Latest Updates
-
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना
कहीं आपकी बोन की डेंसिटी कम तो नहीं हो रही? पहचानें इन संकेतों से
हड्डियां सिर्फ शरीर को एक संरचना ही प्रदान नहीं करती हैं, बल्कि विभिन्न अंगों के लिए सेफगार्ड की तरह काम करना, मांसपेशियों को बनाए रखना और कैल्शियम का भंडारण जैसे कार्य भी हड्डियों द्वारा ही किए जाते हैं। इसलिए, शरीर के विभिन्न अंगों की तरह हड्डियों का ख्याल रखना बेहद आवश्यक होता है। यह बच्चों से लेकर बूढ़ो तक के लिए जरूरी है। हालांकि, महिलाओं को अपनी बोन हेल्थ का विशेष रूप से ख्याल रखना होता है। दरअसल, 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं की बोन डेंसिटी कम होने लगती है। जिसके कारण उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
आपको शायद पता ना हो, लेकिन भारत में लगभग 46 मिलियन महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया का खतरा अधिक होता है क्योंकि महिलाओं की हड्डियां पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक कॉम्पैक्ट और कम मोटी होती हैं। इतना ही नहीं, मेनोपॉज के बाद उनकी हड्डियों पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि हार्मोन स्राव का स्तर कम हो जाता है, जो हड्डियों को सहारा देने में मदद करता है। हालांकि, अगर महिला समय रहते बोन डेंसिटी के लॉस होने के कुछ संकेतों को समझें और अपने खानपान व लाइफस्टाइल में बदलाव करें तो इससे इस समस्या से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको महिलाओं में बोन डेंसिटी लॉस होने के कुछ लक्षणों के बारे में बता रहे है-

बार-बार हड्डी टूटना
हड्डी में दरारें और फ्रैक्चर, कई मामलों में, शुरुआती संकेत हैं कि जो महिला ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं। आमतौर पर, यह समस्या हड्डियों की डेंसिटी कम होने होने के कारण होती है। इस स्थिति में मामूली रूप से गिरने या चोट लगने पर महिला को गंभीर हड्डी की चोट का सामना करना पड़ सकता है, जो अमूमन कलाई, कूल्हे या बैक पर हो सकती है।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना
अगर आपको बार-बार पीठ दर्द का अनुभव होता है, तो यह मूल लक्षणों में से एक हो सकता है क्योंकि रीढ़ की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण हड्डियां सामान्य दबाव को संभालने में विफल हो जाती हैं। यह महिलाओं में बहुत आम है, खासकर 30 साल की उम्र के बाद, हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर डालना शुरू हो जाती है।
पॉश्चर में बदलाव
कमजोर हड्डियों का प्रभाव महिलाओं के बॉडी पॉश्चर पर पड़ता है, क्योंकि रीढ़ (कशेरुक) उस बिंदु तक कमजोर हो सकती है जहां कोलेस्प हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं का पॉश्चर बदल जाता है।

दांतों का गिरना या मसूड़ों से खून आना
दांतों का गिरना या मसूड़ों से खून आने का मुख्य कारण हड्डियों का कम घनत्व हो सकता है। यह कैल्शियम की कमी के कारण हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप सीधे जबड़े की हड्डी कमजोर हो जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित महिलाओं में अमूमन कम दांत होते हैं, जबकि सामान्य बोन डेंसिटी वाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता है।
बोन डेंसिटी को प्रभावित करने के कारण
हालांकि महिलाओं की बोन डेंसिटी के कम होने का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन यह देखा गया है कि आपका लाइफस्टाइल हड्डियों के स्वास्थ्य में योगदान देने में प्रमुख भूमिका निभाती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही कारकों के बारे में बता रहे हैं-
• लंबे समय तक काम करने के कारण बोन डेंसिटी कम हो सकती है। हो सकता है कि कोई व्यक्ति उतनी मात्रा में शारीरिक गतिविधि करने में सक्षम न हो जितना आवश्यक है। हड्डियों में अकड़न के कारण पैरों में लगातार ऐंठन और दर्द हो सकता है।
• मोटापा भी हड्डियों के कमजोर होने का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि अधिक वजन हड्डियों और जोड़ों पर बहुत अधिक दबाव डालता है।
• लगातार धूम्रपान करने से हड्डियों की सेहत भी खराब हो सकती है। धूम्रपान से शरीर में फ्री रेडिकल्स पैदा होते हैं, जो न केवल हड्डियों के लिए हानिकारक होते हैं बल्कि फेफड़ों और अन्य प्रमुख अंगों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
• धूम्रपान की तरह ही शराब का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हार्मोन के स्राव को भी कम करता है।
• अधिक सोडियम का सेवन भी हड्डियों के लिए जोखिम भरा होता है क्योंकि यह मूत्र में कैल्शियम को रिलीज करता है। ऐसे में बोन डेंसिटी कम होती है।



Click it and Unblock the Notifications
