉफी की शिकायत हो सकती है।

सर्जिकल मेनोपॉज़
सर्जिकल मेनोपॉज की वजह से भी वैजाइनल एट्रॉफी की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में किसी बीमारी के चलते सर्जरी द्वारा अंडाशय निकाल दिया जाता है। इससे महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तशर गिर जाता है।

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के प्रयोग से भी एस्ट्रोजन के लैवल में गिरावट आती है जिससे वैजाइनल एट्रॉफी होने का खतरा रहता है। अगर आप फाइबॉएड या एंडोमिट्रिओसिस की दवाएं खा रहीं हैं तो आपको नियमित एस्ट्रोजन लैवल का चेकअप करवाते रहना चाहिए।

स्तनपान
शिशु को स्तनपान करवाने के कारण भी महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी घट जाता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं के वैजाइनल एट्रॉफी की चपेट में आने का खतरा रहता है। कुछ समय बाद एस्ट्रोजन लैवल के बढ़ने पर ये समस्या भी खत्म हो जाती है।

सुझाव
कुछ अध्ययन के मुताबिक महिलाओं को नियमित रूप से सेक्स करना चाहिए। इससे वैजाइनल एट्रॉफी से सुरक्षा मिलती है। एस्ट्रोजन लैवल के कम होने पर भी नियमित सेक्स करना फायदेमंद रहता है।

उपचार
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण में महिलाओं को नियमित सेक्स करना चाहिए। इसके अलावा हार्मोनल रिप्लेसमेंट थेरेपी भी एक उपाय है। कुल मिलाकर महिलाओं को इस बीमारी से बचने के लिए सेक्स लाइफ में ज्यादा एक्टिव रहना चाहिए। सिर्फ इस बीमारी ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी सेक्स कई तरह से फायदेमंद होता है। अगर आपको ओवरी या अपने यौन अंगों में किसी भी तरह का बदलाव नज़र आता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ध्यान रहे किसी भी बीमारी को शुरुआती समय में रोकना सबसे ज्यादा आसान होता है इसलिए बिलकुल भी लापरवाही न बरतें। वैसे भी महिलाओं को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए।



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